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Chaitra Navratri 2020: कौन हैं मां शैलपुत्री, जिनकी नवरात्रि के पहले दिन होती है पूजा
Wed, 25 Mar 2020 11:11 AM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 25 Mar 2020 11:11 AM IST
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चैत्र नवरात्रि 2020
- फोटो : अमर उजाला।
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चैत्र नवरात्र 2020 का आज से आरंभ हो चुका है और आज पहले दिन चैत्र प्रतिपदा पर मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा की जाती है। आज ही के दिन कलश की स्थापना की जाती है। नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के साथ ही दुर्गासप्तशती का पाठ भी आरंभ हो जाता है। आज के दिन से ही नया संवत भी प्रारंभ होता है। चैत्र नवरात्र का पहला दिन सृष्टि की रचना का दिन भी माना जाता है। आइए आपको बताते हैं मां शैलपुत्री की पूजाविधि, मंत्र और भोग के बारे में विस्तार से…
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कौन हैं मां शैलपुत्री?
पौराणिक कथा के अनुसार मां शैलपुत्री अपने पिछले जन्म में भगवान शिव की अर्धांगिनी (सती) और दक्ष की पुत्री थीं। एक बार जब दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन कराया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया, परंतु भगवान शंकर को नहीं बुलाया गया। उधर, सती यज्ञ में जाने के लिए व्याकुल हो रही थीं।
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शिवजी ने उनसे कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है लेकिन उन्हें नहीं; ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है। सती का प्रबल आग्रह देखकर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब घर पहुंचीं तो वहां उन्होंने भगवान शिव के प्रति तिरस्कार का भाव देखा।
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दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक शब्द कहे। इससे सती के मन में बहुत पीड़ा हुई। वे अपने पति का अपमान सह न सकीं और यज्ञ की अग्नि से स्वयं को जलाकर भस्म कर लिया। इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ को विध्वंस कर दिया। फिर यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं।
कैसे करें मां शैलपुत्री की पूजा
- नवरात्रि के पहले दिन स्नाान करने के बाद स्वैच्छक वस्त्र धारण करें।
- पूजा के समय पीले रंग के वस्त्रर पहनना शुभ माना जाता है।
- शुभ मुहूर्त में कलश स्थावपना करने के साथ व्रत का संकल्पव लिया जाता है।
- कलश स्थारपना के बाद मां शैलपुत्री का ध्यावन करें।
- मां शैलपुत्री को घी अर्पित करें। मान्याता है कि ऐसा करने से आरोग्य। मिलता है।
- नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री का ध्यातन मंत्र पढ़ने के बाद स्तोत्र पाठ और कवच पढ़ना चाहिए।
- शाम के समय मां शैलपुत्री की आरती कर प्रसाद बांटें।
- फिर अपना व्रत खोलें।