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डीडीयू: खतरे में पड़ी नौकरी तो याद आई डिग्री
Thu, 22 Feb 2024 02:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 22 Feb 2024 02:23 AM IST
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में इन दिनों डिग्री बनाने के लिए दिनभर में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। उसमें अधिकतर बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में इन दिनों शासन के निर्देश पर मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों की शैक्षणिक प्रमाणपत्र का अंकपत्र एवं डिग्री को ऑनलाइन अपलोड करना है। समय सीमा बीतने के बाद डिग्री अपलोड नहीं करने वाले शिक्षकों की कई जिलों में प्रोन्नति रुक गई है तो कई जिलों में उनका वेतन रोक दिया गया है।
वेतन रुकने के बाद अब वे परेशान होकर गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का चक्कर लगा रहे हैं। डिग्री व एनरोलमेंट के लिए शुल्क जमा करने के बाद कई लोगों की डिग्री नहीं बन पा रही है। क्योंकि डिग्री वर्षों पुरानी होने के चलते एनरोलमेंट नंबर नहीं मिल पा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार संबंद्धित कॉलेज से एनरोलमेंट नंबर लाने की बात कहकर टाल-मटोल कर रहे हैं।
हालांकि उनकी परेशानी देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो कर्मचारियों को सिर्फ एनरोलमेंट खोजने के लिए लगा दिया है। लेकिन उनको अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिल पा रहा है। सामान्य परीक्षा के प्रभारी उप कुलसचिव रवि निषाद ने बताया कि मानव संपदा पोर्टल पर अंकपत्र के साथ डिग्री अपलोड करने की अनिवार्यता के बाद इधर बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षक डिग्री लेने पहुंच रहें। उनकी डिग्री काफी वर्ष पुरानी होने पर बनाने में दिक्कत हो रही है।
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केस-1
आजमगढ़ जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात अनिता पांडेय पिछले 15 वर्षों से नौकरी कर रही हैं। डीडीयू के संबद्ध कॉलेज से सत्र 2007-2008 में बीएड करने के बाद बेसिक शिक्षा में शिक्षक पद पर चयन हो गया। चयन के समय उन्होंने केवल बीएड का अंकपत्र ही लगाया था। अब मानव संपदा पोर्टल पर सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र का अंकपत्र एवं डिग्री लगाना है। अब वह बीएड की डिग्री के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज का चक्कर लगा रही हैं।
केस-2
देवरिया के रहने वाले महेश कुमार ने वर्ष 1989 में एक कॉलेज से बीए की पढ़ाई की थी। वर्ष 1994 में वह बेसिक शिक्षा में वह सहायक अध्यापक के पद पर चयन पा गए। लेकिन उस समय नियुक्ति के समय अंकपत्र से ही काम चल गया। अब मानव संपदा पोर्टल पर डिग्री अपलोड नहीं होने से उनका वेतन रुक गया है। अब वह डिग्री के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक उनका एनरोलमेंट नंबर नहीं मिलने से उनका डिग्री नहीं बन पा रहा है।
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं उसके संबद्ध कॉलेज के विद्यार्थियों को पास आउट होते ही अंकपत्र पाने के बाद डिग्री नहीं लेना अब महंगा पड़ जाएगा। डिग्री विलंब से लेने पर उनको अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इसकाे लेकर प्रक्रिया में जुटा है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में आए दिन देखा जा रहा है कि लोग 50 वर्ष पुरानी यानी 1972 की डिग्री लेने पहुंच रहे हैं। उनका एनरोलमेंट नंबर खोजने में काफी मशक्कत करना पड़ रही है। एनरोलमेंट नंबर नहीं मिलने पर उनको विश्वविद्यालय से लगायत कॉलेज तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। काफी पुरानी डिग्री होने पर कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
इसको देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन नई व्यवस्था बनाने जा रहा है। पास आउट होने पर अंकपत्र के साथ डिग्री लेने के लिए आवेदन नहीं करने पर उनसे अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए वर्षवार शुल्क का निर्धारण किया जा रहा है।
