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पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी: भाजपा विधायक और एसएसपी के नाम पर जालसाजी करने वाले छह गिरफ्तार, मथुरा में बैठकर चलाते थे गिरोह
Tue, 03 Aug 2021 09:52 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 03 Aug 2021 09:52 PM IST
सार
सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर मांगे थे रुपये। प्रतिष्ठित लोगों को बनाते थे निशाना। जालसाजों ने गोरखपुर जिले में 80 लाख से अधिक की साइबर ठगी की।
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपी।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के कैंपियरगंज से भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह, एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु और एडवोकेट नीरज शाही का फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर उनके मित्रों से रुपये मांगने वाले छह साइबर अपराधियों को पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके पास से दर्जनों मोबाइल फोन, सिमकार्ड बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक, जालसाजों ने सिर्फ गोरखपुर जिले से 80 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की है। गिरोह में शामिल जालसाजों में दो बाल अपचारी भी हैं। पुलिस अब इनके सभी बैंक खातों के ट्रांजेक्शन खंगाल रही है।
एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने मंगलवार को गिरोह के पकड़े गए सदस्यों के बारे में पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर घटना का पर्दाफाश किया। एसएसपी ने बताया कि ये लोग सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप आदि से लोगों की फोटो, नाम और फेसबुक फ्रैंड लिस्ट को चुराकर फर्जी फेसबुक आईडी, व्हाट्सएप अकाउंट बनाते थे। इसके बाद फेसबुक फ्रेंड से मदद के नाम पर रुपये की मांग कर कई वॉलेट/बैंक खातों में जमा करा लेते थे।
बीते दिनों एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु, भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह और एडवोकेट नीरज शाही जैसे दर्जनों बड़े लोगों का फर्जी अकाउंट बनाकर गिरोह के सदस्य उनके शुभचिंतकों से रुपये की डिमांड कर रहे थे। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस हरकत में आई। गिरोह को पकड़ने के लिए साइबर क्राइम सेल की टीम को लगाया गया। मंगलवार को गिरोह के 6 सदस्यों को साइबर क्राइम सेल व कैंट पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया।
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एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने मंगलवार को गिरोह के पकड़े गए सदस्यों के बारे में पुलिस लाइंस में प्रेस कांफ्रेंस कर घटना का पर्दाफाश किया। एसएसपी ने बताया कि ये लोग सोशल मीडिया फेसबुक, व्हाट्सएप आदि से लोगों की फोटो, नाम और फेसबुक फ्रैंड लिस्ट को चुराकर फर्जी फेसबुक आईडी, व्हाट्सएप अकाउंट बनाते थे। इसके बाद फेसबुक फ्रेंड से मदद के नाम पर रुपये की मांग कर कई वॉलेट/बैंक खातों में जमा करा लेते थे।
