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Gorakhpur CCL Lab: गोरखपुर में बनेगी प्रदेश की पहली सीसीएल लैब, 200 मॉडल से आसान होगी गणित और विज्ञान की पढ़ाई

Thu, 30 Jun 2022 04:57 AM IST
विजय पुंडीर विवेक सिंह, गोरखपुर
विवेक सिंह, गोरखपुर Published by: विजय पुंडीर Updated Thu, 30 Jun 2022 04:57 AM IST
सार

गोरखपुर में प्रदेश की पहली सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) लैब बनकर तैयार होगी। इसका निर्माण बेसिक शिक्षा विभाग और आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से होगा। लैब में विज्ञान, गणित के 200 मॉडल बनाए जाएंगे। जिला स्तरीय लैब में आईआईटी गांधीनगर की तरफ से किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी कीमत 50 हजार रुपये रहेगी। 

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CCL lab to be built in Gorakhpur maths and science will be easier with 200 models
छात्र (फाइल फोटा) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेसिक शिक्षा विभाग और आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से गोरखपुर में प्रदेश की पहली सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) लैब का निर्माण होगा। लैब में विज्ञान, गणित के 200 मॉडल बनाए जाएंगे। इसके जरिए परिषदीय स्कूल के शिक्षक व बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे गणित व विज्ञान की पढ़ाई आसान हो जाएगी।

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पहले चरण में जिला स्तरीय सीसीएल लैब का निर्माण होगा। दूसरे चरण में 20 विकास खंडों में लैब बनेगी। जिला स्तरीय लैब में आईआईटी गांधीनगर की तरफ से किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी कीमत 50 हजार रुपये रहेगी। इस किट में गणित व विज्ञान की पढ़ाई आसान बनाने के सूत्र होंगे। कक्षा तीन से आठवीं के विद्यार्थियों के लिए दो ग्रुप में प्रत्येक शुक्रवार और शनिवार को दो-दो घंटे का यू-ट्यूब सेशन आयोजित किया जाएगा। इससे आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञ जुड़ेंगे और बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे।
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विज्ञान और गणित विषय के एआरपी को दिया जाएगा प्रशिक्षण
जनपद के हर विकास खंड के गणित एवं विज्ञान विषय के एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के लिए प्रत्येक सोमवार को एक घंटे के ऑनलाइन सेशन होगा। इसका मकसद बच्चों के प्रस्तावित यूट्यूब सेशन से उत्पन्न होने वाली जिज्ञासाओं का सरल समाधान करना है। प्रोग्राम कोआर्डिनेटर के लिए भी 10 -10 दिन की अवधि के प्रशिक्षण तीन चरणों में कुल 30 दिन तक पूरे वर्ष चलाए जाएंगे।
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जिले के अंदर गणित और विज्ञान के सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए सीसीएल लैब का निर्माण कराया जाएगा। इसे लेकर प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। बजट मिलते ही लैब निर्माण का कार्य प्रारंभ होगा। - आरके सिंह, बीएसए

छत और बालकनी में उगेंगी फल-सब्जियां
कैबिनेट ने स्मार्ट शहरी कृषि योजना को दी मंजूरी; बढ़ेगा रोजगार, हरित क्षेत्र का होगा विस्तार