वर्जनविश्वविद्यालय एवं संबद्ध कॉलेज के छात्रों को पास आउट होने पर अंकपत्र के साथ ही डिग्री उपलब्ध कराने पर निर्णय लिया जा रहा है। डिग्री लेने में विलंब करने पर शुल्क लेने का प्रावधान किया जा रहा है।
-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू
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वेतन रुकने के बाद अब वे परेशान होकर गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का चक्कर लगा रहे हैं। डिग्री व एनरोलमेंट के लिए शुल्क जमा करने के बाद कई लोगों की डिग्री नहीं बन पा रही है। क्योंकि डिग्री वर्षों पुरानी होने के चलते एनरोलमेंट नंबर नहीं मिल पा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार संबंद्धित कॉलेज से एनरोलमेंट नंबर लाने की बात कहकर टाल-मटोल कर रहे हैं।
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हालांकि उनकी परेशानी देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने दो कर्मचारियों को सिर्फ एनरोलमेंट खोजने के लिए लगा दिया है। लेकिन उनको अपेक्षाकृत परिणाम नहीं मिल पा रहा है। सामान्य परीक्षा के प्रभारी उप कुलसचिव रवि निषाद ने बताया कि मानव संपदा पोर्टल पर अंकपत्र के साथ डिग्री अपलोड करने की अनिवार्यता के बाद इधर बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षक डिग्री लेने पहुंच रहें। उनकी डिग्री काफी वर्ष पुरानी होने पर बनाने में दिक्कत हो रही है।
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केस-1
आजमगढ़ जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात अनिता पांडेय पिछले 15 वर्षों से नौकरी कर रही हैं। डीडीयू के संबद्ध कॉलेज से सत्र 2007-2008 में बीएड करने के बाद बेसिक शिक्षा में शिक्षक पद पर चयन हो गया। चयन के समय उन्होंने केवल बीएड का अंकपत्र ही लगाया था। अब मानव संपदा पोर्टल पर सभी शैक्षणिक प्रमाण पत्र का अंकपत्र एवं डिग्री लगाना है। अब वह बीएड की डिग्री के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज का चक्कर लगा रही हैं।
केस-2
देवरिया के रहने वाले महेश कुमार ने वर्ष 1989 में एक कॉलेज से बीए की पढ़ाई की थी। वर्ष 1994 में वह बेसिक शिक्षा में वह सहायक अध्यापक के पद पर चयन पा गए। लेकिन उस समय नियुक्ति के समय अंकपत्र से ही काम चल गया। अब मानव संपदा पोर्टल पर डिग्री अपलोड नहीं होने से उनका वेतन रुक गया है। अब वह डिग्री के लिए विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक उनका एनरोलमेंट नंबर नहीं मिलने से उनका डिग्री नहीं बन पा रहा है।
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं उसके संबद्ध कॉलेज के विद्यार्थियों को पास आउट होते ही अंकपत्र पाने के बाद डिग्री नहीं लेना अब महंगा पड़ जाएगा। डिग्री विलंब से लेने पर उनको अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन इसकाे लेकर प्रक्रिया में जुटा है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में आए दिन देखा जा रहा है कि लोग 50 वर्ष पुरानी यानी 1972 की डिग्री लेने पहुंच रहे हैं। उनका एनरोलमेंट नंबर खोजने में काफी मशक्कत करना पड़ रही है। एनरोलमेंट नंबर नहीं मिलने पर उनको विश्वविद्यालय से लगायत कॉलेज तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है। काफी पुरानी डिग्री होने पर कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
इसको देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन नई व्यवस्था बनाने जा रहा है। पास आउट होने पर अंकपत्र के साथ डिग्री लेने के लिए आवेदन नहीं करने पर उनसे अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा। इसके लिए वर्षवार शुल्क का निर्धारण किया जा रहा है।
वर्जनविश्वविद्यालय एवं संबद्ध कॉलेज के छात्रों को पास आउट होने पर अंकपत्र के साथ ही डिग्री उपलब्ध कराने पर निर्णय लिया जा रहा है। डिग्री लेने में विलंब करने पर शुल्क लेने का प्रावधान किया जा रहा है।
-प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू