{"_id":"6615a58d415c5f1c29078c24","slug":"degree-of-doctor-staff-will-have-to-be-written-on-the-boardwill-not-be-able-to-hide-any-information-from-patients-gorakhpur-news-c-7-hsr1010-521561-2024-04-10","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: बोर्ड पर लिखनी होगी डॉक्टर-स्टाफ की डिग्री...वैध-अवैध अस्पतालों की हो सकेगी पहचान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: बोर्ड पर लिखनी होगी डॉक्टर-स्टाफ की डिग्री...वैध-अवैध अस्पतालों की हो सकेगी पहचान
Mon, 04 Nov 2024 01:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुरॉ
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुरॉ
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2024 01:28 PM IST
सार
अब अस्पताल के अंदर बोर्ड पर डॉक्टर-स्टॉफ की डिग्री लिखनी होगी। नए नियमों के तहत अब अस्पताल प्रबंधन मरीजों से कोई जानकारी नहीं छिपा सकेंगे। अवैध अस्पतालों के संचालन पर रोक के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पहले से ही नियम बना रखे हैं। इन नियमों से आईएमए के पदाधिकारी और समाज के प्रबुद्ध लोग भी पूरी तरह सहमत हैं।
विज्ञापन
IMA।
- फोटो : IMA।
विस्तार
अवैध अस्पतालों पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग भी नए-नए उपाय खोज रहा है। अब पंजीकृत अस्पतालों में प्रवेश द्वार के सामने ही मोटे अक्षरों में पंजीकरण संख्या, डॉक्टर और स्टॉफ का नाम लिखना होगा। इससे अस्पताल आए मरीज और उनके परिजन वहां की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे।
आईएमए के पदाधिकारी और शहर के प्रबुद्ध लोग भी इससे सहमत हैं। इन प्रमुख लोगों का कहना है कि डॉक्टरी जैसी विशिष्ट पेशे की मर्यादा को बचाए रखने के लिए कुछ विशेष प्रयास करने ही होंगे।
जिले में अवैध नर्सिंग होम के प्रकरण आए दिन सामने आते रहते हैं। यहां तक एंबुलेंस संचालक और किसी अन्य अस्पताल में फार्मासिस्ट रहे लोगों तक के अस्पताल पकड़े गए हैं। इन मामलों में कानूनी कार्रवाई का असर दिख भी रहा है, लेकिन आगे भी ऐसे अवैध अस्पताल खुलने की आशंका बनी ही रहेगी।
विज्ञापन
इस पर रोक के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पंजीकरण और नवीनीकरण के नियमों में सख्ती शुरू की है। इसका असर भी दिख रहा है, लेकिन आम लोगों को भी इसे लेकर जागरूक होना होगा।
बड़ा कष्टकारी अनुभव है, नियम तो बनाना होगा
डीवीएन एलटी कॉलेज की प्राचार्य रहीं प्रो. सुमित्रा सिंह का अस्पताल के साथ अनुभव बड़ा कड़वा है। अस्पतालों के मुद्दे पर कहती हैं कि इनके लिए कुछ तो नियम बनना ही चाहिए। आम आदमी इन्हें भगवान जैसा ही मानता है। लोग बीमारी के वक्त जहां इलाज मिल सकता है, वहां जाते हैं। उस वक्त उनकी मानसिक हालत ऐसी नहीं होती कि डॉक्टर या अस्पताल के बारे में जानकारी जुटा सकें।
खुद का अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि भतीजे को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से डिस्चार्ज कराने के लिए डॉक्टर से जूझना पड़ा। किसी अस्पताल में बैठा डॉक्टर डिग्रीधारी है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी सीधे स्वास्थ्य विभाग की होनी चाहिए। अस्पतालों में डॉक्टर का नाम, डिग्री, इलाज की सुविधा के अलावा फीस का विवरण भी लिखा जाना चाहिए, ताकि मरीज ठगी से बच सकें।
एक्सपर्ट कमेंट
बिना स्वास्थ्य विभाग के मर्जी के एक भी अस्पताल का संचालन नहीं हो सकता। अगर कोई डॉक्टर आईएमए का सदस्य बनता है तो उसके सभी डिग्री के सत्यापन के अलावा उसके साथ पढ़े या उसे जानने वाले कम से कम दो डॉक्टरों से भी सत्यापन कराया जाता है।
इससे किसी प्रकार के शक की गुंजाइश ही नहीं रहती। स्वास्थ्य विभाग को भी इस तरह के नियम बनाने चाहिए, जिससे कि सत्यापन में गड़बड़ी न हो सके। अब अस्पताल या क्लीनिक में कार्यरत डॉक्टर की डिग्री, पढ़ाई करने वाले कॉलेज का नाम, कर्मचारियों की डिग्री का विवरण आदि भी दर्ज किया जाएगा।
इसकी नियमित तौर पर जांच भी जरूरी है, जिससे कि दर्ज नाम वाले ही इलाज करते मिलें। आम आदमी भी विवरण पढ़कर उनके विषय में जानकारी एकत्रित कर सकेगा। मरीज या तीमारदार भी इस बात को लेकर जागरूक रहें कि इलाज करने वाले डॉक्टर व अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं ठीक हैं या नहीं। क्योंकि यह उनके या उनके परिजन की जान का सवाल है: डॉ. आरपी त्रिपाठी, वरिष्ठ सदस्य आईएमए
