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गोरखपुर: एम्स में कैंटीन व दवा की दुकान दिलाने के नाम पर 34 लाख हड़पे, गोरखनाथ मंदिर के सचिव का रिश्तेदार बनकर की जालसाजी

Fri, 10 Dec 2021 01:53 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 10 Dec 2021 01:53 PM IST
सार

जालसाजों ने खुद को गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी व एम्स की निदेशक का रिश्तेदार बताकर अपने जाल में फंसाया। पीड़ित की शिकायत के बाद एसएसपी के आदेश पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस छानबीन में जुटी है।

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34 lakhs grabbed in name of getting canteen and medicine shop in Gorakhpur AIIMS
AIIMS Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले के बेलीपार निवासी महेंद्र नाथ गुप्ता ने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) में कैंटीन और दवा की दुकान पाने की लालच में 34 लाख रुपये गंवा दिए। वे जालसाजी के शिकार हो गए। आरोप है कि जालसाज राजीव तिवारी व उनकी पत्नी शिप्रा तिवारी ने खुद को गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी व एम्स की निदेशक का रिश्तेदार बताया। पीड़ित ने एसएसपी से कार्रवाई की गुहार लगाई। एसएसपी के आदेश पर कैंट पुलिस केस दर्ज करके छानबीन शुरू कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक महेंद्र नाथ गुप्ता ने शिकायती अर्जी में लिखा है कि चिलुआताल के गायत्रीपुरम निवासी राजीव तिवारी से मुलाकात हुई थी। राजीव ने खुद को प्रशासनिक अधिकारी बताया और कहा कि जल्द ही वह नगर आयुक्त बनकर आने वाला है। इस बीच राजीव से कई बार मुलाकात भी हुई। राजीव ने खुद को एम्स के निदेशक का साढ़ू भी बताया था। साथ ही कैंटीन, दवा की दुकान और पार्किंग दिलवाने का भरोसा दिलाया। उसकी पत्नी शिप्रा ने भी झांसा दिया। इसमें फंसकर उन्होंने बैंक खाते में 34 लाख रुपये भेज दिए। नवंबर 2019 में रुपये दिए थे, लेकिन कोई काम नहीं हुआ तो राजीव से रुपये वापस मांगे गए। दबाव डाला गया तो उसने चेक दिया जो बाउंस हो गया। अब एसएसपी डॉ. विपिन ताडा के निर्देश पर आरोपित राजीव तिवारी और उसकी पत्नी शिप्रा तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कर किया गया है।
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एम्स निदेशक सुरेखा किशोर ने बताया कि एम्स की सारी प्रक्रिया पारदर्शी व निष्पक्ष होती है। किसी तरह के लेनदेन नहीं होते हैं। इसकी जानकारी सबको दी जा चुकी है। एम्स के बाहर भी जालसाजों से सावधान रहने के बोर्ड लगवाए गए हैं। इसके बावजूद लोग चंगुल में फंस जा रहे हैं। कोई किसी का रिश्तेदार बताकर कुछ मांगें तो कतई भरोसा नहीं करना चाहिए। एक बार संबंधित से बात कर लेनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। अगर किसी को अपना पैसा गंवाने का शौक है तो क्या किया जा सकता है।
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इससे पहले भी दर्ज हो चुका है जालसाजी का मुकदमा

एम्स में नौकरी (आउटसोर्सिंग) दिलाने के नाम पर खोराबार थाने में कुछ दिन पहले जालसाजी का मुकदमा दर्ज हुआ था। दरगहिया की सरिता ने तहरीर देकर शिकायत की थी कि खोराबार की मीरा ने उसके अलावा 70 बेरोजगार युवा व महिलाओं से 30 लाख रुपये की ठगी की।  खुद को एम्स की कर्मचारी बताकर और एम्स के ही दो कर्मचारियों का नाम लेकर झांसा दिया था। सभी से रुपये लेने के बाद 16 नवंबर को जॉइनिंग के लिए एम्स बुलाया था। उसके बाद से ही मीरा का फोन बंद है और उसका पता नहीं चल रहा। इधर, तहरीर के आधार पर खोराबार थाने में मीरा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। थानाध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया कि दर्ज मुकदमें के साक्ष्यों का संकलन किया जा रहा है। गिरफ्तारी के लिए टीम बना दी गई है। किस किस खाते से उक्त आरोपी के बैंक खाते में कितने रुपये दिए गए थे, सब जांच करवाई जा रही है।
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