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खाता खाली न कर दे प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना, गलती से भी न करें ये काम

Thu, 13 Feb 2020 12:11 PM IST
vivek shukla ऐहतेशाम उद्दीन अहमद, गोरखपुर।
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Feb 2020 12:11 PM IST
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Do not Share linking of Pradhan Mantri Unemployed Allowance Scheme on social media platform
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना 2020 के तहत 3500 रुपये महीना पाने के लालच में यदि आप सोशल मैसेजिंग एप पर शेयर किए जा रहे लिंक  को क्लिक करेंगे तो हो सकता है कि आपका बैंक खाता खाली हो जाए या आपके मोबाइल फोन में पड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जैसे ईमेल, सोशल साइट अकाउंट आदि के पासवर्ड, आधार, पैन कार्ड की डिटेल लीक हो जाएं।

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यह लिंक इन दिनों काफी चर्चा में है, कई पाठकों ने प्रधानमंत्री बेरोजगारी भत्ता योजना की हकीकत की जानकारी लेनी चाही। अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि यह लिंक धोखाधड़ी का एक जाल है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सप्तर्षि राय ने भी किसी भी तरह की प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना संचालित होेने से इनकार किया है।
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स्मार्टफोन के सोशल मैसेजिंग एप पर एक प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना 2020 के नाम से एक मैसेज वायरल हो रहा है। मैसेज में लिखा है कि इस योजना के तहत अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। योजना के तहत युवा बेरोजागारों को 3500 रुपये प्रति माह दिया जाएगा। पंजीकरण का आवेदन निशुल्क, योग्यता दसवीं पास और आयु 18 से 40 निर्धारित होना बताया गया है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 फरवरी 2020 बताई गई है। पंजीकरण के लिए http://bit.ly/pradhanmantri-berozgaari-bhattaa-yojna लिंक पर क्लिक करने को कहा गया है।

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पूछे जाते हैं तीन सवाल

लिंक पर क्लिक करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चित्र के साथ ही प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना नाम से पेज खुलता है। इसमें योजना केंद्र सरकार द्वारा संचालित बताई गई है और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फार्म दिया गया है। फार्म में आवेदन कर्ता का नाम, पिता का नाम, उम्र और राज्य भरने के कॉलम दिए गए हैं। फार्म भरने पर तीन प्रश्न पूछे जाते हैं।

पहला प्रश्न क्या आप भारत के नागरिक हैं, दूसरा आपकी उम्र 18 वर्ष से अधिक है और तीसरा प्रश्न क्या आप पहले से ही किसी अन्य योजना भत्ते का लाभ ले रहे हैं? इन प्रश्नों का जवाब देते ही एक नया पेज खुलता है जिसमें आपको प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना का पात्र होने के लिए मुबारकबाद दी जाती है। बताया गया कि आपको 3500 रुपये बेरोजगारी भत्ता मिलेगा जिसे ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी से प्राप्त किया जा सकता है।

पात्र सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए सोशल मैसेजिंग प्लेटफार्म पर पांच लोगों को यह मैसेज भेज कर अपना पंजीकरण क्रमांक प्राप्त करने को कहा जाता है। पांच लोगों को मैसेज भेजने पर अंग्रेजी 13 शब्दांक (अल्फा न्यूमेरिक) की पंजीकरण सूचना मिलती है। पंजीकरण के बाद आपका मोबाइल फोन या ईमेल वेरिफिकेशन को कहा जाता है। यदि आप अपना मोबाइल नंबर या ईमेल देते हैं तो अंत में यूट्यूब चैनल ऑनलाइन गुरु का पेज खुलता है।

यह पेज मार्च 2019 में बनाया गया लेकिन इस पर कोई वीडियो या जानकारी अपलोड नहीं की गई है। यहां पर पहुंचने पर आपको पता चलता है कि आपके साथ मजाक हुआ है, दरअसल आप साइबर धोखाधड़ी का शिकार हो चुके हैं। साइबर अपराधी इसके जरिए आपके मोबाइल की सारी महत्वपूर्ण जानकारियां उड़ा चुके होंगे।

क्या है सच्चाई

दरअसल प्रधानमंत्री बेरोजगार योजना का लिंक https//: www.earnwithkp.com नाम की वेबसाइट का छिपा हुआ लिंक है। साइबर दुनिया में मूल वेबसाइट छिपाने या छोटा करने के लिए बिटली नाम का इस्तेमाल किया जाता है। इस कंपनी ने भी बिटली का  इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना के नाम पर लोगों को उसकी वेबसाइट पर अनजाने क्लिक करवाया।

