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Gorakhpur News: टीटीई से मारपीट के आरोपी यात्रियों पर गोंडा में केस दर्ज
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स्लीपर क्लास में टिकट चेकिंग के दौरान यात्रियों ने कर दी थी पिटाई
आईआरटीसीएसओ यूनियन व पीआरकेएस ने केस दर्ज कराने के लिए किया था प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। स्लीपर कोच में टिकट चेकिंग के दौरान टीटीई की पिटाई मामले में जीआरपी गोंडा में आरोपी पांच यात्रियों पर केस दर्ज हो गया है। इस मामले में केस दर्ज कराने के लिए आईआरटीसीएसओ यूनियन के पदाधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इनके समर्थन में पीआरकेएस पदाधिकारियों ने भी प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने मांग की है कि, ऐसे मामलों में अब त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा टिकट जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों का सहयोग भी जरूरी है।
टीटीई एसोसिएशन के पदाधिकारी टीएन पांडेय ने बताया कि दिल्ली से तीन यात्रियों ने किसी जालसाज से ऑनलाइन टिकट लिया था, लेकिन टिकट पर जो नाम दर्ज था, उसका आईडी प्रूफ नहीं था। वहीं दो यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। लखनऊ से ट्रेन चलने पर टीटीई विपिन कुमार ने जब इनकी जांच की तो मामला सामने आया।
टीटीई ने बिना टिकट ट्रेन में सवार दो यात्रियों से जुर्माना जमा करते हुए टिकट बनवाने को कहा गया तो एक साथ पांचों उलझ गए और मारपीट की। टीटीई ने इसकी सूचना वरिष्ठ अफसरों को दी तो जीआरपी गोंडा में केस दर्ज कराने को कहा गया। लेकिन, पुलिस केस दर्ज करने के बजाय टीटीई को ही दोषी ठहराने लगी।
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इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। मामले में वरिष्ठ अफसरों से मदद ली गई, तब जाकर किसी तरह से केस दर्ज हो पाया।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद राय का कहना है कि इस तरह दोषियों के खिलाफ त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई किए जाने से कर्मचारियों में सुरक्षा का माहौल बना रहता है। टिकट चेकिंग कर्मचारी निर्भिक होकर रेल कार्य करते हैं। महामंत्री ने रेल प्रशासन से भी मांग की है कि महत्वपूर्ण ट्रेनों में टिकट चेकिंग स्टाफ को टिकट चेक करते समय जीआरपी या आरपीएफ का सहयोग उपलब्ध कराया जाए, जिससे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो सके।
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आईआरटीसीएसओ यूनियन व पीआरकेएस ने केस दर्ज कराने के लिए किया था प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। स्लीपर कोच में टिकट चेकिंग के दौरान टीटीई की पिटाई मामले में जीआरपी गोंडा में आरोपी पांच यात्रियों पर केस दर्ज हो गया है। इस मामले में केस दर्ज कराने के लिए आईआरटीसीएसओ यूनियन के पदाधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इनके समर्थन में पीआरकेएस पदाधिकारियों ने भी प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने मांग की है कि, ऐसे मामलों में अब त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा टिकट जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों का सहयोग भी जरूरी है।
टीटीई एसोसिएशन के पदाधिकारी टीएन पांडेय ने बताया कि दिल्ली से तीन यात्रियों ने किसी जालसाज से ऑनलाइन टिकट लिया था, लेकिन टिकट पर जो नाम दर्ज था, उसका आईडी प्रूफ नहीं था। वहीं दो यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहे थे। लखनऊ से ट्रेन चलने पर टीटीई विपिन कुमार ने जब इनकी जांच की तो मामला सामने आया।
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टीटीई ने बिना टिकट ट्रेन में सवार दो यात्रियों से जुर्माना जमा करते हुए टिकट बनवाने को कहा गया तो एक साथ पांचों उलझ गए और मारपीट की। टीटीई ने इसकी सूचना वरिष्ठ अफसरों को दी तो जीआरपी गोंडा में केस दर्ज कराने को कहा गया। लेकिन, पुलिस केस दर्ज करने के बजाय टीटीई को ही दोषी ठहराने लगी।
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इसके बाद संगठन के पदाधिकारियों ने हस्तक्षेप किया। मामले में वरिष्ठ अफसरों से मदद ली गई, तब जाकर किसी तरह से केस दर्ज हो पाया।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद राय का कहना है कि इस तरह दोषियों के खिलाफ त्वरित एवं कड़ी कार्रवाई किए जाने से कर्मचारियों में सुरक्षा का माहौल बना रहता है। टिकट चेकिंग कर्मचारी निर्भिक होकर रेल कार्य करते हैं। महामंत्री ने रेल प्रशासन से भी मांग की है कि महत्वपूर्ण ट्रेनों में टिकट चेकिंग स्टाफ को टिकट चेक करते समय जीआरपी या आरपीएफ का सहयोग उपलब्ध कराया जाए, जिससे इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो सके।