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Gorakhpur News: दो गोली लगने के बावजूद जयश्रीराम का जयघोष करते आगे बढ़े थे आद्या सिंह
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भुसवल निवासी आद्या सिंह वर्ष 1990 में गए थे कारसेवा करने अयोध्या
आज नंगलिया अस्पताल में इन्हें किया जाएगा सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बात वर्ष 1990 की है। कारसेवकों का समूह अयोध्या पहुंच गया था। बांसगांव क्षेत्र के भुसवल निवासी आद्या सिंह दो गोली लगने के बावजूद जयश्रीराम का जयघोष करते आगे बढ़े थे।
आद्या सिंह भी कई दिन भूखे-प्यासे नदी के किनारे कभी साइकिल तो कभी पैदल चलते-चलते सरयू पार कर वहां पहुंचे थे। दूसरे दिन हरियाणा और पंजाब के कारसेवकों संग आगे बढ़ रहे थे, तब तक एक गोली आगे चल रहे युवक को लगी और वहीं गिर पड़ा। युवक को उठाने झुके आद्या सिंह को भी दो गोली लगी और बेहोश हो गए। होश आया तो अस्पताल में थे। सोमवार को श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर इन्हें नांगलिया अस्पताल में सम्मानित किया जाएगा।
शहर के अंधियारी बाग मोहल्ले में रहने वाले आद्या सिंह आदर्श इंटर काॅलेज हरदी चक में गणित और विज्ञान पढ़ाते थे। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए आंदोलन शुरू हुआ तो इनके गांव भुसवल में हर दिन हरिकीर्तन होने लगा। गांव में अखंड श्रीराम ज्योति जलाई गई थी। उस वर्ष दिवाली के दिये भी इसी श्रीराम ज्योति से जलाए गए थे।
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अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ तो इनके समेत गांव के 18 लोग साइकिल से अयोध्या के लिए निकल पड़े। हर चौराहे पर फोर्स खड़ी थी। इसलिए गांव-गांव छिपते हुए संतकबीरनगर जिले के हैंसर बाजार पहुंचे। पुलिस को चकमा देने के लिए साइकिल समेत सभी 18 लोगों ने सात बार कुआनो नदी को इधर-उधर से पार कर एक गांव में जाकर छिप गए। जिस घर में छिपे थे, उसी घर में एक लड़की बांसगांव की थी, जिसने पहचान लिया और भोजन का प्रबंध कराया। अगले दिन छिपते हुए डॉ. वाईडी सिंह के भाई के फार्म हाऊस पहुंचकर छिप गए।
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नदी के किनारे कई रात गुजारी
बस्ती जिले में पुलिस का पहरा और सख्त था। इसलिए हम लोग सरयू नदी के किनारे-किनारे चलते रहे। 28 तारीख को नदी पार कर अयोध्या पहुंच गए। वहां हर राज्य से आए कारसेवकों के रुकने के लिए अलग-अलग इलाका तय था। भूलवश हम लोग हरियाणा-पंजाब की तरफ पहुंच गए। वहां रात्रि विश्राम कर अगले दिन कारसेवकों का जत्था विवादित स्थल की तरफ चला। सभी लोग उत्साह में जयघोष करते चल रहे थे। इसी दौरान मेरे आगे चल रहा युवक चीखकर गिर पड़ा। उसे पुलिसवालों ने गोली मार दी थी। युवक को उठाने के लिए झुका तब तक एक गोली बांह में और दूसरी गर्दन में आकर धंस गई। मैंने जोर से जय श्रीराम बोला और आगे चल दिया, लेकिन कुछ ही दूरी पर गिरकर बेहोश हो गया था। कारसेवकों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। 15 दिन इलाज के बाद गोरखपुर आया। यहां डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने अपने अस्पताल में डेढ़ महीने तक सेवाभाव से इलाज किया।
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आज सारे दर्द मिट गए
आद्या सिंह अब 73 साल के हो चुके हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के उद्घाटन व प्राण प्रतिष्ठा समारोह से बेहद उत्साहित हैं। कहते हैं कि सारे जीवन की तपस्या का फल मिल गया। खुशी है कि इस लड़ाई में हमें शामिल होने का मौका मिला। श्रीराम का मंदिर देश और दुनिया को आदर्श की सीख देगा।
