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Gorakhpur News: मौसी के लड़के ने दोस्तों से फिरौती के लिए कराया था अपहरण, दो गिरफ्तार
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तरकुलहा से लकी सिंह का अपहरण कर देवरिया ले गया था, मांगी थी ढाई लाख रुपये की फिरौती
सीडीआर से खुला राज, बुधवार की रात में पुलिस ने किशोर को खोज निकाला
कुशीनगर से तरकुलहा मंदिर पूजा करने आया था परिवार, बालक के अपहरण से मच गया था हड़कंप
गोरखपुर। चौरीचौरा इलाके के तरकुलहा मंदिर मेले से लापता लकी सिंह (11) का अपहरण उसकी मौसी के लड़के ने दो दोस्तों की मदद से कराया था। इसके बाद पीड़ित परिवार से ढाई लाख की फिरौती मांगी गई थी। बुधवार देर रात पुलिस ने लकी को खोज निकाला और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर अपहरण की इस घटना का पर्दाफाश कर दिया।
चौरीचौरा पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की पहचान देवरिया जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मोहरा निवासी नेहा साहनी और बरियारपुर थाना क्षेत्र के विशुनपुरकलां गांव के पीयूष सिंह के रूप में हुई। वहीं एक अन्य आरोपी मदनपुर थाना क्षेत्र के समोगर निवासी अभिषेक सिंह घटना में वांछित है, जिसकी तलाश की जा रही है। दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस ने जेल भिजवा दिया।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस लाइंस में एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव और सीओ चौरीचौरा अनुराग सिंह ने घटना का पर्दाफाश करते हुए बताया कि कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 20 गोपालपुर निवासी जगदीश सिंह दुबई की एक कंपनी में सेफ्टी मैनेजर का काम करते हैं। उनके दो बेटे बड़ा आयुष सिंह और छोटा बेटा लकी सिंह है।
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बताया जा रहा है कि लकी को ब्रेन ट्यूमर की बीमारी है। उसका दो साल से इलाज चल रजा है। उसके स्वास्थ्य में सुधार होने पर पहले से मांगी गई मन्नत के मुताबिक, बुधवार को जगदीश पत्नी सरिता और रिश्तेदारों, पटीदारों के साथ तरकुलहा मंदिर पर बकरे की बलि चढ़ाने आए थे। कई गाड़ियों से करीब 150 की संख्या में लोग पहुंचे थे। अपराह्न करीब तीन बजे पूजा-पाठ के बाद जगदीश मेहमानों को खाना खिला रहे थे। इसी दौरान ही लकी लापता हुआ और फिर जगदीश के मोबाइल पर ढाई लाख की फिरौती मांगी गई।
सर्विलांस से खुला राज
एसपी ने बताया कि काफी देर तक परिजन खुद ही लकी को खोजते रहे, शाम करीब छह बजे पुलिस को सूचना दी। करीब साढ़े चार घंटे बाद रात 10:30 बजे दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लकी को खोज निकाला गया। इसके लिए पहले जिस नंबर से कॉल कर फिरौती मांगी गई थी, उसे सर्विलांस पर लगाया गया। फिर सीडीआर निकलवाई गई। इसमें तीन और संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए। जगदीश और उनके बेटे आयुष को ये नंबर दिखाए गए। आयुष ने बताया कि इसमें एक नंबर बड़ी मौसी सावित्री के बेटे पीयूष का है। इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो परत दर परत खुलती चली गई और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
साइड-पेज-2
ट्रैक शूज और ट्रेनिंग खर्च के लिए रची साजिश, बहलाकर ले गए लकी को