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बीते दिनों एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु, भाजपा विधायक फतेह बहादुर सिंह और एडवोकेट नीरज शाही जैसे दर्जनों बड़े लोगों का फर्जी अकाउंट बनाकर गिरोह के सदस्य उनके शुभचिंतकों से रुपये की डिमांड कर रहे थे। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस हरकत में आई। गिरोह को पकड़ने के लिए साइबर क्राइम सेल की टीम को लगाया गया। मंगलवार को गिरोह के 6 सदस्यों को साइबर क्राइम सेल व कैंट पुलिस की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार किया।
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इनकी हुई गिरफ्तारी
आरोपियों की पहचान अंसार खान, साकिर खान, वहीद खान, कासिम खान के रूप में हुई। ये सभी ग्राम मडौरा थाना गोवर्धन जनपद मथुरा के रहने वाले हैं। इसके अलावा इस गैंग में दो अन्य बाल अपचारी भी पकड़े गए हैं। जालसाजों के पास से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन और 8 सिम कार्ड भी बरामद किए हैं।
ऐसे करते थे जालसाजी
अंसार खान के साथ ही पकड़े गए दो अन्य बाल अपचारियों ने पुलिस को बताया कि वे मोबाइल नंबर की सीरीज पकड़कर फेसबुक के लॉगिन पेज पर जाकर यूजर आईडी व पासवर्ड में इंटर करते थे। जिस आईडी का यूजर आईडी और पासवर्ड, मोबाइल नंबर, नाम या मोबाइल नम्बर के 6 अंक होते हैं, उसका फेसबुक लॉगिन करके हैक कर लेते थे। इसके बाद उसी आईडी से उनके फेसबुक फैंड्स से मदद के नाम पर Google pay, Phonepe, Paytm आदि के माध्यम से फर्जी वॉलेट/ बैंक खातों में रुपये की मांग करते थे।
नेता, पुलिस, व्यवसायी निशाने पर
गिरोह के सदस्य नेता, पुलिस, व्यवसायी, प्रतिष्ठित व्यक्तियों की फेसबुक प्रोफाइल सर्च करके उनकी फोटो व नाम एवं फ्रेंड लिस्ट को चुराकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उनके जानने वालों को पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। इसके बाद मदद के नाम पर फर्जी वॉलेट/ बैंक खातों में रुपये की मांग करते थे। नेता, पुलिस, व्यवसायी, प्रतिष्ठित व्यक्तियों की फेसबुक प्रोफाइल पर सर्च करके उनकी फोटो व नाम एवं कमेंट बाक्स, फ्रेंड लिस्ट आदि में से उनके दोस्तों के मोबाइल नंबर जान जाते थे। इसके बाद प्रोफाइल में फोटो व नाम को चुराकर व्हाट्सएप के डीपी पर उनकी फोटो लगाकर उनके दोस्तों से व्हाट्सएप चैटिंग कर मदद के नाम पर रुपये मांगते थे। इतना ही नहीं, ये सदस्य विभिन्न कम्पनियों में जॉब दिलाने, लाटरी आदि के नाम पर भी लोगों से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड, ओटीपी प्राप्त कर फर्जी डिजिटल अकाउंट खोलकर उसमें रुपये जमा कराते थे।
ऐसे करते थे जालसाजी
अंसार खान के साथ ही पकड़े गए दो अन्य बाल अपचारियों ने पुलिस को बताया कि वे मोबाइल नंबर की सीरीज पकड़कर फेसबुक के लॉगिन पेज पर जाकर यूजर आईडी व पासवर्ड में इंटर करते थे। जिस आईडी का यूजर आईडी और पासवर्ड, मोबाइल नंबर, नाम या मोबाइल नम्बर के 6 अंक होते हैं, उसका फेसबुक लॉगिन करके हैक कर लेते थे। इसके बाद उसी आईडी से उनके फेसबुक फैंड्स से मदद के नाम पर Google pay, Phonepe, Paytm आदि के माध्यम से फर्जी वॉलेट/ बैंक खातों में रुपये की मांग करते थे।
नेता, पुलिस, व्यवसायी निशाने पर
