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बाबा साहब के विचारों को मूर्तियों से रिप्लेस करने की हो रही कोशिश : प्रो. अनंत मिश्र
Mon, 15 Apr 2024 03:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 15 Apr 2024 03:02 AM IST
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फोटो
-डीडीयू में डॉ. अंबेडकर की 133वीं जयंती पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
-भीमराव अंबेडकर का व्यक्तित्व है बहुआयामी : प्रो. रामनरेश चौधरी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एससी-एसटी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में संवाद भवन में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 133 वी जयंती धूमधाम से मनाई गई। मुख्य अतिथि के रूप में कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी मौजूद रहे।
मुख्य वक्ता डीडीयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनंत मिश्र ने आगाह किया कि आज की राजनीतिक विचारधारा बाबा साहब के विचारों को उनके मूर्तियों से रिप्लेस करने की कोशिश कर रही है। ऐसी विचारधारा से हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि विधि विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम नरेश चौधरी ने बाबा साहब के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। कहा कि किसी भी देश में आर्थिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र तब तक सफल नहीं होगा, जब तक वहां के लोग सामाजिक सुधारों के लिए तत्पर न हों।
राजनीति शास्त्र विभाग के प्रो. रजनीकांत पांडेय ने कहा कि आज भी कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के कैंपस में बाबा साहब की मूर्तियां लगी हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि कैसे दुनिया की ये बेहतरीन संस्थाएं बाबा साहब को एक विद्यार्थी के रूप में पाकर आज भी गौरवांवित महसूस करती हैं। विश्वविद्यालय की तरफ से छात्र प्रतिनिधि भास्कर चौधरी ने विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर की एक प्रतिमा लगवाने तथा एक शोधपीठ स्थापित किए जाने की मांग की। प्रो. गोपाल प्रसाद, डॉ. बृजेश कुमार व डॉ. अमित उपाध्याय ने भी बाबा साहब के जीवन संघर्षों को याद किया। डीडीयू एससी एसटी एम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. आलोक गोयल ने स्वागत, सचिव डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. संजय राम ने किया।
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कार्यक्रम में प्रो. गौर हरी बेहरा, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. संजय बैजल, प्रो. जितेंद्र मिश्र, प्रो. विमलेश मिश्र, प्रो. निखिल कांत शुक्ल, प्रो. केआर तिवारी, प्रो. मनोज तिवारी, डॉ सत्यपाल सिंह, डॉ रामवंत गुप्ता समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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अंबेडकर के गुणों से प्रेरणा लें विद्यार्थी : प्रो. जेपी सैनी
फोटो
- एमएमएमयूटी में धूमधाम से मनाई गई अंबेडकर जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। डॉ. भीम राव अंबेडकर की जयंती रविवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का व्यक्तित्व अथाह संघर्षों से निर्मित हुआ और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहा।
छात्र-छात्राओं को उनकी अध्ययनशीलता, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, शोषित, पीड़ित, और वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति सदैव तत्पर रहने जैसे गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए। भारत का संविधान और उसके कई प्रावधान डॉ. आंबेडकर की दूरदृष्टि का परिणाम है।
अधिष्ठाता नियोजन इं. आरडी पटेल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा को उत्थान का सबसे ताकतवर माध्यम माना था। उनके बताए रास्ते पर चलकर भारत को एक शक्तिशाली और समृद्ध देश बनाया जा सकता है। शिक्षक डॉ. प्रदत्त भारती ने डॉ. आंबेडकर के जीवन और व्यक्तित्व से सीख लेने की सलाह दी।
इससे पूर्व कुलपति ने डॉ. अंबेडकर, पं. मालवीय तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत छात्र क्रिया कलाप परिषद के अध्यक्ष प्रो. बीके पांडेय ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. आंबेडकर की ओर से 17 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में दिए गए वक्तव्य का प्रसारण भी किया गया। संचालन डॉ. अभिजित मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजन मिश्र ने किया।
