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Gorakhpur News: शहीद गौतम गुरुंग को दी श्रद्धांजलि, माता-पिता व बहन की आंखें हुईं नम
Sun, 06 Aug 2023 01:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Updated Sun, 06 Aug 2023 01:15 AM IST
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गोरखपुर। कारगिल शहीद गोरखा रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट गौतम गुरुंग की 25वीं पुण्यतिथि पर शनिवार को उन्हें याद किया गया। मातमी धुन के बीच कूड़ाघाट तिराहे पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। सबसे पहले शहीद की बहन मीनाक्षी त्यागी ने माल्यार्पण किया। शहीद गौतम गुरुंग को ‘सेना मेडल’ से सम्मानित भी किया जा चुका है।
शहीद के पिता सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग व माता पुष्पलता गुरुंग के साथ 3/4 गोरखा रेजिंमेंट गोरखपुर के जवानों ने भी शहीद को याद करते हुए सलामी दी। पिता ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग ने कहा कि सेना में ब्रिगेडियर और पिता होने के नाते वह हर साल यहां पर आकर बेटे की पुण्यतिथि मनाते हैं। इस दौरान शहीद की बहन मीनाक्षी त्यागी और बहनोई कर्नल रजत त्यागी मेजर, जनरल शिव जसवल, ब्रिगेडियर गोविंद मिश्र, वीर सेनानी कल्याण संस्थान के अध्यक्ष अनिरुद्ध शाही, भारत-नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्त, मीना गुप्ता, भारतीय गोरखा परिसंघ के अध्यक्ष राम सिंह प्रधान ने पुष्प चक्र चढ़ाकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया
भारत-नेपाल मैत्री समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 3/4 गोरखा रेजिमेंट की ओर से मातमी धुन बजाकर शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शहीद ले. गौतम गुरुंग का परिवार तीन पुश्त से भारतीय सेना में रहा है। परिवार के इकलौते बेटे रहे शहीद ले. गौतम गुरुंग को आज भी याद कर उनके पिता और गोरखा रेजिमेंट के जवानों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
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23 वर्ष की उम्र में ही हो गए थे गौतम गुरुंग शहीद
रिटायर्ड ब्रिगेडिर पीएस गुरुंग मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं। उनके परिवार ने भारतीय सेना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वह अब उत्तराखंड के देहरादून में रहते हैं। छह मार्च 1997 को गौतम अपने पिता की बटालियन 3/4 गोरखा राइफल्स में शामिल हुए थे। पहली नियुक्ति जम्मू-कश्मीर सीमा पर हुई थी। इसी बीच वर्ष कारगिल में 1998 में गौतम गुरुंग शहीद हो गए थे। 15 अगस्त 1999 को उन्हें महामहिम राष्ट्रपति केआर नारायणन की ओर से मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया गया था।
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शहीद के पिता सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग व माता पुष्पलता गुरुंग के साथ 3/4 गोरखा रेजिंमेंट गोरखपुर के जवानों ने भी शहीद को याद करते हुए सलामी दी। पिता ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग ने कहा कि सेना में ब्रिगेडियर और पिता होने के नाते वह हर साल यहां पर आकर बेटे की पुण्यतिथि मनाते हैं। इस दौरान शहीद की बहन मीनाक्षी त्यागी और बहनोई कर्नल रजत त्यागी मेजर, जनरल शिव जसवल, ब्रिगेडियर गोविंद मिश्र, वीर सेनानी कल्याण संस्थान के अध्यक्ष अनिरुद्ध शाही, भारत-नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष अनिल कुमार गुप्त, मीना गुप्ता, भारतीय गोरखा परिसंघ के अध्यक्ष राम सिंह प्रधान ने पुष्प चक्र चढ़ाकर शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया
भारत-नेपाल मैत्री समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 3/4 गोरखा रेजिमेंट की ओर से मातमी धुन बजाकर शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। शहीद ले. गौतम गुरुंग का परिवार तीन पुश्त से भारतीय सेना में रहा है। परिवार के इकलौते बेटे रहे शहीद ले. गौतम गुरुंग को आज भी याद कर उनके पिता और गोरखा रेजिमेंट के जवानों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
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23 वर्ष की उम्र में ही हो गए थे गौतम गुरुंग शहीद
रिटायर्ड ब्रिगेडिर पीएस गुरुंग मूल रूप से नेपाल के रहने वाले हैं। उनके परिवार ने भारतीय सेना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। वह अब उत्तराखंड के देहरादून में रहते हैं। छह मार्च 1997 को गौतम अपने पिता की बटालियन 3/4 गोरखा राइफल्स में शामिल हुए थे। पहली नियुक्ति जम्मू-कश्मीर सीमा पर हुई थी। इसी बीच वर्ष कारगिल में 1998 में गौतम गुरुंग शहीद हो गए थे। 15 अगस्त 1999 को उन्हें महामहिम राष्ट्रपति केआर नारायणन की ओर से मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया गया था।