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Gorakhpur News: माफिया का नाम सामने आने पर सहमे सराफा व्यापारी

Wed, 15 May 2024 03:34 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 May 2024 03:34 AM IST
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Bullion traders scared after the name of mafia came to light
11 मई को सुधीर सिंह के इशारे पर गुर्गे गए थे सराफा व्यापारी के घर
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हिंदी बाजार के सराफा व्यापारी की पत्नी ने माफिया सुधीर समेत अन्य पर दर्ज कराया है केस
अमर उजाला ब्यूरो।
गोरखपुर। राजघाट थाने में सराफा व्यापारी अरुण बरनवाल की पत्नी अनामिका द्वारा माफिया सुधीर सिंह, आशीष बरनवाल, गया साहनी और तीन अज्ञात पर जान से मारने की धमकी देने का केस 12 मई को दर्ज कराने के बाद कुछ सराफा व्यापारी सहमे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में हिंदी बाजार के कुछ रसूख वाले सराफा व्यापारियों ने समझौते का प्रयास करवाया था। एक-दो दुकानदारों के यहां पंचायत भी बैठी थी। माफिया का नाम आने के बाद वे व्यापारी इस बात को लेकर सहमे हैं कि कहीं इस केस में उनका भी नाम न आ जाए।

एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि केस दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसमें अज्ञात और कौन-कौन लोग हैं, उनकी भी पहचान पुलिस कर रही है।
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वहीं, हिंदी बाजार में मंगलवार को पूरे दिन व्यापारियों के बीच इस प्रकरण पर चर्चा होती रही। बताया जा रहा है हिंदी बाजार में सुधीर सिंह के कुछ सराफा व्यापारियों से करीबी संबंध हैं। उनकी भी भूमिका इसमें संदिग्ध बताई जा रही है।
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वर्ष 2016 से चल रहा केस
सराफा व्यापारी अरुण बरनवाल की हिंदी बाजार में सोने-चांदी की दुकान है। वह 11 सितंबर 2016 में दुकान बंद कर घर जा रहे थे। वह शेखपुर में गोयल कोठी के सामने पहुंचे थे, तभी बाइक सवार हमलावरों ने उन्हें गोली मारी थी। इसी मामले में समझौता करने का दबाव बनाने 11 मई को सुधीर सिंह के इशारे पर उसके गुर्गे सराफा व्यापारी के घर गए थे।

पुश्तैनी जमीन का विवाद
पादरी बाजार इलाके में अरुण बरनवाल की पुश्तैनी जमीन थी। उनके पिता ने सीलिंग की जमीन पर चारों बेटों का नाम चढ़वा दिया था। इस जमीन को बेचने को लेकर भाइयों में विवाद हो गया। तीन भाइयों का कहना था कि पॉवर ऑफ अटार्नी अरुण अपनी जगह उन्हें दे दें। इससे वे जमीन बेचकर मोटा मुनाफा कमा सकेंगे। जबकि, अरुण इसके पक्ष में नहीं थे। भाइयों ने जमीन बेच दी। आरोप है कि इस जमीन में माफिया सुधीर सिंह का रुपया लगा था। अरुण ने बताया कि उनकी तरफ से दीवानी कचहरी में केस किया गया। कोर्ट ने जुलाई 2016 में पूरी जमीन की खरीद-बिक्री पर स्टे का आदेश देते हुए रोक दिया। इसी वजह से उनके ऊपर जानलेवा करवाया गया था।


2015 में बंट गई थी फर्म
हिंदी बाजार में अरुण आशीष बरनवाल फर्म के नाम से सोने-चांदी की दुकान थी, लेकिन संपत्ति के विवाद में इनके बीच में बंटवारा हो गया। इन्होंने अपनी दुकान भी अलग कर ली। एक दुकान अरुण बरनवाल की हो गई, जबकि बगल में भाइयों की दुकान की एक फर्म हो गई।
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