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दो साल चक्कर काटने के बाद लोहिया एन्क्लेव के आवंटियों को मिलेगा कब्जा, जानिए कब शुरू होगी रजिस्ट्री की प्रक्रिया

Sat, 09 Jan 2021 10:15 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 09 Jan 2021 10:15 AM IST
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GDA housing scheme Lohia Enclave will get allottees occupation in gorakhpur
बैठक में मौजूद अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की आवासीय योजना लोहिया एन्क्लेव के 400 से अधिक आवंटियों को दो साल तक चक्कर काटने के बाद सफलता मिल गई है। इस साल के जीडीए बोर्ड की पहली बैठक में तय हुआ है कि आवंटियों को फ्लैट की सशर्त रजिस्ट्री करा दी जाए।
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हालांकि, रजिस्ट्री की अंतिम स्थित (पूरी वैधता) रामगढ़ताल वेटलैंड के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) का फैसला आने के बाद ही तय होगी। वहीं, प्राधिकरण के अफसरों को विश्वास है कि फैसला उनके पक्ष में आएगा और रजिस्ट्री पूरी तरह वैध साबित होगी। उनका कहना है कि मामला ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है, इसलिए प्राधिकरण बोर्ड ने कंडीशनल रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है।  
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सोमवार यानी 11 जनवरी से रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। साथ ही लोहिया एन्क्लेव के रंग रोगन और बाकी बचे निर्माण कार्य भी 10 से 15 दिन में पूरा कराकर आवंटियों को कब्जा देने की कार्रवाई पूरी की जाएगी। लोहिया एन्क्लेव के 492 फ्लैट में से 435 का आवंटन हो चुका है। 2015 में आवंटन शुरू हुआ था और 2017 में परियोजना पूरी की जानी थी। पहले तो निर्माण कार्य में देरी हुई फिर जब कब्जा देने की बारी आई तो नया पेच फंस गया।
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12 को होगी एनजीटी में सुनवाई

एनजीटी की तरफ से गठित हाई पावर कमेटी ने 2019 के अंतिम में रामगढ़ताल के पांच सौ मीटर के दायरे को वेट लैंड बताते हुए वहां नए निर्माण पर रोक और जो निर्माण हो चुके हैं, उन सभी को ध्वस्त कराने की एनजीटी से संस्तुति कर दी। लोहिया एन्क्लेव भी इसी दायरे में आने की वजह से आवंटियों को कब्जा नहीं मिल पा रहा था। पिछले महीने ही शासन ने रामगढ़ताल वेटलैंड का नोटिफिकेशन कर दिया, जिसमें 28 में से 22 जगहों पर सिर्फ ताल से 50 मीटर का दायरा ही वेट लैंड घोषित किया गया है।

लोहिया एन्क्लेव का कोई भी हिस्सा वेटलैंड में शामिल नहीं है। इसी को आधार मानकर बोर्ड ने शुक्रवार को सशर्त (कंडीशनल) रजिस्ट्री का फैसला किया। बैठक में कमिश्नर व जीडीए अध्यक्ष जयंत नार्लिकर, डीएम के. विजयेंद्र पांडियन, जीडीए उपाध्यक्ष अनुज सिंह, सचिव राम सिंह गौतम, नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह समेत कई अफसर मौजूद रहे।

हाई पावर कमेटी की संस्तुति के मामले में 12 जनवरी को एनजीटी में सुनवाई होनी है। उधर, जीडीए ने बृहस्पतिवार को ही ऑनलाइन प्रार्थनापत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखने की अपील की है, जिसमें प्राधिकरण शासन द्वारा रामगढ़ताल के नोटिफिकेशन की जानकारी ट्रिब्यूनल को देगा। प्राधिकरण का मानना है कि सारा विवाद वेट लैंड के एरिया के लिए है।

जब हाई पावर कमेटी ने रामगढ़ताल के पांच सौ मीटर दायरे को वेट लैंड बताकर कार्रवाई की संस्तुति की थी, तब रामगढ़ताल के वेट लैंड एरिया का निर्धारण नहीं हुआ था। अब नोटिफिकेशन हो गया है, जिसमें लोहिया एन्क्लेव समेत जीडीए की कोई भी परियोजना वेट लैंड के दायरे में नहीं आ रही है। ऐसे में प्राधिकरण को अपने पक्ष में ही फैसला होने की पूरी उम्मीद है।

जीडीए के दायरे में आए नए 233 गांवों की भी तैयार होगी महायोजना

हाल ही में जीडीए के सीमा विस्तार के दौरान प्राधिकरण क्षेत्र में शामिल हुए 233 गांवों की भी महायोजना तैयार करने का जीडीए बोर्ड बैठक में निर्णय हुआ है। बता दें कि जीडीए की नई महायोजना 2031 तैयार हो रही है। इसी बीच प्राधिकरण की सीमा का विस्तार हो जाने से अब इन गांवों को भी महायोजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया।

जीडीए की सीमा में अब कुल 319 राजस्व गांव हो गए हैं। नगर निगम के अलावा अब प्राधिकरण क्षेत्र में तीन नई नगर पंचायतें पीपीगंज, पिपराइच और मुंडेरा बाजार शामिल हो गई हैं। प्राधिकरण का दायरा कैंपियरगंज तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों तक हो गया है। शहर के चारों तरफ रिंग रोड के किनारे के गांवों को प्राधिकरण की सीमा में शामिल किया गया है।

एकीकृत मंडलीय कार्यालय : चीफ इंजीनियर नामित करेंगे टेक्निकल कंसलटेंट

बैठक के दौरान यह भी तय हुआ कि एकीकृत मंडलीय कार्यालय की डिजाइन आदि तैयार करने के लिए टेक्निकल कंसलटेंट जीडीए के चीफ इंजीनियर नामित करेंगे। लोक निर्माण विभाग और आवास विकास परिषद के नियमों के तहत ही कंसलटेंट का चयन होगा और उसी हिसाब से उन्हें फीस आदि दी जाएगी।

तहसीलदार और कानूनगो तैनात करेगा जीडीए
बोर्ड बैठक के दौरान तय हुआ कि सीमा विस्तार के साथ ही अब काम भी बढ़ेगा लिहाजा मानदेय पर एक सेवानिवृत्त तहसीलदार और एक कानूनगो भी तैनात किए जाएं, ताकि राजस्व संबंधी कार्यों में सहायता मिल सके।
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