एबीवीपी का 70वां राष्ट्रीय अधिवेशन: CM योगी ने कहा- राष्ट्र सोच के लोग तकनीक से जुड़ देश को करें मजबूत
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन में बतौर मुख्य अतिथि सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि युवा सोच और तकनीकी दोनों देश के मजबूत कर सकता है। कार्यक्रम के बाद सीएम योगी सीधे गोरखनाथ मंदिर पहुंच अपने गुरु गोरक्षनाथ के दर्शन किए, इसके बाद ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की समाधि पर माथा टेक उनका आशीर्वाद लिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ज्ञानवान और शीलवान बनने के साथ विज्ञान-तकनीकी के अनुकूल होकर समय के प्रवाह की गति को समझना अपरिहार्य है। यदि हम समय के प्रवाह की गति को समझने में चूक गए तो समय का यह प्रवाह दुर्गति कर देगा। समय के प्रवाह की दुर्गति से बचने के लिए जरूरी है कि हम विज्ञान और तकनीकी से भागें नहीं, बल्कि इसके सापेक्ष खुद को तैयार करें।
सीएम योगी रविवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के तीन दिवसीय 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन के समापन दिवस पर एक विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने ट्रेनिंग एंड एजुकेशनल सेंटर फॉर हियरिंग इम्पेयर्ड (टीच) ठाणे, मुंबई के सह संस्थापक दीपेश नायर को प्रोफेसर यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार से सम्मानित किया।
\
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित अधिवेशन में मुख्यमंत्री ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सूत्र वाक्य ज्ञान, शील, एकता का उल्लेख करते हुए कहा जाता ज्ञानवान बनने के लिए दुनिया में भारत से बड़ा आग्रही कोई और देश नहीं है।
गीता में भी कहा गया है, ‘न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते’ अर्थात ज्ञान के समान पवित्र करनेवाला, शुद्ध करनेवाला इस लोक में दूसरा कोई नहीं है। ज्ञानवान होने के लिए यहां ज्ञानवाहक ऋषि परंपरा का सम्मान रहा है।
सीएम योगी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि काल का प्रवाह किसी का इंतजार नहीं करता है। किसी की भी परवाह किए बगैर कालचक्र चलता रहता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम विज्ञान तकनीकी से भागेंगे तो समय के साथ नहीं चल पाएंगे। मुख्यमंत्री ने नब्बे के दशक में कम्प्यूटरीकरण को लेकर हुए विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि तब कम्प्यूटरीकरण का विरोध हो रहा था और आज उससे भी आगे ई ऑफिस का दौर आ गया।
पूरी दुनिया एक स्मार्टफोन में आ चुकी है। समय के साथ टेक्नोलॉजी बढ़ती गई। बिजली, टेलीफोन, टेलीविजन, हवाई जहाज, माइक्रोवेव, इंटरनेट, जीपीएस, सोशल मीडिया जैसी तकनीकी विरोध झेलकर आगे बढ़ती गई। इनमें से एक भी तकनीकी ऐसी नहीं है जो आज दैनिक जीवन का हिस्सा न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज और राष्ट्र के प्रति कल्याणकारी सोच का युवा विज्ञान और तकनीकी से जुड़ेगा तो स्वयं को समाज और राष्ट्र को मजबूत बनाएगा। उन्होंने युवाओं को मंत्र दिया कि हमें तामसिक मानसिकता का शिकार नहीं बनना है लेकिन खुद की प्रासंगिकता को बनाए रखते हुए तकनीकी से जुड़कर आगे बढ़ते रहना है।
सीएम ने कहा कि तकनीकी जब अच्छे लोगों के हाथ में होती है तब वह लोक और राष्ट्र कल्याण का माध्यम बनती है। पर, जब तकनीकी नकारात्मक लोगों के हाथ में जाएगी तो आतंकवाद और विध्वंसात्मक ताकतों को बढ़ावा मिलेगा।
कीमत चुकाने का नहीं, लेने का समय है
सीएम योगी ने समय की गति को भांपने और उसके अनुरूप खुद को तैयार करने की सीख देते हुए कहा कि सृष्टि के आरंभिक कालखंड से ज्ञानवान शक्तियां रिजर्व होकर कदम रखती रही हैं। इसके चलते कभी दधीचि को हड्डी दान करने के लिए मजबूर होना पड़ा तो कभी अलग अलग तरीके से कीमत चुकानी पड़ी।
आज कीमत चुकाने के नहीं, तकनीकी से जुड़कर कीमत लेने का समय है। उन्होंने कहा कि यदि नई प्रौद्योगिकी के अनुरूप होकर इसका सदुपयोग सीख लें तो बहुत से हाथों को नया काम मिल सकता है। यह अवश्य हो कि इसके लिए नैतिक पक्ष का सुरक्षात्मक ढांचा भी रहे।
मानवता की रक्षा के लिए अच्छे हाथों में हो टेक्नोलॉजी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समय के साथ चलते हुए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि मानवता की रक्षा के लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग अच्छे हाथों में ही हो। एटमिक पॉवर का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि इसके सदुपयोग से प्रदूषण मुक्त सस्ती ऊर्जा मिल सकती है जबकि दुरुपयोग से एटम बम बनाकर विनाश के बीज बोए जा सकते हैं।
सीएम ने कहा कि शुद्ध विज्ञान ऑब्जेक्टिव है जबकि मनुष्य की बुद्धि सब्जेक्टिव है। इसलिए सवाल यह है कि टेक्नोलॉजी किसके हाथ में है।
राष्ट्रधर्म ही सर्वोपरि के भाव से प्रशस्त होगा मानवता के कल्याण का मार्ग
सीएम योगी ने कहा कि आज के तेजी से आगे बढ़ते युग मे सबसे बड़ी चुनौती मानव को मानव बने रहने की है। इसके लिए ज्ञानवान और शीलवान होना होगा। सब साथ चलें, सब साथ बढ़ें के वैदिक उद्घोष को अंगीकार करना होगा। ‘राष्ट्रधर्म ही सर्वोपरि’ मानकर चलेंगे तो मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा।