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Gorakhpur News: उद्यमियों ने पीएम को लिखा खत...पूरे देश में हो एक जैसी स्कूल ड्रेस

Wed, 18 Sep 2024 07:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2024 07:54 AM IST
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Gorakhpur News: Entrepreneurs wrote a letter to PM...school dress should be uniform in the entire country.
गोरखपुर। रेडिमेड गारमेंट्स का हब बन रहे गोरखपुर को देशभर के सरकारी स्कूलों में बार-बार बदल रहे ड्रेस से झटका लगा है। इस साल यहां के उद्यमियों का करीब 75 फीसदी माल डंप हो गया है। इसका असर इनके उत्पादन पर भी पड़ा है। उद्यमियों का कहना है कि अगर उनके माल की सप्लाई नहीं हुई तो इसका असर पूरे उद्योग पर पड़ेगा, इसीलिए उद्यमियों ने प्रधानमंत्री व केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि पूरे देश में स्कूली ड्रेस एक जैसा रहे और सत्र शुरू होने के पहले महीने में ही ड्रेस खरीद अनिवार्य हो।
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गोरखपुर का गोरखनाथ, गीडा, पिपरौली, सहजनवां और संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद व मगहर कस्बे में बड़े पैमाने पर स्कूल ड्रेस बनाने का काम होता है। करीब 300 छोटे-बड़े उद्यमी इस काम में लगे हैं। गोरखपुर में हर साल पॉवरलूम से करीब पांच करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता है। इस कपड़े की कटिंग, सिलाई और पैकेजिंग के काम से हजारों लोग जुड़े हैं।
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पिपरौली, सहजनवां और मगहर में महिलाएं घर में इन स्कूल ड्रेस में काज-बटन का काम करके भी हर दिन 400-500 रुपये कमा लेती हैं। गोरखपुर में इसे एक जिला एक उत्पाद की श्रेणी में शामिल करने और गीडा में गारमेंट्स उद्योग के लिए अलग से क्षेत्र निर्धारित किए जाने के बाद काम में और तेजी आई थी, लेकिन अचानक ही काम सुस्त पड़ गया है।
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गीडा क्षेत्र में पॉवरलूम चलाने वाले आशीष खेतान, सौरभ जालान और रसूल अहमद बता रहे हैं कि गोरखपुर से स्कूल ड्रेस की सप्लाई यूपी के अलावा बिहार, झारखंड और उड़ीसा तक हाे रही थी। इस साल खरीदार ही नहीं आ रहे हैं। उड़ीसा में नई सरकार के आने के बाद अगले सत्र से स्कूल ड्रेस बदलने की चर्चा मात्र के चलते ही वहां के व्यापारियों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। यही हाल दूसरे राज्यों का भी है।

एक समान ड्रेस लागू होने से मिलेगा फायदा
पॉवरलूम संचालक और लघु उद्योग भारती के मंडल अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने प्रधानमंत्री व शिक्षा मंत्री को भेजे पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि कई प्रदेशों के सरकारी स्कूलों में हर दो से तीन साल बाद ड्रेस का रंग बदल जाता है। सरकार नए रंग और स्वरूप का निर्धारण तब करती है, जब ड्रेस बंटने का समय होता है। उस वक्त तत्काल इतना माल सप्लाई देना संभव नहीं होता। इसका फायदा कुछ चुनिंदा कंपनियों को ही मिलता है। इसकी जगह अगर केंद्र सरकार पूरे देश में एक समान ड्रेस व्यवस्था लागू कर दे और गुणवत्ता पर सख्त निगरानी हो तो इसका फायदा छोटे और मझोले उद्योगों को मिलेगा। इसके अलावा ड्रेस खरीदने के लिए अभिभावक के खाते में सीधे पैसा भेजने के बजाय स्कूलों या सरकार की तरफ से खरीदारी हो तो सभी बच्चों के लिए ड्रेस खरीदना तय होगा। इससे भी उद्योगों को राहत मिलेगी। जब ड्रेस की खरीद होगी तो इससे जुड़े छोटे-छोटे कारोबार भी तेजी से विकसित होंगे।


वर्जन
रेडिमेड गारमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से कई प्रयास किए जा रहे हैं। माल डंप होने की जानकारी नहीं है। उद्यमियों से बात करके उनकी समस्या का हल निकालने का प्रयास होगा।

-अनुज मलिक, सीईओ गीडा
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