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नाबालिक से दुष्कर्म, नवजात की हत्या कर फरार था विभाष्म, अब पहुंचा सलाखों के पीछे
Wed, 26 Feb 2020 01:10 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 26 Feb 2020 01:10 PM IST
सार
- पीपीगंज में दुष्कर्म कर नाबालिग को मां बनाने, नवजात की हत्या का मामला
- जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दुष्कर्म आरोपित विभाष्म
- एक दिन पहले दी थी अर्जी, कोर्ट में किया आत्मसमर्पण
- नाबालिग मां की पुलिस कस्टडी बढ़ाई गई, मेडिकल जांच के लिए कोर्ट से मिली अनुमति
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नाबालिक से दुष्कर्म व पैदाइश छुपाने के लिए नवजात की हत्या का आरोपी है विभाष्म सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पीपीगंज इलाके में दुष्कर्म कर नाबालिग को मां बनाने और नवजात की हत्या करने के आरोपित विभाष्म सिंह ने मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद विभाष्म को जेल भेज दिया गया। विभाष्म ने एक दिन पहले ही आत्मसमर्पण की अर्जी थी। इसकी जानकारी पुलिस को भी थी। पुलिस दिनभर कोर्ट के जाल बिछाए ऊंघती रही और इसी बीच दुष्कर्म आरोपित ने आत्मसमर्पण कर दिया।
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जानकारी के मुताबिक, लगातार दबिश दे रही पुलिस के दबाव को देखते हुए आरोपित ने कोर्ट में आत्मसमर्पण के लिए अर्जी दी थी। पीपीगंज इलाके में नाबालिग से दुष्कर्म कर उसे मां बनाने और नवजात की हत्या में आरोपित विभाष्म सिंह के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज है। एसपी जेल डॉ. रामधनी ने बताया कि विभाष्म को सात दिन तक मिलेनियम बैरक में रखा जाएगा, फिर उसे दूसरे बैरक में शिफ्ट किया जाएगा।
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नाबालिग मां की पुलिस कस्टडी बढ़ी, मेडिकल जांच के लिए कोर्ट से मिली अनुमति
बालिका संरक्षण गृह में रखी गई नाबालिग मां की मेडिकल जांच के लिए कोर्ट से अनुमति मिल गई है। प्रसव की जांच के लिए तीन दिन का समय मांगा गया है। बुधवार से तीन दिन की प्रक्रिया में मेडिकल टेस्ट होगा, जिसके बाद फिर कोर्ट में बयान दर्ज कराया जाएगा।
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यह है पूरा मामला
नाबालिग मां के प्रसव के मेडिकल जांच के लिए पुलिस की ओर से दी गई अर्जी को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अनुमति दे दी है। एसओ कैंपियरगंज निर्भय नारायण सिंह ने बताया कि रिमांड बढ़ाई गई है। बुधवार से तीन दिन में मेडिकल की प्रक्रिया कराने के बाद कोर्ट में नाबालिग मां का मजिस्ट्रेेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत कलमबंद बयान दर्ज कराया जाएगा।
31 जनवरी को पीपीगंज इलाके के एक गांव में नवजात बच्ची की हत्या कर फेंका गया शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चार फरवरी को पीपीगंज के थानेदार राज प्रकाश सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर तहकीकात शुरू की गई। बाद में जांच कैंपियरगंज एसओ निर्भय नारायण सिंह के हवाले कर दी गई थी। इस मामले में शुरू से ही पुलिस टालमटोल कर रही थी।
जब अमर उजाला ने प्रमुखता से लगातार इस संबंध में खबरें प्रकाशित करनी शुरू कीं तो डीआईजी राजेश डी मोदक और एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई का आदेश दिया। उसके बाद सक्रिय हुई पुलिस ने लापता किशोरी को खोज निकाला। उसके सामने आते ही पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।
31 जनवरी को पीपीगंज इलाके के एक गांव में नवजात बच्ची की हत्या कर फेंका गया शव मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद चार फरवरी को पीपीगंज के थानेदार राज प्रकाश सिंह की तहरीर पर केस दर्ज कर तहकीकात शुरू की गई। बाद में जांच कैंपियरगंज एसओ निर्भय नारायण सिंह के हवाले कर दी गई थी। इस मामले में शुरू से ही पुलिस टालमटोल कर रही थी।
जब अमर उजाला ने प्रमुखता से लगातार इस संबंध में खबरें प्रकाशित करनी शुरू कीं तो डीआईजी राजेश डी मोदक और एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई का आदेश दिया। उसके बाद सक्रिय हुई पुलिस ने लापता किशोरी को खोज निकाला। उसके सामने आते ही पूरा मामला खुलकर सामने आ गया।