आईएमए का हमेशा से यह प्रयास है कि केवल वैध अस्पतालों का ही संचालन हो और झोलाछाप पर कड़ाई से अंकुश लगे। संगठन इसकी मांग भी कर चुका है। पंजीकरण के नियमों से व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी, लेकिन यह मरीज और उनके परिजनों की भी जिम्मेदारी है कि जिस अस्पताल या डॉक्टर के पास इलाज के लिए जा रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी करें।
बोर्ड पर लिखे नाम वाला ही डॉक्टर उनका इलाज कर रहा है, यह जानना मरीज का अधिकार है। अब तो हर अस्पताल पर बोर्ड भी लग रहा है, जिससे कि मरीजों को सही जानकारी मिल सके। व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है: डॉ. अमित मिश्रा, सचिव आईएमए
विज्ञापन
आईएमए के पदाधिकारी और शहर के प्रबुद्ध लोग भी इससे सहमत हैं। इन प्रमुख लोगों का कहना है कि डॉक्टरी जैसी विशिष्ट पेशे की मर्यादा को बचाए रखने के लिए कुछ विशेष प्रयास करने ही होंगे।
विज्ञापन
जिले में अवैध नर्सिंग होम के प्रकरण आए दिन सामने आते रहते हैं। यहां तक एंबुलेंस संचालक और किसी अन्य अस्पताल में फार्मासिस्ट रहे लोगों तक के अस्पताल पकड़े गए हैं। इन मामलों में कानूनी कार्रवाई का असर दिख भी रहा है, लेकिन आगे भी ऐसे अवैध अस्पताल खुलने की आशंका बनी ही रहेगी।
विज्ञापन
इस पर रोक के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पंजीकरण और नवीनीकरण के नियमों में सख्ती शुरू की है। इसका असर भी दिख रहा है, लेकिन आम लोगों को भी इसे लेकर जागरूक होना होगा।
बड़ा कष्टकारी अनुभव है, नियम तो बनाना होगा
डीवीएन एलटी कॉलेज की प्राचार्य रहीं प्रो. सुमित्रा सिंह का अस्पताल के साथ अनुभव बड़ा कड़वा है। अस्पतालों के मुद्दे पर कहती हैं कि इनके लिए कुछ तो नियम बनना ही चाहिए। आम आदमी इन्हें भगवान जैसा ही मानता है। लोग बीमारी के वक्त जहां इलाज मिल सकता है, वहां जाते हैं। उस वक्त उनकी मानसिक हालत ऐसी नहीं होती कि डॉक्टर या अस्पताल के बारे में जानकारी जुटा सकें।
खुद का अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि भतीजे को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। वहां से डिस्चार्ज कराने के लिए डॉक्टर से जूझना पड़ा। किसी अस्पताल में बैठा डॉक्टर डिग्रीधारी है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी सीधे स्वास्थ्य विभाग की होनी चाहिए। अस्पतालों में डॉक्टर का नाम, डिग्री, इलाज की सुविधा के अलावा फीस का विवरण भी लिखा जाना चाहिए, ताकि मरीज ठगी से बच सकें।
एक्सपर्ट कमेंट
बिना स्वास्थ्य विभाग के मर्जी के एक भी अस्पताल का संचालन नहीं हो सकता। अगर कोई डॉक्टर आईएमए का सदस्य बनता है तो उसके सभी डिग्री के सत्यापन के अलावा उसके साथ पढ़े या उसे जानने वाले कम से कम दो डॉक्टरों से भी सत्यापन कराया जाता है।
इससे किसी प्रकार के शक की गुंजाइश ही नहीं रहती। स्वास्थ्य विभाग को भी इस तरह के नियम बनाने चाहिए, जिससे कि सत्यापन में गड़बड़ी न हो सके। अब अस्पताल या क्लीनिक में कार्यरत डॉक्टर की डिग्री, पढ़ाई करने वाले कॉलेज का नाम, कर्मचारियों की डिग्री का विवरण आदि भी दर्ज किया जाएगा।
इसकी नियमित तौर पर जांच भी जरूरी है, जिससे कि दर्ज नाम वाले ही इलाज करते मिलें। आम आदमी भी विवरण पढ़कर उनके विषय में जानकारी एकत्रित कर सकेगा। मरीज या तीमारदार भी इस बात को लेकर जागरूक रहें कि इलाज करने वाले डॉक्टर व अस्पताल में उपलब्ध सुविधाएं ठीक हैं या नहीं। क्योंकि यह उनके या उनके परिजन की जान का सवाल है: डॉ. आरपी त्रिपाठी, वरिष्ठ सदस्य आईएमए
आईएमए का हमेशा से यह प्रयास है कि केवल वैध अस्पतालों का ही संचालन हो और झोलाछाप पर कड़ाई से अंकुश लगे। संगठन इसकी मांग भी कर चुका है। पंजीकरण के नियमों से व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी, लेकिन यह मरीज और उनके परिजनों की भी जिम्मेदारी है कि जिस अस्पताल या डॉक्टर के पास इलाज के लिए जा रहे हैं, उसके बारे में पूरी जानकारी करें।
बोर्ड पर लिखे नाम वाला ही डॉक्टर उनका इलाज कर रहा है, यह जानना मरीज का अधिकार है। अब तो हर अस्पताल पर बोर्ड भी लग रहा है, जिससे कि मरीजों को सही जानकारी मिल सके। व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है: डॉ. अमित मिश्रा, सचिव आईएमए