पकड़े जाने के बाद पीयूष ने बताया कि अच्छा एथलीट बनने के लिए ट्रैक शूज (एथलेटिक्स स्पाइक्स) खरीदने और अन्य संसाधनों के लिए रुपये उधार लिए थे। साथ में अभ्यास करने वाली नेहा को भी खेल के कोचिंग सेंटर में प्रवेश के लिए रुपयों की आवश्यकता थी। पैसे जुटाने के लिए दोनों ने मिलकर मौसी के लड़के के अपहरण की साजिश रची। पहले 20 मई को ही घटना को अंजाम देना था, लेकिन उस दिन नहीं हो सका। योजना के मुताबिक, बुधवार को नेहा और अभिषेक एक बाइक से आए। तब लकी मेले में झूले के पास खड़ा था। नेहा को इशारा करके लकी को दिखाया था। इसके बाद नेहा और अभिषेक पहले लकी को बहला फुसलाकर एक दुकान पर ले गए, वहां पर समोसा खिलाया। फिर खिलौने वाली कार खरीदी। इसके बाद नेहा और अभिषेक लकी को लेकर चले गए। नेहा ने ही कॉल कर फिरौती मांगी। मौसा ने इंतजाम कर एक लाख रुपये दिए थे। इसे देकर लकी को छुड़ाने जा रहा था। इससे पहले ही हमलोगों की पोल खुल गई। रुपये उनके पास आने के बाद नेहा और अभिषेक लकी को तरकुलहा में सुनसान जगह पर छोड़ने आ रहे थे, तभी रंगेहाथ पकड़ लिए गए।
जिसे पाला उसी के अपहरण में पकड़े बेटे को देख फफक पड़ीं मौसी
लकी के मिलने पर उसकी मां सरिता चौरीचौरा थाने पहुंचीं। वहां बच्चे को गले लगाकर रोने लगीं। वहीं उनके साथ बड़ी बहन सावित्री भी पहुंची थीं। वह अपने बेटे आरोपी पीयूष को देखकर फफक पड़ीं। बेटे की करतूत से वह शर्मिंदा थीं। यह सब देखकर पुलिसकर्मियों से सरिता और पति जगदीश ने पीयूष को छोड़ने के लिए भी कहा था। जगदीश ने कहा कि बड़ी साली सावित्री के घर रहकर उनके दोनों बच्चे पढ़ाई करते थे। इधर, लकी की तबीयत खराब होने पर उसे घर लेकर आए थे। वह दोनों बच्चों को अपने बेटों की तरह मानती हैं।
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सीडीआर से खुला राज, बुधवार की रात में पुलिस ने किशोर को खोज निकाला
कुशीनगर से तरकुलहा मंदिर पूजा करने आया था परिवार, बालक के अपहरण से मच गया था हड़कंप
गोरखपुर। चौरीचौरा इलाके के तरकुलहा मंदिर मेले से लापता लकी सिंह (11) का अपहरण उसकी मौसी के लड़के ने दो दोस्तों की मदद से कराया था। इसके बाद पीड़ित परिवार से ढाई लाख की फिरौती मांगी गई थी। बुधवार देर रात पुलिस ने लकी को खोज निकाला और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर अपहरण की इस घटना का पर्दाफाश कर दिया।
चौरीचौरा पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की पहचान देवरिया जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मोहरा निवासी नेहा साहनी और बरियारपुर थाना क्षेत्र के विशुनपुरकलां गांव के पीयूष सिंह के रूप में हुई। वहीं एक अन्य आरोपी मदनपुर थाना क्षेत्र के समोगर निवासी अभिषेक सिंह घटना में वांछित है, जिसकी तलाश की जा रही है। दोनों आरोपियों से पूछताछ कर पुलिस ने जेल भिजवा दिया।
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जानकारी के मुताबिक, पुलिस लाइंस में एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव और सीओ चौरीचौरा अनुराग सिंह ने घटना का पर्दाफाश करते हुए बताया कि कुशीनगर जिले के हाटा कोतवाली थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 20 गोपालपुर निवासी जगदीश सिंह दुबई की एक कंपनी में सेफ्टी मैनेजर का काम करते हैं। उनके दो बेटे बड़ा आयुष सिंह और छोटा बेटा लकी सिंह है।
