इस साल दिवाली पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का जलवा रहेगा। जिले से लगायत सीएम सिटी तक इनके उत्पादों की झलक दिखेगी। महिलाओं के बनाए दीये, झूमर, झालर की मांग खूब हो रही है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
यूपी के इस जिले के दीयों से रोशन होगा सीएम योगी का शहर, तीन सौ महिलाएं कर रही हैं काम
गोरखपुर एम्स की निदेशक सुलेखा किशोर ने सात हजार तो गीता प्रेस के मोहन उपाध्याय ने दो हजार गोबर के बने दीये की मांग एक माह पहले से की है। संघ प्रचारक यशोदानंदन ने मां अंबे स्वयं सहायता समूह बरवामीर छापर देसही देवरिया को पांच हजार दीये की डिमांड भेजी है।
अपने उत्पादों की लोकप्रियता देख समूह की महिलाएं बेहद उत्साहित हैं। दीवाली के बाजार पर पकड़ मजबूत करने के लिए वह नई-नई तरकीब अपना रही हैं। कुछ समूह झालर-झूमर बना रहे तो कुछ मोमबत्ती वाला मटका तैयार कर रहे हैं। चायनीज मॉडल की लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं गांव-गांव में तैयार हो रही हैं।
वीएस एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से महिलाएं एलईडी लगाकर मूर्तियों को आकर्षक बना रही हैं। इन सब से इतर गाय के गोबर से निर्मित दीये, ओम, स्वस्तिक, श्री की आकृतियां लोगों को खूब भा रही हैं। इसकी मांग गोरखपुर, पड़रौना, महराजगंज, कुशीनगर तक हो रही है।
डूडा और एनआरएलएम की ओर से गठित एसएचजी का कारोबार इस साल दीवाली पर 50 लाख तक हो सकता है। दोनों ही विभाग त्योहार के मद्देनजर समूह की महिलाओं को प्रोत्साहित करने में जुटे हैं। सीएलएफ सीमा जायसवाल की देखरेख में शहर के दस समूह की महिलाएं दिवाली के लिए उत्पाद तैयार कर रहे हैँ। ग्रामीण के करीब 30 समूह अलग-अलग उत्पाद बनाने में जुटे हैं।
झालर-झूमर 65 महिला, गोबर का दीया, मोमबत्ती वाला मटका बनाने में 40, लक्ष्मी गणेश प्रतिमा के लिए 35, एलईडी लाईट के काम में 30, मिठाई नारियल, लड्डू, रामदाना, गुड़ का लड्डू, तिल का लड्डू, छेना मिठाई व गुलाब जामुन बनाने के काम में 70 ग्रामीण समूह की महिलाएं जुटी हैं। इसके अलावा शहर के दस समूह की महिलाएं भी दिवाली पर विभिन्न प्रकार की सामग्री तैयार कर रही हैं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व डीसी एनआरएलएम सुमित कुमार यादव ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाएं दो माह से दिवाली के लिए उत्पाद तैयार करने में जुटी हैं। एनआरएलएम के कर्मचारी समूहों का मार्गदर्शन कर बाजार की नई तरकीब से अवगत करा रहे हैँ। इस साल दिवाली पर अच्छे कारोबार की उम्मीद है।