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-डीडीयू में डॉ. अंबेडकर की 133वीं जयंती पर आयोजित हुआ कार्यक्रम
-भीमराव अंबेडकर का व्यक्तित्व है बहुआयामी : प्रो. रामनरेश चौधरी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय एससी-एसटी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के तत्वावधान में संवाद भवन में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 133 वी जयंती धूमधाम से मनाई गई। मुख्य अतिथि के रूप में कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी मौजूद रहे।
मुख्य वक्ता डीडीयू के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अनंत मिश्र ने आगाह किया कि आज की राजनीतिक विचारधारा बाबा साहब के विचारों को उनके मूर्तियों से रिप्लेस करने की कोशिश कर रही है। ऐसी विचारधारा से हमें सावधान रहने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि विधि विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम नरेश चौधरी ने बाबा साहब के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित किया। कहा कि किसी भी देश में आर्थिक एवं राजनीतिक लोकतंत्र तब तक सफल नहीं होगा, जब तक वहां के लोग सामाजिक सुधारों के लिए तत्पर न हों।
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राजनीति शास्त्र विभाग के प्रो. रजनीकांत पांडेय ने कहा कि आज भी कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के कैंपस में बाबा साहब की मूर्तियां लगी हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि कैसे दुनिया की ये बेहतरीन संस्थाएं बाबा साहब को एक विद्यार्थी के रूप में पाकर आज भी गौरवांवित महसूस करती हैं। विश्वविद्यालय की तरफ से छात्र प्रतिनिधि भास्कर चौधरी ने विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर की एक प्रतिमा लगवाने तथा एक शोधपीठ स्थापित किए जाने की मांग की। प्रो. गोपाल प्रसाद, डॉ. बृजेश कुमार व डॉ. अमित उपाध्याय ने भी बाबा साहब के जीवन संघर्षों को याद किया। डीडीयू एससी एसटी एम्प्लाइज एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. आलोक गोयल ने स्वागत, सचिव डॉ. प्रभुनाथ प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. संजय राम ने किया।
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कार्यक्रम में प्रो. गौर हरी बेहरा, प्रो. सुनीता मुर्मू, प्रो. संजय बैजल, प्रो. जितेंद्र मिश्र, प्रो. विमलेश मिश्र, प्रो. निखिल कांत शुक्ल, प्रो. केआर तिवारी, प्रो. मनोज तिवारी, डॉ सत्यपाल सिंह, डॉ रामवंत गुप्ता समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी व छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अंबेडकर के गुणों से प्रेरणा लें विद्यार्थी : प्रो. जेपी सैनी
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- एमएमएमयूटी में धूमधाम से मनाई गई अंबेडकर जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। डॉ. भीम राव अंबेडकर की जयंती रविवार को मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में मनाई गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर का व्यक्तित्व अथाह संघर्षों से निर्मित हुआ और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहा।
छात्र-छात्राओं को उनकी अध्ययनशीलता, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण, शोषित, पीड़ित, और वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति सदैव तत्पर रहने जैसे गुणों से प्रेरणा लेनी चाहिए। भारत का संविधान और उसके कई प्रावधान डॉ. आंबेडकर की दूरदृष्टि का परिणाम है।
अधिष्ठाता नियोजन इं. आरडी पटेल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने शिक्षा को उत्थान का सबसे ताकतवर माध्यम माना था। उनके बताए रास्ते पर चलकर भारत को एक शक्तिशाली और समृद्ध देश बनाया जा सकता है। शिक्षक डॉ. प्रदत्त भारती ने डॉ. आंबेडकर के जीवन और व्यक्तित्व से सीख लेने की सलाह दी।
इससे पूर्व कुलपति ने डॉ. अंबेडकर, पं. मालवीय तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत छात्र क्रिया कलाप परिषद के अध्यक्ष प्रो. बीके पांडेय ने किया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. आंबेडकर की ओर से 17 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में दिए गए वक्तव्य का प्रसारण भी किया गया। संचालन डॉ. अभिजित मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजन मिश्र ने किया।