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बताया जा रहा है कि लकी को ब्रेन ट्यूमर की बीमारी है। उसका दो साल से इलाज चल रजा है। उसके स्वास्थ्य में सुधार होने पर पहले से मांगी गई मन्नत के मुताबिक, बुधवार को जगदीश पत्नी सरिता और रिश्तेदारों, पटीदारों के साथ तरकुलहा मंदिर पर बकरे की बलि चढ़ाने आए थे। कई गाड़ियों से करीब 150 की संख्या में लोग पहुंचे थे। अपराह्न करीब तीन बजे पूजा-पाठ के बाद जगदीश मेहमानों को खाना खिला रहे थे। इसी दौरान ही लकी लापता हुआ और फिर जगदीश के मोबाइल पर ढाई लाख की फिरौती मांगी गई।
सर्विलांस से खुला राज
एसपी ने बताया कि काफी देर तक परिजन खुद ही लकी को खोजते रहे, शाम करीब छह बजे पुलिस को सूचना दी। करीब साढ़े चार घंटे बाद रात 10:30 बजे दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लकी को खोज निकाला गया। इसके लिए पहले जिस नंबर से कॉल कर फिरौती मांगी गई थी, उसे सर्विलांस पर लगाया गया। फिर सीडीआर निकलवाई गई। इसमें तीन और संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए। जगदीश और उनके बेटे आयुष को ये नंबर दिखाए गए। आयुष ने बताया कि इसमें एक नंबर बड़ी मौसी सावित्री के बेटे पीयूष का है। इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो परत दर परत खुलती चली गई और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
साइड-पेज-2
ट्रैक शूज और ट्रेनिंग खर्च के लिए रची साजिश, बहलाकर ले गए लकी को
पकड़े जाने के बाद पीयूष ने बताया कि अच्छा एथलीट बनने के लिए ट्रैक शूज (एथलेटिक्स स्पाइक्स) खरीदने और अन्य संसाधनों के लिए रुपये उधार लिए थे। साथ में अभ्यास करने वाली नेहा को भी खेल के कोचिंग सेंटर में प्रवेश के लिए रुपयों की आवश्यकता थी। पैसे जुटाने के लिए दोनों ने मिलकर मौसी के लड़के के अपहरण की साजिश रची। पहले 20 मई को ही घटना को अंजाम देना था, लेकिन उस दिन नहीं हो सका। योजना के मुताबिक, बुधवार को नेहा और अभिषेक एक बाइक से आए। तब लकी मेले में झूले के पास खड़ा था। नेहा को इशारा करके लकी को दिखाया था। इसके बाद नेहा और अभिषेक पहले लकी को बहला फुसलाकर एक दुकान पर ले गए, वहां पर समोसा खिलाया। फिर खिलौने वाली कार खरीदी। इसके बाद नेहा और अभिषेक लकी को लेकर चले गए। नेहा ने ही कॉल कर फिरौती मांगी। मौसा ने इंतजाम कर एक लाख रुपये दिए थे। इसे देकर लकी को छुड़ाने जा रहा था। इससे पहले ही हमलोगों की पोल खुल गई। रुपये उनके पास आने के बाद नेहा और अभिषेक लकी को तरकुलहा में सुनसान जगह पर छोड़ने आ रहे थे, तभी रंगेहाथ पकड़ लिए गए।
जिसे पाला उसी के अपहरण में पकड़े बेटे को देख फफक पड़ीं मौसी
लकी के मिलने पर उसकी मां सरिता चौरीचौरा थाने पहुंचीं। वहां बच्चे को गले लगाकर रोने लगीं। वहीं उनके साथ बड़ी बहन सावित्री भी पहुंची थीं। वह अपने बेटे आरोपी पीयूष को देखकर फफक पड़ीं। बेटे की करतूत से वह शर्मिंदा थीं। यह सब देखकर पुलिसकर्मियों से सरिता और पति जगदीश ने पीयूष को छोड़ने के लिए भी कहा था। जगदीश ने कहा कि बड़ी साली सावित्री के घर रहकर उनके दोनों बच्चे पढ़ाई करते थे। इधर, लकी की तबीयत खराब होने पर उसे घर लेकर आए थे। वह दोनों बच्चों को अपने बेटों की तरह मानती हैं।