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्लीवासी अब घर की छत और बालकनी में फल और सब्जियां उगा सकते हैं। दिल्ली सरकार इस काम को बेहतर तरीके से करने के लिए उन्हें प्रशिक्षित भी करेगी। विशेषज्ञों समेत इसके लिए भारतीय कृषि शोध संस्थान से भी सरकार समझौता करेगी। 
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में दिल्ली कैबिनेट ने बुधवार को स्मार्ट शहरी कृषि योजना को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इससे अतिरिक्त रोजगार का सृजन होगा। घर की खपत के साथ कारोबार के मकसद से भी घर में फल व सब्जियां उगाने से कामकाजी आबादी बढ़ेगी। इसके साथ ही आम लोगों की भागीदारी से हरित क्षेत्र में बढ़ोतरी होगी।
इससे पहले कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सामने अधिकारियों ने बताया कि शहरी खेती और छज्जे पर बागवानी योजना का हिस्सा है। इस पहल को बेहतर तरीके से अंजाम तक पहुंचाने के लिए ट्रेनिंग वर्कशॉप और उद्यमिता प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाना है। इससे दिल्ली के लोगों में इसको लेकर जागरूकता बढ़ेगी। साथ ही दिल्ली में हरित नौकरियों को भी बढ़ावा देना है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को बताया कि जिन लोगों के घरों में बालकनी या छत पर जगह है, वह खेती कर सकेंगे। मसलन, वह बागवानी के साथ सब्जियां या फल उगा सकेंगे। सरकार उनको इस काम के लिए प्रशिक्षित करेगी। शुरुआत में बीज आदि भी मुहैया कराया जाएगा। 
योजना को दो भागों में बांटा : अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, शहरी कृषि योजना को दो भागों में बांटा है। एक में वह लोग हैं, जगह कम होने से जो अपने घर की खपत के लिए सब्जी और फल उगाना चाहते हैं। दूसरा वह लोग जो इसका व्यापार करना चाहते हैं। मसलन, अगर कोई गृहणी छोटा-मोटा काम करना चाहती है तो इससे उनके परिवार को कुछ अतिरिक्त आमदनी होगी। एक तरह यह रोजगार उत्पन्न करने का भी एक साधन होगा। इसके लिए सरकार बड़े स्तर पर विशेषज्ञों को साथ जोड़ेगी। वहीं, भारतीय कृषि शोध संस्थान से भी समझौता होगा। वार्ड स्तर पर 400 के करीब वर्कशॉप लगेंगी जबकि 600 के करीब ऐसी वर्कशॉप लगेंगी, जिसमें लोगों को व्यापार करना सिखाया जाएगा। हर वर्कशॉप में 25 लोगों को शामिल किया जाएगा। इस तरह उम्मीद है कि योजना का पहले साल में 25,000 परिवारों को फायदा होगा।

यह है शहरी कृषि
शहरी खेती के तहत यदि पर्याप्त धूप उपलब्ध हो तो लोग अपने घर की छत पर फल, सब्जियां और पौधे उगा सकते हैं। शहरी खेती से लोगों को उन खाद्य उत्पादों में कीटनाशकों और हानिकारक रसायनों से बचने में मदद मिलेगी, जिनका वे दिन-प्रतिदिन उपभोग करते हैं। साथ ही इससे शहर में हरित क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली सरकार का हार्टिकल्चर विभाग इस पहल के लिए नोडल विभाग के रूप में काम करेगा।

दिल्ली पर्यावरण संरक्षण समिति का होगा गठन
इस अभियान को बेहतर तरीके              से चलाने के लिए दिल्ली पर्यावरण संरक्षण समिति का गठन होगा।     इसमें एनजीओ, आरडब्ल्यूए, पर्यावरण विशेषज्ञ, एमएलए         और पार्षदों के प्रतिनिधि शामिल    होंगे। इससे वार्ड स्तर पर होने     वाले प्रदूषण के कारणों और उसके निवारण का तंत्र तैयार करने में सहायता मिलेगी।

योजना का मकसद
n दिल्ली के शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों का खेती से जुड़ाव बढ़ेगा।
n शहरी कृषि पद्धतियों पर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण होगा।
n दिल्ली में खेती की जरूरतों पर प्रोत्साहन के साथ-साथ ज्ञान आदान-प्रदान होगा।
n दिल्ली के नागरिकों से लगातार जुड़ाव और बड़े पैमाने पर शहरी खाद्य आंदोलन को बढ़ावा मिलेगा।
n शहरी कृषि उद्यमिता विकास के लिए प्रशिक्षण की जरूरतें पूरी होंगी।
n आधुनिक शहरी खेती के कई पहलुओं के तहत हरित नौकरियों में वृद्धि होगी।

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शिक्षा और स्वास्थ्य पर गरमाई सियासत
स्कूलों का जायजा लेने आए गुजरात के भाजपा नेता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति बुधवार को शिक्षा व स्वास्थ्य के मसले पर गरम रही। दिल्ली के स्कूलों व अस्पतालों का जायजा लेने आए गुजरात के भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नसीहत दी कि मौका एक-दूसरे से सीखने का है, इसी से देश आगे बढ़ेगा। उधर, गुजरात के भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को राउज एवेन्यू स्कूल पहुंचने का न्योता देकर आप विधायकों की एक टीम बुके लेकर इंतजार करती रही। 
 आप के तयशुदा स्थल पर पहुंचने की जगह भाजपा नेताओं ने दूसरे स्कूलों व मोहल्ला क्लीनिक का जायजा लिया। इस मौके पर उनके साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी भी मौजूद थे। दिलचस्प यह है कि भाजपा नेताओं ने इस पर दिल्ली में कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की। इसकी जगह उन्होंने गुजरात पहुंचकर इस पर बात करने का हवाला दिया। हालांकि, आप ने वीडियो शेयर कर बताया कि स्कूल में जिस जगह का भाजपा नेताओं ने जायजा लिया, वह क्लास रूम की जगह स्टोर रूम है।
उधर, दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने भाजपा नेताओं को राउज एवेन्यू स्कूल आने का न्योता दिया था। पार्टी विधायकों की एक टीम बुके लेकर दोपहर 12:30 बजे तक इंतजार करती रही, लेकिन भाजपा नेता दूसरे स्कूलों व मोहल्ला क्लीनिक का मुआयना करते रहे। आप विधायक आतिशी ने कहा कि गुजरात के स्मार्ट स्कूल में बच्चे टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे हैं।

