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गोरखपुर महायोजना: हरित, खुला क्षेत्र के दो लाख लोगों का क्या होगा?

Fri, 26 Aug 2022 12:50 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 26 Aug 2022 12:50 PM IST
सार

नई महायोजना से इस बड़े क्षेत्रफल पर निर्माण करा चुके लोगों को भी बहुत उम्मीद थी। जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह का कहना है कि महायोजना के प्रारूप पर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों को लेकर शासन से भी मार्गदर्शन मांगा जाएगा।  
 

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Gorakhpur Maha Yojana What will happen to two lakh people of green open area
गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : Social Media

विस्तार

गोरखपुर शहर के सुनियोजित विकास को लेकर तैयार की गई महायोजना-2031 के प्रारूप में जहां बड़ी आबादी को राहत देने की कोशिश की गई है, वहीं तमाम लोगों के हाथ निराशा भी लगी है। हरित क्षेत्र (ग्रीन लैंड), खुला क्षेत्र (ओपन एरिया) और डंपिंग ग्राउंड की जमीनों पर विकसित 40 से अधिक कॉलोनियों की करीब दो लाख की आबादी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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अपने निर्माण को अवैध से वैध करने को लेकर इस क्षेत्र की आबादी को नई महायोजना से बहुत उम्मीद थी लेकिन उन्हें राहत मिलती नहीं दिख रही है। इन कॉलोनियों के लोग महायोजना को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
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उधर, शहर के 1700 एकड़ जमीन के विनियमितीकरण के मामले में भी आपत्ति दर्ज होने के बाद ही कोई निर्णय होने की उम्मीद है। इस जमीन को नियमित करने के लिए पिछले तीन दशक से प्रयास चल रहा है। कई बार शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है मगर कोई निर्णय नहीं हो सका।
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नई महायोजना से इस बड़े क्षेत्रफल पर निर्माण करा चुके लोगों को भी बहुत उम्मीद थी। जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह का कहना है कि महायोजना के प्रारूप पर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों को लेकर शासन से भी मार्गदर्शन मांगा जाएगा।  

 

कई कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव पर नहीं हो पाया कोई निर्णय
महायोजना में शामिल प्रस्ताव के मुताबिक भू-उपयोग परिवर्तित कर करीब 100 कॉलोनियों को नियमित किया गया है। हालांकि ग्रीन लैंड में बसी रामजानकीनगर, इंदिरा नगर, देवरिया बाईपास रोड समेत विभिन्न इलाकों के कई कॉलोनियों को नियमित करने के प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। जंगल धूषण के आगे एक कालोनी डंपिंग ग्राउंड पर विकसित कर दी गई है।

जीडीए ने कॉलोनी में बने मकानों के ध्वस्तीकरण का आदेश भी दे रखा है। इसी तरह गोरखनाथ से बरगदवां रोड के बीच पूर्व पार्षद और अन्य प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा विकसित आधा दर्जन कॉलोनियां हरित क्षेत्र में विकसित कर दी गई हैं। सिक्टौर के आसपास भी कई कॉलोनियां हरित क्षेत्र में विकसित कर दी गई हैं। नई महायोजना के प्रस्ताव के मुताबिक, ग्रीन लैंड एवं खुला क्षेत्र के भू उपयोग को उसी रूप में रखा गया है। ग्रीन लैंड पर बसी कॉलोनियों के लोग भी आपत्ति दाखिल कर कॉलोनी को नियमित कराने की अपील कर सकते हैं। उनकी आपत्तियों के बाद नियमित होने की संभावना बनी रहेगी।

पहले थी तैयारी, बाद में खींचना पड़ा हाथ
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक महायोजना में पहले हरित क्षेत्र में बसी कॉलोनियों का भू उपयोग बदलकर वहां के निर्माण को भी वैध करने की तैयारी थी । मगर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद कदम पीछे खींचना पड़ा। एक मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि ग्रीन लैंड का भू-उपयोग नहीं बदला जा सकता है।

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