चिड़ियाघर और शहर के अन्य हिस्सों में बर्ड फ्लू संक्रमण बत्तखों से फैला है। बत्तख से यह संक्रमण कौओं में फैला, जिसके बाद कौओं ने इसे चिड़ियाघर और मीट की दुकानों तक पहुंचा दिया। पिछले दिनों संक्रमण की जांच के लिए चिड़ियाघर आई केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की टीम की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है।
चिड़ियाघर के वेटलैंड और रामगढ़ताल में सर्द मौसम में बड़ी संख्या में हर साल प्रवासी पक्षी आते हैं। इसमें लेसर विसलिंग डक, कॉमन कूट समेत बत्तखाें की कई प्रजातियां शामिल हैं। बत्तखों को आमतौर पर बर्ड फ्लू का कैरियर माना जाता है। विश्वभर में हुए कुछ शोध में सामने आया है कि बत्तख बर्ड फ्लू फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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चिड़ियाघर में सैनिटाइजेशन करते
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसमें पाया गया है कि बत्तख फ्लू फैलाने वाले एच 5 एन 1 वायरस को 17 दिनों तक अपने साथ रख सकती हैं और फैला सकती हैं, जिससे अन्य पक्षियों के साथ-साथ मनुष्यों के लिए भी दीर्घकालिक खतरा पैदा हो सकता है। टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि बत्तख में अक्सर यह बीमारी पाई जाती है। संक्रमित होने के बावजूद उनमें लक्षण नहीं दिखते।
दरअसल, एक मई को ओलावृष्टि के बाद रामगढ़ताल में कई बत्तख मर गई थीं। विशेषज्ञों ने भी आशंका जताई थी कि मरीं बत्तख को कौओं ने खाया होगा, जिससे वे बर्ड फ्लू से संक्रमित हो गए। इसके बाद कौओं ने चिड़ियाघर और शहर के अन्य हिस्सों में संक्रमण फैला दिया।
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चिड़ियाघर में सैंपल लेती टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
20 से ज्यादा बत्तख मरी थीं
एक मई को हुई ओलावृष्टि के बाद रामगढ़ताल में 20 से भी ज्यादा बत्तख मर गई थीं। सात मई को चिड़ियाघर के अस्पताल में बाघिन शक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद जांच के लिए शक्ति का विसरा राष्ट्रीय उच्च पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजा गया था, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी।
विशेषज्ञाें का कहना है कि कौओं ने मरी हुईं बत्तखों को खा लिया और चिड़ियाघर में घूमने लगे। बर्ड फ्लू हवा में तेजी से फैलता है, इसी वजह से जानवर भी संक्रमित हो गए। चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि परिसर में करीब 10 से अधिक कौवे मरे मिले थे। जांच के लिए पांच का सैंपल भोपाल भेजा गया था, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी।
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चिड़ियाघर में हाई अलर्ट
- फोटो : अमर उजाला
मीट की दुकानों तक फैला संक्रमण
चिड़ियाघर के वेटलैंड में पेड़ और पर्याप्त भोजन होने की वजह से वहां बड़ी संख्या में कौवे रहते हैं। रामगढ़ताल से करीब होने की वजह से सबसे पहले संक्रमण चिड़ियाघर में फैला। इसके बाद ये धीरे-धीरे शहर में मीट की दुकानों तक भी फैल गया।
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चिड़ियाघर में कर्मचारियों का नमूना जांच के लिए एकत्रित करते आरएमआरसी की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
टीम में ये लोग थे शामिल
चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत के बाद केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी बनाई थी। टीम ने 19 और 20 मई को चिड़ियाघर और उसके बाहर के इलाके का निरीक्षण किया था।
इसमें डिपार्टमेंट ऑफ एनिमल हसबेंडरी, दिल्ली के ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. विजय कुमार तेवतिया, राष्ट्रीय उच्च पशु संस्थान, भोपाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार, आईवीआरआई, बरेली से वाइल्डलाइफ हेड डॉ. एम पावड़े, सीनियर साइंटिस्ट एंड पैथोलॉजिस्ट डॉ. एम करिकलन और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून के वैज्ञानिक डॉ. करन जैन शामिल थे।