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UP: आस्था के सम्मान से मजबूत हो रही आर्थिकी, गोरखपुर में धार्मिक स्थलों के पर्यटन विकास से बढ़े रोजगार के अवसर
Sun, 22 Feb 2026 06:17 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Sun, 22 Feb 2026 06:17 PM IST
सार
प्रदेश में बने नए 'आध्यात्मिक टूरिज्म सर्किट' ने गोरखपुर को अयोध्या और वाराणसी से सीधे जोड़ दिया है। पहले जो श्रद्धालु केवल एक शहर तक सीमित रहते थे, अब वे बेहतर कनेक्टिविटी (फोरलेन सड़कों और हवाई सेवाओं) के कारण गोरखपुर को अपनी यात्रा का हिस्सा बना रहे हैं। गोरखनाथ मंदिर में उमड़ रही सुदूर के श्रद्धालुओं की भीड़ इसका प्रमाण है।
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शिवावतारी महायोगी गुरू गोरखनाथ जी महराज
- फोटो : स्त्रोत- पीआर
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विस्तार
पर्यटन विकास का सीधा संबंध रोजगार के अवसरों में वृद्धि और आर्थिकी की मजबूती से होता है। पर्यटन विकास जब आस्था और श्रद्धा से जुड़ा हो तो रोजगार और अर्थव्यवस्था के बढ़ाव की रफ्तार और भी तेज हो जाती है। योगी सरकार ने इसी मंशा से आस्था के सम्मान को अर्थव्यवस्था से जोड़ा है।
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काशी, अयोध्या, मथुरा जैसे प्रमुख आस्था स्थलों के साथ ही सरकार ने हर जिले में वहां की धार्मिक-आध्यात्मिक विरासत को विकास के साथ जोड़कर रोजगार और अर्थव्यवस्था का नया मॉडल दिया है। गोरखपुर में भी धार्मिक स्थलों को पर्यटन विकास से जोड़ा गया तो अयोध्या और काशी आने वाले श्रद्धालुओं की आमद यहां भी बढ़ गई। पर्यटन विभाग के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं।
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प्रदेश में बने नए 'आध्यात्मिक टूरिज्म सर्किट' ने गोरखपुर को अयोध्या और वाराणसी से सीधे जोड़ दिया है। पहले जो श्रद्धालु केवल एक शहर तक सीमित रहते थे, अब वे बेहतर कनेक्टिविटी (फोरलेन सड़कों और हवाई सेवाओं) के कारण गोरखपुर को अपनी यात्रा का हिस्सा बना रहे हैं।
गोरखनाथ मंदिर में उमड़ रही सुदूर के श्रद्धालुओं की भीड़ इसका प्रमाण है। काशी विश्वनाथ और अयोध्या में रामलला के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का जत्था महायोगी गोरखनाथ की तपस्थली गोरखनाथ मंदिर भी पहुंच रहा है। गोरखपुर में पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार कोविड का दौर बीतने के बाद गोरखपुर में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है।
गोरखनाथ मंदिर में उमड़ रही सुदूर के श्रद्धालुओं की भीड़ इसका प्रमाण है। काशी विश्वनाथ और अयोध्या में रामलला के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं का जत्था महायोगी गोरखनाथ की तपस्थली गोरखनाथ मंदिर भी पहुंच रहा है। गोरखपुर में पर्यटन विभाग के उप निदेशक राजेंद्र प्रसाद यादव के अनुसार कोविड का दौर बीतने के बाद गोरखपुर में धार्मिक पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है।
इसे बीते तीन साल में गोरखपुर आए पर्यटकों की संख्या से भी समझा जा सकता है। वर्ष 2023 से लेकर वर्ष 2025 तक गोरखपुर में 96 लाख 76 हजार 354 पर्यटक आए। इसमें सर्वाधिक संख्या गोरखनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की रही। देखा जाए तो धार्मिक-आध्यात्मिक पर्यटन से आस्था के सम्मान, विकास और रोजगार की चेन बन रही है।