गिरोह के सदस्य नेता, पुलिस, व्यवसायी, प्रतिष्ठित व्यक्तियों की फेसबुक प्रोफाइल सर्च करके उनकी फोटो व नाम एवं फ्रेंड लिस्ट को चुराकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उनके जानने वालों को पहले फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते थे। इसके बाद मदद के नाम पर फर्जी वॉलेट/ बैंक खातों में रुपये की मांग करते थे। नेता, पुलिस, व्यवसायी, प्रतिष्ठित व्यक्तियों की फेसबुक प्रोफाइल पर सर्च करके उनकी फोटो व नाम एवं कमेंट बाक्स, फ्रेंड लिस्ट आदि में से उनके दोस्तों के मोबाइल नंबर जान जाते थे। इसके बाद प्रोफाइल में फोटो व नाम को चुराकर व्हाट्सएप के डीपी पर उनकी फोटो लगाकर उनके दोस्तों से व्हाट्सएप चैटिंग कर मदद के नाम पर रुपये मांगते थे। इतना ही नहीं, ये सदस्य विभिन्न कम्पनियों में जॉब दिलाने, लाटरी आदि के नाम पर भी लोगों से उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड, ओटीपी प्राप्त कर फर्जी डिजिटल अकाउंट खोलकर उसमें रुपये जमा कराते थे।
सभी का तय था कमीशन
पकड़े गए आरोपी साकिर खान ने पूछताछ में बताया कि वह एक बाल अपचारी की मदद से फेसबुक आईडी हैक कर रुपये मांगने वालों को फर्जी खाता उपलब्ध कराता था। इसके बाद फर्जी खातों में आए रुपयों को निकालकर 80 प्रतिशत फेसबुक आईडी हैक करने वाले (अंसार आदि) को और 15 प्रतिशत बाल अपचारी और 5 प्रतिशत कमीशन खुद रख लेता था।
कई राज्यों से सिम लाकर करते थे ब्लैक
वहीद खान और कासिम खान ट्रक लेकर यूपी, एमपी, बिहार, झारखंड, पं. बंगाल, असम, दिल्ली आदि प्रदेशों में आते-जाते थे। ये वहीं से फर्जी सिम लाते थे। प्रति सिम का 500 रुपये लेते थे। ये लोग फेरी के बहाने आसपास के गांवाें में फेसबुक आईडी/ व्हाट्सएप आदि माध्यम से फर्जी तरीके से रुपये जमा कराने वाले गिरोह को एक हजार रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेच देते थे।
पुलिस ने यह सावधानी बरतने की अपील की
कई राज्यों से सिम लाकर करते थे ब्लैक
वहीद खान और कासिम खान ट्रक लेकर यूपी, एमपी, बिहार, झारखंड, पं. बंगाल, असम, दिल्ली आदि प्रदेशों में आते-जाते थे। ये वहीं से फर्जी सिम लाते थे। प्रति सिम का 500 रुपये लेते थे। ये लोग फेरी के बहाने आसपास के गांवाें में फेसबुक आईडी/ व्हाट्सएप आदि माध्यम से फर्जी तरीके से रुपये जमा कराने वाले गिरोह को एक हजार रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेच देते थे।
पुलिस ने यह सावधानी बरतने की अपील की
- अपना यूजर आईडी एवं पासवर्ड किसी से शेयर न करें।
- सोशल नेटवर्किंग साइट्स का पासवर्ड मोबाइल नंबर, नाम, जन्मतिथि आदि न रखें।
- पासवर्ड हमेशा कठिन रखें और पासवर्ड में अल्फावेट, न्यूमैरिक, स्पेशल करेक्टर आदि का प्रयोग अवश्य करें।
- सत्यापन के दो विकल्पों का प्रयोग करें
- अनजान व्यक्तियों की दोस्ती के अनुरोध को स्वीकार करने में सावधानी बरतें।
- फेसबुक पर प्रोफाइल लॉक कर रखें।
- सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक /इंस्टाग्राम आदि के माध्यम से यदि आपके परिचित द्वारा मैसेज करके रुपये की मांग की जाए तो उनसे फोन से संपर्क करने के उपरांत ही लेन-देन करें।
- अपनी निजी जानकारियां व फोटो पोस्ट करने में सावधानी बरतें।
- किसी भी अवांछनीय लिंक /मैसेज पर क्लिक करने से बचें।
- आधार कार्ड, पैन कार्ड, डीएल, बायोडाटा, ओटीपी आदि व्हाट्सएप, फेसबुक, मैसेंजर, इंस्टाग्राम, ट्वीटर आदि सोशल साइट्स पर शेयर करने व किसी अंजान व्यक्ति को नौकरी/ लाटरी आदि के नाम पर शेयर न करें।