गोरखपुर बीआरडी: खून माफिया गिरोह में एक और संविदा कर्मी...होगी पूछताछ
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि छह आरोपियों को जेल भिजवाया जा चुका है। कॉल डिटेल और सीडीआर की मदद से पुलिस छानबीन कर रही है। गिराेह में शामिल कुछ लोगों के नाम सामने आए हैं। उनके खिलाफ साक्ष्य संकलन किया जा रहा है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में खून माफिया का नेटवर्क ब्लड बैंक से ही संचालित होने की पुष्टि के साथ ही एक और संविदा कर्मचारी का नाम पुलिस की जांच में सामने आ गया है। पुलिस को उसके खिलाफ सुराग मिले हैं और अब पूछताछ के लिए नोटिस भी दिया गया है।
पता चला है कि कर्मचारी की मदद से ही डोनर बनकर आने वाले मजदूर का नाम-पता नोट नहीं किया जा जाता था और फिर खून को बेच दिया जाता था। उधर, पूर्व में एक सरकारी कर्मचारी का नाम सामने आने के बाद से वह फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम दबिश दे रही है।
जानकारी के मुताबिक, 28 अगस्त को नगर निगम के पूर्व सफाई कर्मी वसील और उसके साथी केशरदेव को पुलिस ने गिरफ्तार कर मेडिकल कॉलेज में खून माफिया के नेटवर्क को खोला था। पुलिस की जांच में सामने आया कि मजदूर की मजबूरी का फायदा उठाकर उसके खून को आठ हजार रुपये में बेच दिया गया था।
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महराजगंज जिले के पनियरा थाना क्षेत्र के कमता बुजुर्ग निवासी गोरख चौहान (30) की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर चार और आरोपियों को पकड़ा था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर दिया गया था। इसके बाद आखिरी बार पकड़े गए युवक ने बताया कि प्राइवेट ब्लड बैंक से भी उनकी सेटिंग थी।
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पुलिस को फुटेज तो नहीं मिला, लेकिन सीडीआर की मदद से जांच को तेज कर दिया गया। सीडीआर में वर्तमान में ब्लड बैंक में एक कर्मचारी की भूमिका सामने आई, जिसके बाद पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए लग गई है। उसका नाम भी बढ़ा लिया गया है। अब एक और संविदा कर्मचारी का नाम आने के बाद पुलिस पिछले कई दिनों से गतिविधियों की निगरानी कर रही है।