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के जिला प्रभारी निशांत कुमार बताते हैं कि कंपनियां रेवेन्यू जेनरेशन के लिए इस तरह के काम करती हैं। यह दो तरह से हो सकता है। पहला हिट बढ़वा कर यानी जितने ज्यादा क्लिक मिलेंगे उस वेबसाइट की कीमत बढ़ेगी और उसको ज्यादा विज्ञापन मिलेंगे। दूसरा साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें कंपनी आपके मोबाइल की सारी जानकारी कलेक्ट कर बिजनेस प्रमोशन कंपनियों को बेच देती है। कंपनियां इन डेटा और जानकारी का इस्तेमाल बाजार और उपभोक्ताओं के प्रसार में करती हैं।

कैसे बचें इन साइबर अपराध से
साइबर एक्सपर्ट एडीजी आशुतोष पांडेय बताते हैं कि कोई भी यूआरएल जो http:// से शुरू होता है असुरक्षित है इसे क्लिक करने पर आपके सिस्टम या मोबाइल पर पड़ी सूचना लीक हो सकती है। बेहतर होगा कि उन्हीं वेबसाइट को क्लिक करें जो https:// से शुरू होती हैं। यदि किसी बैंक, वित्तीय संस्थान आदि से ईमेल के जरिए कोई लिंक भेजा जाता है तो उसे ओपन नहीं करें बल्कि उस संस्थान की वेबसाइट पर जाकर संबंधित टैब क्लिक कर ही जानकारी का आदान प्रदान करें।
 

सरकारी वेबसाइट की पहचान nic.in

एडीजी आशुतोष पांडेय बताते हैं कि सरकार और उसके विभागों की वेबसाइट की पहचान यह है कि उनके यूआरएल के अंत में nic.in होता है। प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना का लिंक के अंत में .com है यानी यह वेबसाइट व्यावसायिक (कॉमर्शियल) प्रतिष्ठान की है न कि सरकारी। इस पर क्लिक करने से आपके मोबाइल की महत्वपूर्ण जानकारियां लीक हो सकती हैं।

कैसे जानें बिटली वेबसाइट की असलियत
एडीजी आशुतोष पांडेय बताते हैं कि लंबे यूआरएल को छोटा करने या छिपाने के लिए बिटली प्लेटफार्म का इस्तेमाल किया जाता है। यदि आपके पास बिटली यूआरएल का लिंक आता है तो उसे क्लिक नहीं करें। इसकी जगह लिंक कॉपी कर एड्रेस बार में इस लिंक को पेस्ट करने के बाद यूआरएल के अंत में + टाइप कर सर्च करें। लिंक की सच्चाई सामने आ जाएगी।

http://bit.ly/pradhanmantri-berozgaari-bhattaa-yojna के अंत में + लगाने पर https//: www.earnwithkp.com वेबसाइट की जानकारी मिलती है। समाचार लिखे जाने तक इस लिंक को 12,89,298 लोग क्लिक कर चुके थे। इनमें से 12,82,711 भारत से क्लिक किए गए थे। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह साइट बिजनेस प्रमोशन के लिए डेटा कलेक्ट करने में इस्तेमाल की जा रही हो सकती है।  

जिला समाज कल्याण अधिकारी सप्तर्षि राय ने बताया कि प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना नाम की किसी योजना का संचालन समाज कल्याण विभाग की ओर से नहीं किया जा रहा है। यदि इस तरह की कोई योजना शुरू की जाएगी तो पहले उसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा। यह गलत जानकारी है।  

देखा तो फंसे: बहुत कुछ संदिग्ध है वेबसाइट में
प्रधानमंत्री बेरोजगार भत्ता योजना के लिंक में काफी कुछ संदिग्ध है। सबसे पहले तो प्रश्नोत्तर ही संदिग्ध है। तीन प्रश्नों का जवाब गलत देने पर भी वेबसाइट आपको पात्र होने की बधाई देते हुए पांच लोगों को यह लिंक शेयर करने को कहती है। यदि आप बिना जवाब दिए ही अगले प्रश्न के लिए क्लिक कर अंत में पहुंच जाते हैं तो भी वेबसाइट आपको पात्र होने की बधाई देती है।

सबसे आपत्तिजनक और संदिग्ध स्थिति इन तीन प्रश्नों के बाद आती है। इसमें कहा गया है कि यदि आप इस वेबसाइट को देख रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आप इस वेबसाइट सारे टर्म और कंडीशन का स्वीकार कर रहे हैं। आपकी यह स्वीकृति ही आपके मोबाइल या कंप्यूटर का महत्वपूर्ण डेटा शेयर करने की भी हो सकती है।

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