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कोरोना का असर: बीमा कराने वालों की संख्या बढ़ी, खर्चे में की कटौती
Fri, 28 May 2021 02:06 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 28 May 2021 02:06 PM IST
सार
संक्रमण के साथ बढ़ी पॉलिसी लेने वालों की संख्या तो एटीएम से रुपये निकाले गए कम।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की वजह से जहां लोगों ने अपने परिवार के हित के लिए बीमा कराने में तेजी दिखाई तो वहीं कुछ लोगों ने खर्च में भारी कटौती की है। इसकी तस्दीक अप्रैल और मई में एटीएम से निकाले गए कम रुपये कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल और मई में ही 18 हजार नई पॉलिसी कराई गईं हैं। वहीं, बैंकों के एटीएम से मार्च की अपेक्षा अप्रैल व मई में बहुत कम रुपये निकाले गए हैं।
भारतीय जीवन बीमा निगम से पॉलिसी लेने वालों की संख्या में हुआ इजाफा
कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ी तो लोगों ने अपने परिवार के हित के लिए बीमा कराने को प्राथमिकता दी। टर्म इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या में भी अच्छा खासा इजाफा रहा। आनलाइन तीन करोड़ रुपये के टर्म इंश्योरेंस बिक गए।
अप्रैल व मई के मात्र दो महीने में ही गोरखपुर मंडल में भारतीय जीवन बीमा निगम की 18 हजार पालिसी बिक गई। शुरुआती माह अप्रैल में सिर्फ 10 हजार पालिसी लोगों द्वारा ली गई। एलआइसी ने अपने डिजिटल मार्केटिंग के तहत इस वित्तीय वर्ष में एक-एक करोड़ की तीन टर्म इन्श्यारेंस पालिसी बेच डाली।
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पिछले वर्ष आनलाइन 42 टर्म इंश्यारेंस पालिसी लोगों द्वारा ली गई थी। जिन प्रमुख पालिसियों के प्रति लोगों ने रुचि दिखाई है उनमें न्यू इंडाउमेंट, जीवन लाभ, जीवन लक्ष्य, जीवन आनंद, शिला स्तंभ शामिल हैं। इसके अलावा पेंशन, यूलिप एवं स्वास्थ्य बीमा पालिसियां भी बिकी हैं।
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भारतीय जीवन बीमा निगम से पॉलिसी लेने वालों की संख्या में हुआ इजाफा
कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ी तो लोगों ने अपने परिवार के हित के लिए बीमा कराने को प्राथमिकता दी। टर्म इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या में भी अच्छा खासा इजाफा रहा। आनलाइन तीन करोड़ रुपये के टर्म इंश्योरेंस बिक गए।
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अप्रैल व मई के मात्र दो महीने में ही गोरखपुर मंडल में भारतीय जीवन बीमा निगम की 18 हजार पालिसी बिक गई। शुरुआती माह अप्रैल में सिर्फ 10 हजार पालिसी लोगों द्वारा ली गई। एलआइसी ने अपने डिजिटल मार्केटिंग के तहत इस वित्तीय वर्ष में एक-एक करोड़ की तीन टर्म इन्श्यारेंस पालिसी बेच डाली।
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पिछले वर्ष आनलाइन 42 टर्म इंश्यारेंस पालिसी लोगों द्वारा ली गई थी। जिन प्रमुख पालिसियों के प्रति लोगों ने रुचि दिखाई है उनमें न्यू इंडाउमेंट, जीवन लाभ, जीवन लक्ष्य, जीवन आनंद, शिला स्तंभ शामिल हैं। इसके अलावा पेंशन, यूलिप एवं स्वास्थ्य बीमा पालिसियां भी बिकी हैं।
मार्च की तुलना में मई में लोगों ने खर्च किया आधा
एलआइसी के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक प्रेमेंद्र हरि ने बताया कि कोरोनाकाल में अधिकांश लोगों ने बीमा कराने के प्रति अपनी रुचि दिखाई है। चूंकि अभिकर्ता बीमाधारकों से संपर्क कर आनंदा ऐप के जरिए घर बैठे बीमा की सुविधा प्रदान कर दे रहे हैं। इसलिए और अधिक लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। पहले की तरह उन्हें एलआइसी कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा है।
लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू काल के दौरान लोगों के खर्चे भी कम कर दिए हैं। मार्च में जहां भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम से तकरीबन 800 करोड़ रुपये की निकासी हुई, वहीं मई में यह राशि घटकर मात्र 380 करोड़ रुपये ही रह गई। अगर जनवरी से मई तक एटीएम से निकाली गई रकम की बात करें तो जनवरी से इसमें क्रमवार बढ़ोतरी होती गई और मार्च तक तकरीबन 800 करोड़ पहुंच गया। फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने और लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू शुरू होने के बाद इसमें धीरे-धीरे कमी आ गई, जबकि इन दोनों महीने शादियों का सीजन होने की वजह से ज्यादा खर्च होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल और मई में रोजमर्रा की खरीदारों की तुलना में लोगों को खर्च इलाज में ही ज्यादा हुआ है।
यह रही एटीएम से निकासी की रकम
माह रकम (करोड़ में)
जनवरी 534
फरवरी 666
मार्च 799
अप्रैल 571
मई 380
लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू काल के दौरान लोगों के खर्चे भी कम कर दिए हैं। मार्च में जहां भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम से तकरीबन 800 करोड़ रुपये की निकासी हुई, वहीं मई में यह राशि घटकर मात्र 380 करोड़ रुपये ही रह गई। अगर जनवरी से मई तक एटीएम से निकाली गई रकम की बात करें तो जनवरी से इसमें क्रमवार बढ़ोतरी होती गई और मार्च तक तकरीबन 800 करोड़ पहुंच गया। फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने और लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू शुरू होने के बाद इसमें धीरे-धीरे कमी आ गई, जबकि इन दोनों महीने शादियों का सीजन होने की वजह से ज्यादा खर्च होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अप्रैल और मई में रोजमर्रा की खरीदारों की तुलना में लोगों को खर्च इलाज में ही ज्यादा हुआ है।
यह रही एटीएम से निकासी की रकम
माह रकम (करोड़ में)
जनवरी 534
फरवरी 666
मार्च 799
अप्रैल 571
मई 380