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Gorakhpur News: फरार होटल संचालक और सहयोगियों के फोन की निकलेगी सीडीआर

Tue, 16 Jul 2024 06:04 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2024 06:04 AM IST
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CDR will be released on the phones of absconding hotel operator and associates
गोरखपुर। अपने मैनेजर और कर्मचारी अजीम की हत्या में आरोपी बनाए गए होटल मालिक नौशाद आलम और गुड्डू कबाड़ी की तलाश पुलिस ने शुरू कर दी है। नौशाद के अलावा उसके लगातार संपर्क में रहने वाले कुछ और सहयोगियों को भी पुलिस तलाश रही है। सूत्रों ने बताया कि पुलिस घटना के समय इनके फोन की सर्विलांस लोकेशन के अलावा सीडीआर भी जांच करवाएगी।
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सूत्रों ने बताया कि नौशाद को बचाने के लिए उसके सभी नेटवर्क और एक करीबी अफसर भी जुगाड़ में लग गए हैं। सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद नेपाल भागने से पहले नौशाद ने साहब को फोन कर इस घटना के बारे में भी जानकारी दी थी।
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दरअसल, हाल्सीगंज और हिंदी बाजार के आस-पास के इलाकों के लोगों का नौशाद से अच्छा संपर्क है। सूत्रों ने बताया कि घटना के थोड़ी देर पहले नौशाद, लाल कुर्ते में एक दूसरा सहयोगी और दो अन्य लोग हिंदी बाजार में ही थे। गुड्डू कबाड़ी सुबह से ही अपने रुपयों को लेकर तनातनी कर रहा था। इस दौरान नौशाद, इनके साझेदार और सहयोगी पक्षों ने सुलह कराने की भी कोशिश की थी।
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बताते हैं कि इसी सिलसिले में बाजार में अपने सेट सेंटर पर घटना वाले दिन भी ये आए थे। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पूछताछ में गुड्डू कबाड़ी और उसके भतीजे ने तुर्कमानपुर स्थित सुल्तान खान मस्जिद रोड के एक चर्चित शख्स के बारे में भी पुलिस को जानकारी दी है। गुड्डू के अलावा अन्य कुछ लोगों की मध्यस्थता कर इसी चर्चित शख्स ने रुपये नौशाद तक पहुंचाए थे और ठीक-ठाक रकम खुद भी रखी थी। पुलिस नौशाद और इसके बीच जुड़े कनेक्शनों में चर्चित शख्स की कड़ियां तलाश रही है।
पुलिस के अधिकारी नौशाद के नेटवर्क को जानकर हैरत में हैं। उनका भी मानना है कि लंबे समय से सभी एक साथ थे और अचानक रुपये के हेर-फेर की वजह से अजीम की जान चली गई। अजीम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नौशाद अपने विवादित मामलों में अजीम को ही बात-चीत करने के लिए सामने करता था। नौशाद की तरफ से रुपयों की लेन-देन के लिए अजीम ही जाया करता था। हालांकि, रुपयों की लेनदेन की कड़ी का मुख्य किरदार साहब ही होते थे।
सूत्रों ने बताया कि साहब ने आयकर से केंद्रीय एजेंसी तक की जांच ठंडे बस्ते में डलवा दी थी। हालांकि, सेंट्रल जीएसटी में दाल नहीं गलने से फर्मों पर कुछ कार्रवाई हो गई थी।

हिंदी बाजार में भी एक विवादित संपत्ति

हिंदी बाजार के हाल्सीगंज चौराहे के पास एक संपत्ति है। सूत्रों ने बताया कि नौशाद के साथ घासीकटरा वाले दूसरे साझेदार के नाम पर कटरे की रजिस्ट्री हो चुकी है। यहां किराएदार भी इनके खिलाफ आवाज नहीं उठा पाते हैं। कई ऐसे हैं, जिन्होंने इसका बैनामा भी करवा लिया है। थक-हार कर इस मामले को लोगों ने न्यायालय में लंबित करवा दिया है।

अस्पताल का भी किया था संचालन

अजीम के करीबी सूत्रों ने बताया कि सैन मेडिकेयर हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एनआरएचएम के तहत एक अस्पताल का भी संचालन नौशाद करता था। इसके संचालन और देखरेख में भी अजीम जुड़ा था। बताया कि अजीम ने कई जानने वालों का निशुल्क इलाज भी तत्कालीन समय में करवाया था, लेकिन बाद में यह बंद हो गया। इस एनआरएचएम के धंधे में मछली वाला एक धंधेबाज भी इसमें साझेदार था।




कई मामलों का राजदार भी रहा अजीम

अजीम के परिजन और करीबी खुद मानते हैं कि नौशाद और साहब के लगभग सभी मामलों का राजदार खुद अजीम था। जिस मामले में उसकी हत्या हुई, उसमें अजीम से रुपये का कोई सीधा लेन-देन नहीं था। इस बात की पुष्टि पुलिस की पूछताछ में गुड्डू कबाड़ी और भतीजे ने की है। अजीम इस गफलत में रहता था कि उसके पीछे पैसा और पावर में नौशाद का हाथ है। ऐसे में उसका कोई नुकसान नहीं हो सकता। रुपयों के विवाद और लेन-देन नौशाद से होने के बाद अचानक अजीम की जान जाने से परिजन और उसके जानने वाले हैरत में हैं।
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