खास पहल: 19 विरासत वृक्षों को संरक्षित करेगा वन प्रभाग, 400 से 100 वर्ष तक के पेड़ शामिल
डीएफओ विकास यादव ने बताया कि इस पेड़ के पर्यावरण संरक्षण के अलावा वट सावित्री व्रत में बड़ी संख्याओं में महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है। स्थानीय निवासी खुद इस वृक्ष की सुरक्षा करते थे। विरासत वृक्ष के बाद अब वन प्रभाग इनकी सुरक्षा करेगा।
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वन प्रभाग गोरखपुर जिले के 19 विरासत वृक्षों को संरक्षित करेगा। इस सूची में आठ पीपल, सात बरगद और चार पाकड़ के वृक्ष हैं। इन वृक्षों को विरासत घोषित किए जाने से इनका पर्यटकीय महत्व भी बढ़ेगा। इन वृक्षों के पास वन विभाग सेल्फी प्वाइंट विकसित करेगा। एक बोर्ड पर इन पेड़ों का इतिहास भी लिखा होगा। ताकि सैलानी इनके महत्व से वाकिफ हो सकें। पिछले वर्ष इन वृक्षों को विरासत की श्रेणी में शामिल किया गया था।
वन प्रभाग ने जिले में 400 से लेकर 100 वर्ष तक के वृक्षों को इसमें शामिल किया है। पिपरौली के भौवापार गांव में बरगद का पेड़, गगहा के राजगढ़ में पाकड़ का पेड़, कैंपियरगंज के सूरस गांव में बरगद का पेड़, परतावल में बभनौली गांव में बरगद का पेड़, सहजनवा के पिपरा गांव में बरगद, उरुवा के रामडीह में पीपल का पेड़ सहित गोरखनाथ मंदिर के चार वृक्षों को विरासत वृक्ष घोषित किया गया है।
गोरखनाथ मंदिर में लगे चारों वृक्ष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ के समय में लगाए गए थे। ये चारों वृक्ष 100 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं। अभी मंदिर प्रशासन इनकी देखरेख करता है। वन विभाग ने इन वृक्षों का ऐतिहासिक महत्व जानने के लिए लोगों से संपर्क किया था। यहां मौजूद बरगद के पेड़ों की पूजा होती है, वहीं, पाकड़ का वृक्ष गोशाला में मौजूद गायों को छाया प्रदान करता है।
देवरिया जिले के गैर वन क्षेत्र में सामुदायिक भूमि पर करीब सौ साल से अधिक के वृक्षों को विरासत वृक्ष घोषित किया है। इसमें मईल स्थित देवरहा बाबा आश्रम परिसर में स्थित पारिजात वृक्ष भी शामिल है। वन विभाग ने बीते जून में देवरिया जिले के देवरिया वन परिक्षेत्र, रुद्रपुर, गौरीबाजार में एक-एक बरगद, बरहज में एक पीपल तथा मईल रेंज में देवरहा बाबा आश्रम परिसर में स्थित पारिजात वृक्ष को विरासत वृक्ष घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजा था।
उसके बाद सरकार ने उस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इन वृक्षों के संरक्षण और संवर्धन के लिए वन विभाग की ओर से प्रयास किया जाएगा। डीएफओ विकास कुमार यादव ने बताया कि पिछले वर्ष इन वृक्षों को विरासत वृक्ष में शामिल किया गया था। अब इनका संरक्षण और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी वन प्रभाग की होगी।
400 वर्ष पुराना है बरगद का वृक्ष
परतालव रेंज में बरगद का पेड़ है। डीएफओ विकास यादव ने बताया कि इस पेड़ के पर्यावरण संरक्षण के अलावा वट सावित्री व्रत में बड़ी संख्याओं में महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है। स्थानीय निवासी खुद इस वृक्ष की सुरक्षा करते थे। विरासत वृक्ष के बाद अब वन प्रभाग इनकी सुरक्षा करेगा।