श्रद्धालु अब एक ही यात्रा में कई प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण करना पसंद कर रहे हैं, जिससे पूर्वांचल का धार्मिक पर्यटन सर्किट मजबूत हुआ है। धार्मिक पर्यटन के उछाल ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। काशी और अयोध्या से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा गोरखपुर को अपनी धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बनाने से शहर के होटल, परिवहन, फूल-माला, प्रसाद, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि हुई है।
श्रद्धालु अब एक ही यात्रा में कई प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण करना पसंद कर रहे हैं, जिससे पूर्वांचल का धार्मिक पर्यटन सर्किट मजबूत हुआ है। धार्मिक पर्यटन के उछाल ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं। काशी और अयोध्या से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा गोरखपुर को अपनी धार्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव बनाने से शहर के होटल, परिवहन, फूल-माला, प्रसाद, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि हुई है।
योगी सरकार ने गांव-जवार तक पर्यटन की संभावनाओं को तलाशा है, उस पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। इस दिशा में सर्वाधिक ध्यान धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था के केंद्रों पर दिया गया है। जनपद के कई मंदिरों को उनकी ख्याति के अनुरूप नई पहचान मिली है।
मसलन तरकुलहा देवी मंदिर, कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माई मंदिर, मुंजेश्वरनाथ भौवापार मंदिर, मानसरोवर मंदिर गोरखनाथ, सूर्यकुंड धाम, बांसगांव स्थित दुर्गा मंदिर की तरफ पूर्व की सरकारों ने ध्यान नहीं दिया था। कभी पर्व विशेष पर ही यहां भीड़ दिखती थी, लेकिन अब यहां लोग वर्ष पर्यंत आ रहे हैं।
मसलन तरकुलहा देवी मंदिर, कुसम्ही जंगल स्थित बुढ़िया माई मंदिर, मुंजेश्वरनाथ भौवापार मंदिर, मानसरोवर मंदिर गोरखनाथ, सूर्यकुंड धाम, बांसगांव स्थित दुर्गा मंदिर की तरफ पूर्व की सरकारों ने ध्यान नहीं दिया था। कभी पर्व विशेष पर ही यहां भीड़ दिखती थी, लेकिन अब यहां लोग वर्ष पर्यंत आ रहे हैं।
गोरखनाथ मंदिर
- फोटो : स्त्रोत- पीआर
इन धार्मिक स्थलों की भव्यता बढ़ी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ गए। अमर बलिदानी बंधू सिंह की कुलदेवी के रूप में प्रतिष्ठित तरकुलहा देवी मंदिर में तो हमेशा सैकड़ों दुकानें सजी रहती हैं। ऐसा ही नजारा बुढ़िया माई मंदिर का भी है। ये तो चंद उदाहरण है, सीएम योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना से पर्यटन का विस्तार विधानसभा स्तर तक किया है।
ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों के जीर्णोद्धार से उसके आसपास पूजन सामग्री, फूल माला, फल, जलपान व बच्चों के खिलौनों की अनेक दुकानें सज गई हैं। इनसे श्रद्धालु पर्यटकों को सहूलियत मिली है तो अनेक लोगों को रोजगार भी मिला। तरकुलहा देवी मंदिर में दुकानों की संख्या कई गुनी अधिक हो गई है तो बुढ़िया माई मंदिर परिसर के अलावा मुख्य सड़क पर भी खाने की वस्तुओं की दर्जनों रेहड़ियां स्थानीय लोगों के आयार्जन का जरिया बनी हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों के जीर्णोद्धार से उसके आसपास पूजन सामग्री, फूल माला, फल, जलपान व बच्चों के खिलौनों की अनेक दुकानें सज गई हैं। इनसे श्रद्धालु पर्यटकों को सहूलियत मिली है तो अनेक लोगों को रोजगार भी मिला। तरकुलहा देवी मंदिर में दुकानों की संख्या कई गुनी अधिक हो गई है तो बुढ़िया माई मंदिर परिसर के अलावा मुख्य सड़क पर भी खाने की वस्तुओं की दर्जनों रेहड़ियां स्थानीय लोगों के आयार्जन का जरिया बनी हैं।