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Gorakhpur News: गर्भवती की कोख में मर गया शिशु, डॉक्टर-एसीएमओ और दरोगा पर केस
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सिविल कोर्ट के आदेश पर मामले के छह साल बाद शाहपुर थाने में दर्ज की गई रिपोर्ट
शाहपुर निवासी अधिवक्ता दिनेश सिंह ने बहू की तरफ से दर्ज कराई एफआईआर
गोरखपुर। शाहपुर इलाके में गर्भवती की कोख में पल रहे शिशु की मौत के मामले में छह साल बाद केस दर्ज किया गया है। शाहपुर स्थित चाइल्ड एंड मदर केयर की डॉ. स्वीटी राय की देखरेख में उपचार के दौरान गर्भवती की कोख में पल रहे शिशु की मौत हो गई थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 2018 में एसीएमओ (एडिशनल मुख्य चिकित्सा अधिकारी) रहे डॉ. आईवी विश्वकर्मा, तत्कालीन शाहपुर थाने के दरोगा जाफर खान और डॉ. स्वीटी राय पर गैर इरादतन हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में रविवार को केस दर्ज किया गया है। शाहपुर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, शाहपुर के जेल बाईपास सरस्वतीपुरम लेन-4 निवासी दिनेश सिंह ने केस दर्ज कराया है। उन्होंने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनकी पुत्र वधू गर्भवती थी। पांच जुलाई 2018 को बेटा उसे लेकर डॉ. स्वीटी राय के पास गया। उनकी देखरेख में उपचार चल रहा था। हर बार जांच के बाद उन्होंने गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वस्थ बताया। 24 अगस्त 2018 को अल्ट्रासाउंड कराया और रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाई तब, सब ठीक बताया गया। उस समय गर्भस्थ शिशु की उम्र 34 सप्ताह की थी।
महिला के ससुर दिनेश सिंह ने बताया कि सात सितंबर 2018 को सर्दी जुकाम होने पर डॉक्टर के पास गए तो फिर उन्होंने दवा दी और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। 10 सितंबर को फिर अल्ट्रासाउंड कराकर रिपोर्ट दिखाने गए तो वहां पर डॉक्टर नहीं थीं। बाद में उन्होंने रिपोर्ट देखी और शिशु की मौत की जानकारी दी। बहू ने पूछा कि अचानक मौत कैसे हो सकती है, इस सवाल से नाराज होकर डॉ. स्वीटी राय ने बहू को डांटकर भगा दिया। इसके बाद बेटा फातिमा अस्पताल में बहू को ले गया और वहां ऑपरेशन कर मृत बच्चे को बाहर निकालकर गर्भवती की जान बचाई गई।
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एसीएमओ पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप
दिनेश सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत सीएमओ से की गई तो उन्होंने एडिशनल सीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा को जांच सौंपी। एसीएमओ ने स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को जांच की जिम्मेदारी। उन्होंने जांच में डॉ. स्वीटी को दोषी बताया और रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी। आरोप लगाया कि सीएमओ स्तर से रिपोर्ट दबा दी गई। आरटीआई से भी जवाब मांगा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बाद में सीएम को प्रार्थना पत्र देने पर रिपोर्ट मिली तो पता चला कि जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर डॉ. विश्वकर्मा ने बीच में ही आनन-फानन मेडिकल बोर्ड गठित कर मामले को रफा-दफा कर दिया।
थाने पर शिकायत करने पर दरोगा को मिली थी जांच
दिनेश सिंह ने बताया कि थाने पर शिकायत की गई तो दरोगा जाफर को जांच मिली। आरोप है कि उन्होंने भी डॉक्टर से मिलकर रिपोर्ट गलत लगा दी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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शाहपुर निवासी अधिवक्ता दिनेश सिंह ने बहू की तरफ से दर्ज कराई एफआईआर
गोरखपुर। शाहपुर इलाके में गर्भवती की कोख में पल रहे शिशु की मौत के मामले में छह साल बाद केस दर्ज किया गया है। शाहपुर स्थित चाइल्ड एंड मदर केयर की डॉ. स्वीटी राय की देखरेख में उपचार के दौरान गर्भवती की कोख में पल रहे शिशु की मौत हो गई थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 2018 में एसीएमओ (एडिशनल मुख्य चिकित्सा अधिकारी) रहे डॉ. आईवी विश्वकर्मा, तत्कालीन शाहपुर थाने के दरोगा जाफर खान और डॉ. स्वीटी राय पर गैर इरादतन हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में रविवार को केस दर्ज किया गया है। शाहपुर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, शाहपुर के जेल बाईपास सरस्वतीपुरम लेन-4 निवासी दिनेश सिंह ने केस दर्ज कराया है। उन्होंने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनकी पुत्र वधू गर्भवती थी। पांच जुलाई 2018 को बेटा उसे लेकर डॉ. स्वीटी राय के पास गया। उनकी देखरेख में उपचार चल रहा था। हर बार जांच के बाद उन्होंने गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वस्थ बताया। 24 अगस्त 2018 को अल्ट्रासाउंड कराया और रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाई तब, सब ठीक बताया गया। उस समय गर्भस्थ शिशु की उम्र 34 सप्ताह की थी।
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महिला के ससुर दिनेश सिंह ने बताया कि सात सितंबर 2018 को सर्दी जुकाम होने पर डॉक्टर के पास गए तो फिर उन्होंने दवा दी और अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। 10 सितंबर को फिर अल्ट्रासाउंड कराकर रिपोर्ट दिखाने गए तो वहां पर डॉक्टर नहीं थीं। बाद में उन्होंने रिपोर्ट देखी और शिशु की मौत की जानकारी दी। बहू ने पूछा कि अचानक मौत कैसे हो सकती है, इस सवाल से नाराज होकर डॉ. स्वीटी राय ने बहू को डांटकर भगा दिया। इसके बाद बेटा फातिमा अस्पताल में बहू को ले गया और वहां ऑपरेशन कर मृत बच्चे को बाहर निकालकर गर्भवती की जान बचाई गई।
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एसीएमओ पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप
दिनेश सिंह ने बताया कि मामले की शिकायत सीएमओ से की गई तो उन्होंने एडिशनल सीएमओ डॉ. आईवी विश्वकर्मा को जांच सौंपी। एसीएमओ ने स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी को जांच की जिम्मेदारी। उन्होंने जांच में डॉ. स्वीटी को दोषी बताया और रिपोर्ट सीएमओ को भेज दी। आरोप लगाया कि सीएमओ स्तर से रिपोर्ट दबा दी गई। आरटीआई से भी जवाब मांगा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। बाद में सीएम को प्रार्थना पत्र देने पर रिपोर्ट मिली तो पता चला कि जांच रिपोर्ट को दरकिनार कर डॉ. विश्वकर्मा ने बीच में ही आनन-फानन मेडिकल बोर्ड गठित कर मामले को रफा-दफा कर दिया।
थाने पर शिकायत करने पर दरोगा को मिली थी जांच
दिनेश सिंह ने बताया कि थाने पर शिकायत की गई तो दरोगा जाफर को जांच मिली। आरोप है कि उन्होंने भी डॉक्टर से मिलकर रिपोर्ट गलत लगा दी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। मामले की जांच की जा रही है। जांच और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।