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UP: ये शहर शराबी नहीं, 'पड़ोसी' की आमद से चमक रहे मयखाने; चार साल में करीब चार लाख बढ़ी कुशीनगर की आबादी

Mon, 19 Feb 2024 05:29 PM IST
शाहरुख खान शरद पाण्डेय, गोरखपुर।
शरद पाण्डेय, गोरखपुर। Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 19 Feb 2024 05:29 PM IST
सार

 English liquor Shop, liquor shop: चार वर्षों में कुशीनगर में अंग्रेजी शराब की मांग 27 लाख बोतल तक बढ़ गई तो वहीं देवरिया में यह बढ़त करीब साढ़े 12 लाख बोतल तक ही है। इसी तरह कुशीनगर में बियर की मांग में 70 लाख केन का इजाफा हुआ है तो देवरिया में 37 लाख केन की मांग बढ़ी है।

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Consumption of English liquor increased by 64 percent in Kushinagar
English liquor - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कुशीनगर में मयखानों की चमक बढ़ती जा रही है। बीते चार वर्षों में जिले की आबादी तो बमुश्किल 10 फीसदी बढ़ी लेकिन अंग्रेजी शराब की खपत 64 फीसदी तक बढ़ गई। वहीं, बियर की मांग में डेढ़ सौ फीसदी का उछाल आ चुका है। दरअसल, बिहार में शराब पर पाबंदी की वजह से सीमावर्ती जिले में शौकीनों की आमदरफ्त बढ़ गई और शराब की बिक्री साल-दर-साल नए रिकॉर्ड बना रही है। 
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सरकारी विभागों के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। बुद्धनगरी कुशीनगर का बड़ा हिस्सा बिहार के पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज जिले से जुड़ा है। दवा-इलाज और खरीदारी की जरूरतों के साथ इस पार से उस पार तक लोगों की रिश्तेदारियां भी हैं इसलिए आना-जाना रहा है। 
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बिहार में शराब पर पाबंदी के बाद हाईवे के अलावा गांव-कस्बों की पगडंडियों के रास्ते शराब की तस्करी तो बढ़ी ही, शराब के शौकीन तलब पूरी करने के लिए सीमा पार तक पहुंचने लगे हैं। इसी का नतीजा है कि सीमाई इलाकों में शराब के अड्डे बढ़ते गए और लाइसेंसी दुकानों से भी शराब बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है।
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पड़ोसी जिले देवरिया के लार, बनकटा और खामपार क्षेत्र बिहार के सीवान से जुड़ते हैं, भटनी और बरियारपुर से गोपालगंज जुड़ता है। जानकारों के मुताबिक लार के रास्ते रामजानकी मार्ग से भी बिहार जुड़ता है। सीमा पार बिहार जाने के लिए अन्य रास्ते गांव-गिराव की टूटी सड़कों और पगडंडियों वाले ही हैं। शायद यही वजह है कि देवरिया के रास्ते बिहार तक तस्करों की पैठ ज्यादा आसान है और यहां शराब की लाइसेंसी दुकानों से शराब की बिक्री में बढ़ोत्तरी औसत ही रह गई है।

देवरिया में दुकानें ज्यादा फिर भी बिक्री कम
चार वर्षों में कुशीनगर में अंग्रेजी शराब की मांग 27 लाख बोतल तक बढ़ गई तो वहीं देवरिया में यह बढ़त करीब साढ़े 12 लाख बोतल तक ही है। इसी तरह कुशीनगर में बियर की मांग में 70 लाख केन का इजाफा हुआ है तो देवरिया में 37 लाख केन की मांग बढ़ी है। ऐसी स्थिति तब है जबकि देवरिया में कुशीनगर के मुकाबले अंग्रजी शराब और बियर दोनों की दुकानें ज्यादा हैं।

 

युवाओं के बहके कदम, बियर की बढ़ती गई मांग
बुद्धनगरी में यूं तो देसी और अंग्रेजी शराब की बिक्री साल-दर-साल नए रिकॉर्ड बना रही है लेकिन युवाओं की पसंद मानी जाने वाली बियर की बिक्री ने इन्हें पीछे छोड़ दिया है। साल 2020-21 में बियर की बिक्री जहां करीब 42 लाख केन की थी वहीं अगले ही साल 2021 में 75 लाख केन की बिक्री हुई। पिछले साल यह आंकड़ा एक करोड़ केन पर पहुंच गया और इस साल आबकारी विभाग को करीब एक करोड़ 15 लाख केन बियर की बिक्री की उम्मीद है।

 

देसी की दुकानें बढ़ीं पर मेहमानों को शौक नहीं
बिहार से अंग्रेजी शराब और बियर के ही ज्यादातर तलबगार सीमा पार आते हैं, शायद यही वजह है कि बीते चार वर्षों में कुशीनगर में देसी शराब की 10 दुकानें बढ़ गईं लेकिन बिक्री में इजाफा महज 28 फीसदी है। अंग्रेजी शराब की बिक्री में 63 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई जबकि बियर की बिक्री 153 प्रतिशत बढ़ गई है। इनमें अंग्रेजी की दो और बियर की तीन दुकानें बढ़ी हैं। देसी शराब से सरकार की आय में 49 प्रतिशत की बढ़त हुई है तो अंग्रेजी शराब से मिलने वाले राजस्व में 92 फीसदी का उछाल आया है।
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