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गोरखपुर में बैंक जालसाजी: इतने नाम बदले कि पुलिस भी चकराई, रुद्रांश कौन और उसका बाप कौन

Sat, 03 Feb 2024 11:21 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 03 Feb 2024 11:21 AM IST
सार

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नाेई ने कहा कि पुलिस की जांच में रुद्रांश के जालसाजी के कई मामले सामने आए हैं। रुद्रांश, उसके मां-बाप के कई नाम होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस बैंक जालसाजी के प्रकरण की जांच को साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा रही है।

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Case of fraud of Rs 4.45 crore on fake documents from ICICI Bank
बैंक से लोन लेकर हड़पने वाला जालसाज गिरफ्तार। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आईसीआईसीआई बैंक से फर्जी दस्तावेज पर 4.45 करोड़ रुपये के ऋण लेने के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पुलिस को चौंकाने वाले तथ्य मिल रहे हैं। पता चला है कि आरोपी रुद्रांश पांडेय ने जालसाजी के लिए अपना नाम तो बदला ही, उसके मां-बाप के भी कई नाम सामने आए हैं।

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अभी तक की जानकारी के मुताबिक, रुद्रांश ने कभी अपने नाम के आगे प्रधान जोड़ लिया तो कभी तानो पांडेय रख लिया। पिता का नाम भी कभी राजेश तो अष्टभुजा के रूप में सामने आ रहा है। मां के भी दो नाम सामने आ चुके हैं, एक अर्चना तो दूसरा बच्ची पांडेय।
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पुलिस अब जांच के केंद्र में जालसाजी को रखकर साक्ष्य जुटाने में जुटी है। खबर है कि रुद्रांश के मां-बाप को पहले शरीफ समझ रही पुलिस को अब पता चला कि वे भी कम गुनहगार नहीं हैं। यही वजह है कि दोनों की तलाश पुलिस ने तेज कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक, रुद्रांश पांडेय के पिता ने ही सबसे पहले ग्रामीण फाइनेंस कंपनी खोलकर जालसाजी की थी। 100 से अधिक जालसाजी के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ा तो उसने अपना नाम बदल दिया। वह अष्टभुजा से राजेश पांडेय हो गया। वहीं, कई लोग यह भी बताते हैं कि रुद्रांश का ही नाम अष्टभुजा है। अब सच्चाई क्या है, इसकी जांच पुलिस कर रही है।

यही नहीं, मां अर्चना पांडेय ने भी अपना नाम बदलकर प्रधानी का चुनाव लड़ा था। वह बच्ची पांडेय बनकर प्रधान भी रही, लेकिन इसके बाद एक और जालसाजी का मामला सामने आने के बाद वह गांव छोड़कर फरार हो गई। अब परिवार ने गांव से नाता तोड़ लिया है।

 

जांच में सामने आया है कि लखनऊ में रुद्रांश पकड़ा गया तो उसके आधार कार्ड पर उसकी पहचान राप्तीनगर शाहपुर दर्ज थी। गोरखपुर में पकड़ा गया तो बस्ती का पता मिला। जबकि, उसका असल पता बांसगांव थाना क्षेत्र का बगही गांव है, यह अब सामने आया है।

उधर, पुलिस आरोपी रुद्रांश पांडेय के मां-बाप के जालसाजी में शामिल होने की आशंका पर उनकी भी तलाश शुरू कर दी है। उनके सामने न आने की वजह से पुलिस का शक गहरा हो गया है। पुलिस उनका नाम केस में बढ़ाने की तैयारी में है। दोनों के पुराने जालसाजी के रिकॉर्ड भी हैं, इस वजह से पूरा संदेह है कि इस नए जालसाजी में भी ये लोग शामिल हो सकते हैं।

 

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नाेई ने कहा कि पुलिस की जांच में रुद्रांश के जालसाजी के कई मामले सामने आए हैं। रुद्रांश, उसके मां-बाप के कई नाम होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस बैंक जालसाजी के प्रकरण की जांच को साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा रही है। जल्द ही इस पूरे गिरोह का पुलिस पर्दाफाश कर लेगी।

 

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