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फर्जी स्टांप मामला: हर एक वेंडर यही बोल रहा- मुझे नहीं मालूम स्टांप असली हैं या नकली

Mon, 12 Feb 2024 12:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 12 Feb 2024 12:21 PM IST
सार

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि एएसपी अंशिका वर्मा की देखरेख में एसआईटी पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस जांच व साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। जो भी लोग इस गिरोह में शामिल हैं, पुलिस साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर कार्रवाई करेगी।

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Fake stamp case: Every vendor saying that I don't know whether the stamp is real or fake.
फर्जी स्टांप बेचने का आरोपी रविदत्त। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

फर्जी स्टांप प्रकरण में एसआईटी अब तक 27 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें से ज्यादातर वेंडरों ने पुलिस को एक ही जवाब दिया है कि वह नहीं जानते हैं कि स्टांप असली था या नकली। वहीं, एएसपी मानुष के तबादले के बाद इसकी जांच ठप भी पड़ गई थी। अब नई एएसपी अंशिका वर्मा को एसआईटी का नया प्रभारी बनाया गया है, जो अब तक हुई जांच की जानकारी लेकर इसे आगे बढ़ा रही हैं। मुख्य आरोपी रविदत्त मिश्रा को जेल भेजने के बाद से पुलिस इसमें अभी तक कुछ खास नहीं कर पाई है, जबकि एसएसपी ने इस केस को अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए एसआर केस भी घोषित कर चुके हैं।

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पुलिस की अब तक की जांच में 17 संदिग्धों के नाम मिले हैं। पुलिस एक-एक कर सभी से पूछताछ भी कर चुकी है, लेकिन सबका एक सा जवाब होने की वजह से कोई ठोस साक्ष्य हाथ नहीं लग सका है। इसके अलावा 10 अन्य लोगों से भी पुलिस ने पूछताछ की है, जिनमें से सात लोग दूसरे जिलों के रहने वाले हैं। पुलिस को संदेह तो कई लोगों पर है, लेकिन रविदत्त के पास से कुछ खास हासिल न हो पाने की वजह से जांच धीमी पड़ गई।
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मास्टरमाइंड रविदत्त मिश्रा को पुलिस ने जेल भेज चुकी है। पहले पुलिस इस गिरोह में शामिल होने की आशंका में सामने आए लोगों से पूछताछ करने के साथ ही साक्ष्य संकलन करने लगी है। पुलिस की कोशिश यही है कि तह तक जाकर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाए। पूछताछ में जिन तीन लोगों के नाम मास्टरमाइंड रविदत्त मिश्र ने बताए हैं, उनके बारे में पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी है। पुलिस को उम्मीद है कि उनसे ही पूछताछ के बाद जांच आगे बढ़ पाएगी।
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यह हुआ था
10 जनवरी को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन ने फर्जी स्टांप संबंधी शिकायत की थी। उनका कहना था कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन, गोरखपुर के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन द्वारा भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था।

अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। महज तीन हजार का स्टांप सही पाया गया, बाकी 50 हजार का फर्जी था। डीएम के आदेश पर नासिक भी पत्र भेजकर इसके फर्जी होने की पुष्टि करा ली गई। इसके बाद ही पुलिस केस दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि एएसपी अंशिका वर्मा की देखरेख में एसआईटी पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रही है। पुलिस जांच व साक्ष्यों के आधार पर ही कार्रवाई को आगे बढ़ा रही है। जो भी लोग इस गिरोह में शामिल हैं, पुलिस साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर कार्रवाई करेगी।

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