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Gorakhpur News: एक ही दिन हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थीा
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गोरखपुर। इस बार हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी का व्रत एक ही दिन 14 सितंबर को मनाया जाएगा। हृषीकेश पंचांग के अनुसार, सोमवार को सूर्योदय सुबह 5:53 बजे होगा और भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि सुबह 7:14 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। तृतीया और चतुर्थी तिथि के इस संयोग के कारण 14 सितंबर को ही हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों के व्रत एवं पूजन का प्रशस्त दिवस माना गया है।
गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल के अनुसार, हरितालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से निर्जल व्रत रखेंगी और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करेंगी। पंचांग के अनुसार सूर्योदय के बाद मुहूर्त मात्र भी तृतीया तिथि रहने पर उसी दिन हरितालिका व्रत करने का विधान है। इस व्रत में उमा-माहेश्वर की पूजा की जाती है। शास्त्रों में यह व्रत सधवा और विधवा दोनों के लिए बताया गया है। महिलाएं स्वयं व्रत न कर सकें तो प्रतिनिधि के माध्यम से भी इसे करने का विधान है।
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इसी दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी होने से भगवान गणेश की आराधना भी की जाएगी। गणेश पूजन में गजानन और लंबोदर स्वरूप का ध्यान कर विधि-विधान से पूजा की जाएगी। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार, मिट्टी, धातु आदि की प्रतिमा स्थापित कर गणपति की पूजा करेंगे। पूजा में सिंदूर, दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व रहेगा। 21 दूर्वा अर्पित करने का भी विधान बताया गया है। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन होगा।न
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गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल के अनुसार, हरितालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना से निर्जल व्रत रखेंगी और भगवान शिव-पार्वती की पूजा करेंगी। पंचांग के अनुसार सूर्योदय के बाद मुहूर्त मात्र भी तृतीया तिथि रहने पर उसी दिन हरितालिका व्रत करने का विधान है। इस व्रत में उमा-माहेश्वर की पूजा की जाती है। शास्त्रों में यह व्रत सधवा और विधवा दोनों के लिए बताया गया है। महिलाएं स्वयं व्रत न कर सकें तो प्रतिनिधि के माध्यम से भी इसे करने का विधान है।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इसी दिन भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी होने से भगवान गणेश की आराधना भी की जाएगी। गणेश पूजन में गजानन और लंबोदर स्वरूप का ध्यान कर विधि-विधान से पूजा की जाएगी। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार, मिट्टी, धातु आदि की प्रतिमा स्थापित कर गणपति की पूजा करेंगे। पूजा में सिंदूर, दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व रहेगा। 21 दूर्वा अर्पित करने का भी विधान बताया गया है। 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन होगा।न
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