स्कूल के गेट पर स्वागत बोर्ड लगाया था
भाजपा के प्रतिनिधिमंडल को स्कूल का दौरा कराने के लिए स्कूल के बाहर स्वागत का बोर्ड भी लगाया गया था। स्वागत का पूरा इंतजाम किया गया था। छात्रों के कार्य की प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। हालांकि भाजपा प्रतिनिधिमंडल वहां नहीं पहुंचा। आप विधायक आतिशी ने कहा कि राउज एवेन्यू का स्कूल टीन शेड से चलता था, जो टूटा-फूटा था। बाहर कूड़े के ढेर लगे रहते थे। बैठने के लिए डेस्क तक नहीं थे। आज यही स्कूल वर्ल्ड क्लास बन गया है। 

गुजरात पहुंचकर लोगों के बीच करेंगे चर्चा
गुजरात से दिल्ली पहुंचे भाजपा के 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने यहां के स्कूलों व स्वास्थ्य सुविधाओं का मुआयना किया। प्रतिनिधिमंडल ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी के संसदीय क्षेत्र में पहुंचकर स्कूल व मोहल्ला क्लीनिक को देखा। वीडियो बनाया और आम लोगों से की गई बातचीत को वे गुजरात पहुंचकर बताएंगे। हालांकि, मीडिया से बात करते हुए कहा कि स्कूलों व मोहल्ला क्लीनिक की हालत खराब है। 

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सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर आप व उपराज्यपाल में ठनी
आप विधायक आतिशी का आरोप, पूर्व उपराज्यपाल की मंजूरी को नए ने रोका
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। सरकारी वकीलों की नियुक्ति के मामले में भी आम आदमी पार्टी (आप) और उपराज्यपाल आमने-सामने हैं। आप विधायक आतिशी का आरोप है कि तत्कालीन उपराज्यपाल से मंजूर की गई सरकारी वकील और स्थायी परामर्शदाता की नियुक्ति प्रक्रिया को नए उपराज्यपाल ने रोक दिया है। आतिशी ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नसीहत दी है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर काम करें।
आतिशी का आरोप है कि नए उपराज्यपाल ने दिल्ली की सांविधानिक व्यवस्था को ध्वस्त करने की कोशिश की है। दिल्ली में जमीन, कानून व्यवस्था व दिल्ली पुलिस सीधे उनके अधीन आते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, कानून विभाग सहित तमाम विभागों के लिए कैबिनेट की सलाह जरूरी है। आतिशी का आरोप है कि इसके उलट वह ऐसे कदम उठा रहे हैं जिसका दिल्ली की सांविधानिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। ताजा मामले के तौर पर उन्होंने सरकारी वकीलों की नियुक्ति का हवाला दिया है।
आतिशी ने बताया कि सरकारी वकीलों की नियुक्ति प्रक्रिया 2021 में शुरू हुई थी। तत्कालीन उपराज्यपाल को सरकार ने फाइल भेजी और उन्होंने इस पर अपनी स्वीकृति भी दे दी। इसके लिए सरकार ने एक कमेटी गठित की, जिसे तत्कालीन उपराज्यपाल ने 24 जून 2021 को मंजूरी दे दी थी। अतिरिक्त स्थायी परामर्शदाता, स्थायी परामर्शदाता और सरकारी वकील के लिए जो 2000 आवेदन आए थे, कमेटी ने उनका साक्षात्कार लिया। इसमें से चयनित लोगों की अंतिम सूची दिल्ली उच्च न्यायालय को भेज दी। 
आतिशी के मुताबिक, इस सूची को 40 जजों ने तीन बार देखा। चार आवेदकों को छोड़ सभी के नाम पर स्वीकृति दे दी। दिल्ली सरकार के पास चयनित पदों के लिए नाम वापस भेजे गए। जब दिल्ली सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी करने से पहले उपराज्यपाल को सूचित करने के लिए फाइल भेजी तो उन्होंने सभी चयनित सरकारी वकीलों और स्थायी परामर्शदाताओं का बायोडाटा भेजने को कहा। साथ ही कहा कि इन्हें देखने के बाद फैसला करूंगा कि कौन अतिरिक्त स्थायी परामर्शदाता, स्थायी परामर्शदाता और सरकारी वकील हो सकते हैं। 

