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सीएम योगी के हस्तक्षेप से इस शख्स को मिला न्याय, फिर बना रहा आशियाना
Wed, 10 Feb 2021 10:15 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 10 Feb 2021 10:15 AM IST
सार
- खोवा मंडी में राजेंद्र यादव ने मकान का निर्माण कार्य शुरू कराया, बोले-मिला न्याय
- जमीन पर अपना दावा करने वाले प्रभाकर भी कोर्ट से न्याय मिलने की जता रहे उम्मीद
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मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से राजेंद्र यादव को मिला न्याय।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के कैंट इलाके के खोवा मंडी गली में जिस जमीन से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद कब्जा हटाया गया, वहां पर दूसरा पक्ष अब अपना आशियाना बना रहा है। लंबे समय से इस जमीन को लेकर दो पक्षों में विवाद है। अब कब्जा पाने के बाद राजेंद्र यादव उर्फ भीम का कहना है कि मुख्यमंत्री की वजह से उन्हें न्याय मिला है। उधर, जमीन को अपना बताने वाले प्रभाकर द्विवेदी भी कोर्ट से न्याय मिलने का भरोसा जता रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, बीते चार फरवरी को सीएम के जनता दरबार में राजेंद्र यादव पहुंचे थे। उन्होंने माफिया पर उनकी जमीन पर दोबारा कब्जा कर लेने की शिकायत की। दरअसल, योगी आदित्यनाथ के सांसद रहने के दौरान भी इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी, तब भी उनके हस्तक्षेप पर ही राजेंद्र को कब्जा मिला था।
इधर, 17 जनवरी 2021 को अचानक प्रशासनिक अमले ने दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया था। जिसके बाद राजेंद्र जनता दरबार में पहुंचे थे। एक बार फिर योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद राजेंद्र को कब्जा मिल गया है और वह खुश हैं।
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जानकारी के मुताबिक, बीते चार फरवरी को सीएम के जनता दरबार में राजेंद्र यादव पहुंचे थे। उन्होंने माफिया पर उनकी जमीन पर दोबारा कब्जा कर लेने की शिकायत की। दरअसल, योगी आदित्यनाथ के सांसद रहने के दौरान भी इस जमीन पर कब्जा करने की कोशिश हुई थी, तब भी उनके हस्तक्षेप पर ही राजेंद्र को कब्जा मिला था।
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इधर, 17 जनवरी 2021 को अचानक प्रशासनिक अमले ने दूसरे पक्ष को कब्जा दिला दिया था। जिसके बाद राजेंद्र जनता दरबार में पहुंचे थे। एक बार फिर योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद राजेंद्र को कब्जा मिल गया है और वह खुश हैं।
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मुकदमा खारिज होने पर हुए थे काबिज
राजेंद्र ने बताया कि वह नए मकान का निर्माण काम करवा रहे हैं और उन्हें अब कोई दिक्कत नहीं है। वह बताते हैं कि वर्ष 1983 से रजिस्टर्ड बैनामा है। 40 वर्षों से यहीं पर रहते हैं। उनकी चौहद्दी के आधार पर धोखे से जमीन लिखवा ली गई। प्रशासन से मिलकर उनकी जमीन पर कब्जा भी दिला दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से राहत मिल गई है।
दूसरे पक्ष के प्रभाकर द्विवेदी का कहना है कि सिविल कोर्ट में जमीन का मुकदमा चल रहा था। पैरवी के अभाव में तीन साल पहले मुकदमा खारिज हो गया था। इसके बाद 17 जनवरी को कब्जा हटाया गया था। कोर्ट से न्याय मिलेगा।
इस जमीन से मेरा कुछ लेना-देना नहीं: विनोद उपाध्याय
बसपा के टिकट पर शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके विनोद उपाध्याय का नाम भी इस मामले में लिया जा रहा था। हालांकि विनोद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। विनोद ने बताया कि खोवा मंडी की इस जमीन से उनका दूर-दूर तक कोई लेनादेना नहीं है। ना तो जमीन उनके नाम पर है और ना ही उस जमीन पर कब्जा या किसी अन्य काम से वह कभी गए हैं। इस मामले में उन्हें बेवजह बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
दूसरे पक्ष के प्रभाकर द्विवेदी का कहना है कि सिविल कोर्ट में जमीन का मुकदमा चल रहा था। पैरवी के अभाव में तीन साल पहले मुकदमा खारिज हो गया था। इसके बाद 17 जनवरी को कब्जा हटाया गया था। कोर्ट से न्याय मिलेगा।
इस जमीन से मेरा कुछ लेना-देना नहीं: विनोद उपाध्याय
बसपा के टिकट पर शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके विनोद उपाध्याय का नाम भी इस मामले में लिया जा रहा था। हालांकि विनोद ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। विनोद ने बताया कि खोवा मंडी की इस जमीन से उनका दूर-दूर तक कोई लेनादेना नहीं है। ना तो जमीन उनके नाम पर है और ना ही उस जमीन पर कब्जा या किसी अन्य काम से वह कभी गए हैं। इस मामले में उन्हें बेवजह बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।