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आज नंगलिया अस्पताल में इन्हें किया जाएगा सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बात वर्ष 1990 की है। कारसेवकों का समूह अयोध्या पहुंच गया था। बांसगांव क्षेत्र के भुसवल निवासी आद्या सिंह दो गोली लगने के बावजूद जयश्रीराम का जयघोष करते आगे बढ़े थे।
आद्या सिंह भी कई दिन भूखे-प्यासे नदी के किनारे कभी साइकिल तो कभी पैदल चलते-चलते सरयू पार कर वहां पहुंचे थे। दूसरे दिन हरियाणा और पंजाब के कारसेवकों संग आगे बढ़ रहे थे, तब तक एक गोली आगे चल रहे युवक को लगी और वहीं गिर पड़ा। युवक को उठाने झुके आद्या सिंह को भी दो गोली लगी और बेहोश हो गए। होश आया तो अस्पताल में थे। सोमवार को श्रीराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर इन्हें नांगलिया अस्पताल में सम्मानित किया जाएगा।
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शहर के अंधियारी बाग मोहल्ले में रहने वाले आद्या सिंह आदर्श इंटर काॅलेज हरदी चक में गणित और विज्ञान पढ़ाते थे। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए आंदोलन शुरू हुआ तो इनके गांव भुसवल में हर दिन हरिकीर्तन होने लगा। गांव में अखंड श्रीराम ज्योति जलाई गई थी। उस वर्ष दिवाली के दिये भी इसी श्रीराम ज्योति से जलाए गए थे।
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अयोध्या में कारसेवा का आह्वान हुआ तो इनके समेत गांव के 18 लोग साइकिल से अयोध्या के लिए निकल पड़े। हर चौराहे पर फोर्स खड़ी थी। इसलिए गांव-गांव छिपते हुए संतकबीरनगर जिले के हैंसर बाजार पहुंचे। पुलिस को चकमा देने के लिए साइकिल समेत सभी 18 लोगों ने सात बार कुआनो नदी को इधर-उधर से पार कर एक गांव में जाकर छिप गए। जिस घर में छिपे थे, उसी घर में एक लड़की बांसगांव की थी, जिसने पहचान लिया और भोजन का प्रबंध कराया। अगले दिन छिपते हुए डॉ. वाईडी सिंह के भाई के फार्म हाऊस पहुंचकर छिप गए।
नदी के किनारे कई रात गुजारी
बस्ती जिले में पुलिस का पहरा और सख्त था। इसलिए हम लोग सरयू नदी के किनारे-किनारे चलते रहे। 28 तारीख को नदी पार कर अयोध्या पहुंच गए। वहां हर राज्य से आए कारसेवकों के रुकने के लिए अलग-अलग इलाका तय था। भूलवश हम लोग हरियाणा-पंजाब की तरफ पहुंच गए। वहां रात्रि विश्राम कर अगले दिन कारसेवकों का जत्था विवादित स्थल की तरफ चला। सभी लोग उत्साह में जयघोष करते चल रहे थे। इसी दौरान मेरे आगे चल रहा युवक चीखकर गिर पड़ा। उसे पुलिसवालों ने गोली मार दी थी। युवक को उठाने के लिए झुका तब तक एक गोली बांह में और दूसरी गर्दन में आकर धंस गई। मैंने जोर से जय श्रीराम बोला और आगे चल दिया, लेकिन कुछ ही दूरी पर गिरकर बेहोश हो गया था। कारसेवकों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था। 15 दिन इलाज के बाद गोरखपुर आया। यहां डॉ. महेंद्र अग्रवाल ने अपने अस्पताल में डेढ़ महीने तक सेवाभाव से इलाज किया।
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आज सारे दर्द मिट गए
आद्या सिंह अब 73 साल के हो चुके हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के उद्घाटन व प्राण प्रतिष्ठा समारोह से बेहद उत्साहित हैं। कहते हैं कि सारे जीवन की तपस्या का फल मिल गया। खुशी है कि इस लड़ाई में हमें शामिल होने का मौका मिला। श्रीराम का मंदिर देश और दुनिया को आदर्श की सीख देगा।