खुशखबर: डेल्टा वैरिएंट पर असरदार है कोविशील्ड और कोवाक्सिन, 90 प्रतिशत लोगों में बन रही एंटीबॉडी
म्यूटेशन साउथ अफ्रीका के बीटा स्वरूप में मिला था। इसलिए यह बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
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कोरोना वायरस के नये डेल्टा वैरिएंट ने पूरे देश में खूब तबाही मचाई है। इन सबके बीच राहत भरी खबर यह है कि डेल्टा वैरिएंट पर कोविशील्ड और कोवाक्सिन दोनों ही असरदार है। रिजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि डेल्टा वैरिएंट पर दोनों वैक्सीन असरदार है।
ऐसे में इस वैरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है। वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को डेल्टा वैरिएंट से खतरा कम है। इसलिए वैक्सीन जरूर लगवाएं। बताया कि वैक्सीन लगवाने वाले 90 प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडी बन रही है। ऐसे में इस वैरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है।
वैरिएंट पर चल रहा है शोध
डॉ. अशोक पांडेय ने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट पर दुनिया भर में शोध होने शुरू हो गए हैं। लेकिन अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। बताया कि यह जानकारी मिली है कि यह वैरिएंट एंटीबॉडी को चकमा देने में माहिर है। इसमें के417 एन नामक स्पाइक प्रोटीन का म्यूटेशन है। यह म्यूटेशन साउथ अफ्रीका के बीटा स्वरूप में मिला था। इसलिए यह बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
किस वैरिएंट ने मचाई तबाही, जीनोम सीक्वेसिंग से पता चलेगा
बताया कि इस वैरिएंट पर वैक्सीन कितना कारगर है, इस पर शोध होना बाकी है। बताया कि गोरखपुर मंडल के कुशीनगर और महराजगंज जिले से जीनोम सीक्वेसिंग के लिए सैंपल भेजे गए हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि पांचवीं बार 15 लोगों के सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बॉयोलॉजी (आईजीआईबी) भेजे गए हैं। बताया कि नमूनों की जांच के बाद ही यह जानकारी मिल पाएगी कि गोरखपुर में किस वैरिएंट ने तबाही मचाई है। बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट बेहद खतरनाक है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक यह कोरोना वायरस का म्यूटेशन वर्जन है। जांच के बाद ही सही वैरिएंट की जानकारी मिल पाएगी।