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Gorakhpur News: शहर में शुरू होगा एबीसी-एआरवी अभियान, कुत्तों की जनसंख्या होगी नियंत्रित
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नगर निगम ने जारी किया आरएफपी, नई शर्ताें के साथ होगा टेंडर
गोरखपुर। नगर निगम ने शहर में निराश्रित कुत्तों की संख्या नियंत्रित और रैबीज से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल-एंटी रैबीज वैक्सीनेशन (एबीसी-एआरवी) अभियान चलाएगा। इसके लिए निगम ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया है। इच्छुक एवं अनुभवी एनजीओ या ट्रस्ट दो सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद तीन सितंबर को तकनीकी निविदा खोली जाएगी।
वर्तमान में यह कार्य चैरिटेबल वेलफेयर सोसाइटी फॉर ह्यूमन काइंड एंड एनिमल वेलफेयर द्वारा संचालित किया जा रहा है। संस्था ने 19 मार्च से अब तक 2579 कुत्तों की सर्जरी की है। हालांकि, नगर निगम अब नई शर्तों के साथ दोबारा टेंडर कर रहा है। चयनित नई एजेंसी को नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्स्थापन की पूरी प्रक्रिया संभालनी होगी।
मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल निराश्रित कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानव-कुत्ता संघर्ष को कम करना भी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कदम आवश्यक है।
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नगर निगम का मानना है कि नियमित नसबंदी और टीकाकरण से न सिर्फ कुत्तों की अनियंत्रित संख्या पर रोक लगेगी, बल्कि रैबीज जैसी घातक बीमारी से भी सुरक्षा मिलेगी। अभियान में पकड़े गए कुत्तों को निर्धारित प्रक्रियाओं के बाद दोबारा उनके क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
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गोरखपुर। नगर निगम ने शहर में निराश्रित कुत्तों की संख्या नियंत्रित और रैबीज से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एनिमल बर्थ कंट्रोल-एंटी रैबीज वैक्सीनेशन (एबीसी-एआरवी) अभियान चलाएगा। इसके लिए निगम ने रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी कर दिया है। इच्छुक एवं अनुभवी एनजीओ या ट्रस्ट दो सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद तीन सितंबर को तकनीकी निविदा खोली जाएगी।
वर्तमान में यह कार्य चैरिटेबल वेलफेयर सोसाइटी फॉर ह्यूमन काइंड एंड एनिमल वेलफेयर द्वारा संचालित किया जा रहा है। संस्था ने 19 मार्च से अब तक 2579 कुत्तों की सर्जरी की है। हालांकि, नगर निगम अब नई शर्तों के साथ दोबारा टेंडर कर रहा है। चयनित नई एजेंसी को नसबंदी, टीकाकरण और पुनर्स्थापन की पूरी प्रक्रिया संभालनी होगी।
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मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. रोबिन चंद्रा ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल निराश्रित कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मानव-कुत्ता संघर्ष को कम करना भी है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह कदम आवश्यक है।
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नगर निगम का मानना है कि नियमित नसबंदी और टीकाकरण से न सिर्फ कुत्तों की अनियंत्रित संख्या पर रोक लगेगी, बल्कि रैबीज जैसी घातक बीमारी से भी सुरक्षा मिलेगी। अभियान में पकड़े गए कुत्तों को निर्धारित प्रक्रियाओं के बाद दोबारा उनके क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।