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Exclusive: खाद्य तेल की महंगाई से तिलहनी फसलों का दायरा बढ़ाने पर जोर, सरसों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान
Wed, 17 Nov 2021 12:02 PM IST
vivek shukla
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
शोभित कुमार पांडेय, संतकबीरनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 17 Nov 2021 12:02 PM IST
सार
संतकबीरनगर जिले में करीब 2.80 लाख किसान हैं। पिछले वर्ष रबी सीजन में 1,04,887 हेक्टेयर में खेती हुई थी। इस वर्ष 2.22 प्रतिशत बढ़ाकर 1,07,269 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती का लक्ष्य तय किया गया है।
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सरसों का तेल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
तिलहनी फसलों की घटती उपज और सरसों के तेल की बढ़ती महंगाई को देखते हुए कृषि विभाग तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने पर जोर दे रहा है। पिछले वर्षों की तुलना में सरसों की खेती का रकबा 10.14 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। जबकि शासन की ओर से सरसों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।
संतकबीरनगर जिले में करीब 2.80 लाख किसान हैं। पिछले वर्ष रबी सीजन में 1,04,887 हेक्टेयर में खेती हुई थी। इस वर्ष 2.22 प्रतिशत बढ़ाकर 1,07,269 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष 2489 हेक्टेयर में सरसों की बुआई हुई थी। सरसों तेल की बढ़ती कीमत से आम आदमी परेशान है। इससे निपटने के लिए शासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने सरसों की फसल का रकबा बढ़ाकर 2770 हेक्टेेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य रखा गया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.14 प्रतिशत अधिक है।
इसी तरह पिछले वर्ष तोरिया की खेती 4944 हेक्टेयर में हुई थी, जबकि इस साल 4.18 प्रतिशत बढ़ाकर 5160 हेक्टेयर में होगी। पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम बढ़ोतरी मात्र 0.54 प्रतिशत गेहूं के रकबे में प्रस्तावित है। जबकि सबसे अधिक अलसी के रकबे में 30 हेक्टेयर की वृद्धि की गई है। मसूर की खेती में भी 22.43 प्रतिशत, मटर की खेती में 21.86 प्रतिशत और मक्का की खेती में 18.67 प्रतिशत क्षेत्रफल में वृद्धि प्रस्तावित है। किसान अतुल पांडेय, प्रयाग दत्त, सुभाषचंद त्रिपाठी, हरिश्चंद्र चौधरी आदि बताते हैं कि सरसों की फसल में रोग लगने का खतरा अधिक रहता है और उपज कम होती है। यही वजह है कि सरसों की खेती कम रकबे में की जाती है। लेकिन सरसों के तेल की बढ़ती कीमत की वजह से इस बार सरसों की खेती का दायरा बढ़ाया गया है। सरसों की अलग बुआई तो की ही गई है, साथ में गेहूं की फसल के साथ भी सरसों की बुआई की जा रही है।
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संतकबीरनगर जिले में करीब 2.80 लाख किसान हैं। पिछले वर्ष रबी सीजन में 1,04,887 हेक्टेयर में खेती हुई थी। इस वर्ष 2.22 प्रतिशत बढ़ाकर 1,07,269 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष 2489 हेक्टेयर में सरसों की बुआई हुई थी। सरसों तेल की बढ़ती कीमत से आम आदमी परेशान है। इससे निपटने के लिए शासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने सरसों की फसल का रकबा बढ़ाकर 2770 हेक्टेेयर क्षेत्रफल का लक्ष्य रखा गया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.14 प्रतिशत अधिक है।
