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गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे: 113 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण, परियोजनाओं को लगेंगे पंख
Fri, 28 Feb 2020 12:43 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 28 Feb 2020 12:43 PM IST
सार
- लिंक एक्सप्रेस वे: 113 एकड़ जमीन का होगा अधिग्रहण
- 530 हेक्टेअर में से 462 हेक्टेअर जमीन यूपीडा के नाम हो चुकी है
- समझौते से बैनामा कराने के बाद बची जमीन होगी अधिगृहीत
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए समझौते के आधार पर यूपीडा के नाम जमीन कराने के बाद बचने वाली 46 हेक्टअर यानी करीब 113 एकड़ जमीन का भूमि अध्याप्ति (एसएलओ) विभाग अधिग्रहण कर यूपीडा को देगा। यह वह जमीन है जिसका कोर्ट में दाखिल वाद समेत किसी न किसी पेंच की वजह से प्रशासन समझौते के आधार पर बैनामा नहीं करा पा रहा है।
विभाग के मुताबिक सामाजिक समाघात अध्ययन समिति की रिपोर्ट के लिए टेंडर निकाला गया है। इसकी आखिरी तारीख 28 फरवरी है। यह समिति इस भूमि से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी जिसे बहुसाखीय अध्ययन समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद भू-अधिग्रहण अधिनियम की धारा 11 के तहत संबंधित भूमि का अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन होगा।
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विभाग के मुताबिक सामाजिक समाघात अध्ययन समिति की रिपोर्ट के लिए टेंडर निकाला गया है। इसकी आखिरी तारीख 28 फरवरी है। यह समिति इस भूमि से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी जिसे बहुसाखीय अध्ययन समिति को भेजा जाएगा। इसके बाद भू-अधिग्रहण अधिनियम की धारा 11 के तहत संबंधित भूमि का अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन होगा।
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एसएलओ दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए खजनी, सहजनवां और सदर तहसील क्षेत्र की कुल 530 हेक्टेअर जमीन समझौते के आधार पर यूपीडा के नाम बैनामा करने का लक्ष्य था। अब तक 462 हेक्टेअर जमीन बैनामा कराई जा चुकी है। इसके लिए 9452 काश्तकारों को अब तक 890 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
60 करोड़ रुपये रजिस्ट्री शुल्क के तौर पर खर्च हुए हैं। अधिग्रहण के लिए चिह्नित 46 हेक्टेअर जमीन को छोड़ बाकी बची जमीन का बैनामा कराने के लिए करीब 250 करोड़ रुपये की शासन से डिमांड किया गया था। इसमें 60 करोड़ रुपये मिले हैं जबकि बाकी धनराशि भी जल्द मुहैया कराने के लिए बुधवार को डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने शासन से अनुरोध किया है।
तहसील जमीन का लक्ष्य (हे. में) बैनामा हो चुकी जमीन(हे. में)
खजनी 445 389
सहजनवां 70 62.5
सदर 15.5 11.12
60 करोड़ रुपये रजिस्ट्री शुल्क के तौर पर खर्च हुए हैं। अधिग्रहण के लिए चिह्नित 46 हेक्टेअर जमीन को छोड़ बाकी बची जमीन का बैनामा कराने के लिए करीब 250 करोड़ रुपये की शासन से डिमांड किया गया था। इसमें 60 करोड़ रुपये मिले हैं जबकि बाकी धनराशि भी जल्द मुहैया कराने के लिए बुधवार को डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने शासन से अनुरोध किया है।
तहसील जमीन का लक्ष्य (हे. में) बैनामा हो चुकी जमीन(हे. में)
खजनी 445 389
सहजनवां 70 62.5
सदर 15.5 11.12