उपराज्यपाल कार्यालय ने आपत्ति जताते हुए    कहा-प्रस्ताव विचाराधीन  
नई दिल्ली। स्थायी वकील, अतिरिक्त स्थायी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के पैनल से संबंधित प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया पर उप राज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने आपत्ति जताई है। उन्होंने पार्टी की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों को तुच्छ और तथ्यों से परे और जानबूझकर गुमराह करने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला विचाराधीन है और ऐसे मामलों में विभिन्न पहलुओं पर मंथन में प्रक्रियात्मक समय लग रहा है।  स्थायी वकील, अतिरिक्त स्थायी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के पैनल से संबंधित प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता व विधायक आतिशी ने सवाल उठाते हुए उप राज्यपाल पर निशाना साधा था। उन्होंने उच्च न्यायालय की वैधानिक सहमति का हवाला देते हुए नियुक्तियों को बेवजह अटकाने का आरोप लगाया था। सूत्रों के मुताबिक विधि मंत्री, दिल्ली सरकार की अध्यक्षता वाली समिति की ओर से अनुशंसित 44 स्थायी अधिवक्ताओं, अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ताओं और अतिरिक्त लोक अभियोजकों के पैनल के प्रस्ताव को तत्कालीन उपराज्यपाल के समक्ष रखा गया था। उन्हें वैधानिक रूप से सहमति के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय को भेजा गया था। उच्च न्यायालय ने तीन जून, 2022 को चार आवेदकों के नामों को खारिज करते हुए केवल 40 नामों के लिए अपनी सहमति दी थी और दिल्ली सरकार को अवगत कराया।  ब्यूरो


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वाहनों के प्रवेश पर रोक के प्रस्ताव पर व्यापारी लामबंद
कैट ने बैठक में 10 से प्रस्ताव के खिलाफ अभियान चलाने का लिया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदूषण रोकने के लिए एक अक्टूबर से डीजल वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगाने के प्रस्ताव पर व्यापारी लामबंद हो गए हैं। इस मुद्दे पर बुधवार को कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने एक बैठक भी की। जिसमें ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों समेत दिल्ली के 200 से अधिक व्यापारिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। 
बैठक में व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार प्रस्ताव वापस नहीं लेती है तो मजबूर होकर दिल्ली के व्यापारियों को पड़ोसी राज्य हरियाणा, उत्तर प्रदेश व राजस्थान में अपने व्यापार को स्थानांतरित करना पड़ेगा। कैट के प्रदेश अध्यक्ष विपिन आहूजा के नेतृत्व में एक संघर्ष समिति का गठन करने का प्रस्ताव पारित किया गया। कहा गया कि 10 जुलाई से दिल्ली भर में चलने वाले इस अभियान में दिल्ली के सभी बाजारों में व्यापारियों की सभाएं व रैली आयोजित की जाएंगी। पर्यावरण सुरक्षा के लिए व्यापारियों ने दिल्ली में 1 करोड़ पौधे लगाने का प्रस्ताव भी स्वीकार किया। इस मुद्दे पर प्रवीण खंडेलवाल व देवराज बावेजा के नेतृत्व में कैट का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली के उपराज्यपाल से मिलेगा।

चैंबर के चेयरमैन ने परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से की मुलाकात
नई दिल्ली। डीजल वाहनों पर एक अक्तूबर से दिल्ली में प्रवेश पर पाबंदी लगाने के प्रस्ताव ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। त्योहार का मौसम इसी दौरान शुरू होता है, ऐसे में व्यापार पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इसे लेकर बुधवार को चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से मुलाकात की। दिल्ली के व्यापारियों की तरफ से एक ज्ञापन देकर उनकी चिंता से अवगत कराया। मुलाकात के दौरान गोयल ने परिवहन मंत्री को यह भी बताया कि 1 अक्तूबर से डीजल ट्रकों की एंट्री दिल्ली में बैन होने की खबर आने के बाद से दिल्ली के 10 लाख व्यापारी, फैक्ट्री मालिक और ट्रान्सपोर्टर्स चिंतित हैं। अक्तूबर, नवंबर त्योहारों का मौसम होता है। ब्यूरो
 
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