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इसी तरह पिछले वर्ष तोरिया की खेती 4944 हेक्टेयर में हुई थी, जबकि इस साल 4.18 प्रतिशत बढ़ाकर 5160 हेक्टेयर में होगी। पिछले वर्षों की तुलना में सबसे कम बढ़ोतरी मात्र 0.54 प्रतिशत गेहूं के रकबे में प्रस्तावित है। जबकि सबसे अधिक अलसी के रकबे में 30 हेक्टेयर की वृद्धि की गई है। मसूर की खेती में भी 22.43 प्रतिशत, मटर की खेती में 21.86 प्रतिशत और मक्का की खेती में 18.67 प्रतिशत क्षेत्रफल में वृद्धि प्रस्तावित है। किसान अतुल पांडेय, प्रयाग दत्त, सुभाषचंद त्रिपाठी, हरिश्चंद्र चौधरी आदि बताते हैं कि सरसों की फसल में रोग लगने का खतरा अधिक रहता है और उपज कम होती है। यही वजह है कि सरसों की खेती कम रकबे में की जाती है। लेकिन सरसों के तेल की बढ़ती कीमत की वजह से इस बार सरसों की खेती का दायरा बढ़ाया गया है। सरसों की अलग बुआई तो की ही गई है, साथ में गेहूं की फसल के साथ भी सरसों की बुआई की जा रही है।
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रबी 2020-21 की उपलब्धि रबी 2021-22 का लक्ष्य
गेहूं 91078 हेक्टेयर 91573 हेक्टेयर
जौ 649 हेक्टेयर 577 हेक्टेयर
मक्का 135 हेक्टेयर 166 हेक्टेयर
चना 488 हेक्टेयर 475 हेक्टेयर
मटर 3928 हेक्टेयर 5027 हेक्टेयर
मसूर 1169 हेक्टेयर 1511 हेक्टेयर
तोरिया 4944 हेक्टेयर 5160 हेक्टेयर
राई/सरसों 2489 हेक्टेयर 2770 हेक्टेयर
अलसी 7 हेक्टेयर 10 हेक्टेयर
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि इस साल विशेषकर तिलहन की फसल का रकबा बढ़ाने पर जोर है। सरसों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान है। पिछले साल 36 क्विंटल सरसों का बीज मिला था। जबकि इस साल 70 क्विंटल सरसों का बीज मिला है। इसमें से 38 क्विंटल नि:शुल्क राजकीय बीज गोदामों से वितरित किया जा रहा है। शर्त है कि लघु सीमांत और अनुसूचित जाति की महिला किसान हो। इसके साथ ही पिछड़ा क्षेत्र हो, जहां समृद्ध खेती करने में असुविधा हो। ऐसे किसानों को दो किलोग्राम सरसों का बीज मुफ्त दिया जाएगा। दो किलोग्राम सरसों की बुआई एक एकड़ खेत में होगी। पिछले वर्ष सरसों की खेती में प्रति हेक्टेयर 10.39 क्विंटल उत्पादन रहा, जबकि इस वर्ष प्रति हेक्टेयर 10.74 क्विंटल उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है। इसी तरह अलसी की खेती में पिछले वर्ष प्रति हेक्टेयर 5.7 क्विंटल उत्पादन रहा और इस वर्ष 7.00 क्विंटल उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फसलों में रोग के लक्षण दिखे तो कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करके तकनीकी सलाह देकर दवाओं का छिड़काव करें।
गेहूं 91078 हेक्टेयर 91573 हेक्टेयर
जौ 649 हेक्टेयर 577 हेक्टेयर
मक्का 135 हेक्टेयर 166 हेक्टेयर
चना 488 हेक्टेयर 475 हेक्टेयर
मटर 3928 हेक्टेयर 5027 हेक्टेयर
मसूर 1169 हेक्टेयर 1511 हेक्टेयर
तोरिया 4944 हेक्टेयर 5160 हेक्टेयर
राई/सरसों 2489 हेक्टेयर 2770 हेक्टेयर
अलसी 7 हेक्टेयर 10 हेक्टेयर
जिला कृषि अधिकारी पीसी विश्वकर्मा ने कहा कि इस साल विशेषकर तिलहन की फसल का रकबा बढ़ाने पर जोर है। सरसों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान है। पिछले साल 36 क्विंटल सरसों का बीज मिला था। जबकि इस साल 70 क्विंटल सरसों का बीज मिला है। इसमें से 38 क्विंटल नि:शुल्क राजकीय बीज गोदामों से वितरित किया जा रहा है। शर्त है कि लघु सीमांत और अनुसूचित जाति की महिला किसान हो। इसके साथ ही पिछड़ा क्षेत्र हो, जहां समृद्ध खेती करने में असुविधा हो। ऐसे किसानों को दो किलोग्राम सरसों का बीज मुफ्त दिया जाएगा। दो किलोग्राम सरसों की बुआई एक एकड़ खेत में होगी। पिछले वर्ष सरसों की खेती में प्रति हेक्टेयर 10.39 क्विंटल उत्पादन रहा, जबकि इस वर्ष प्रति हेक्टेयर 10.74 क्विंटल उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है। इसी तरह अलसी की खेती में पिछले वर्ष प्रति हेक्टेयर 5.7 क्विंटल उत्पादन रहा और इस वर्ष 7.00 क्विंटल उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। फसलों में रोग के लक्षण दिखे तो कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करके तकनीकी सलाह देकर दवाओं का छिड़काव करें।