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उपलब्धि: बीआरडी मेडिकल कॉलेज की एचआईवी लैब को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता
Sun, 15 Aug 2021 12:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Aug 2021 12:53 PM IST
सार
मेडिकल कॉलेज की यह लैब पूर्वांचल की पहली ऐसी प्रयोगशाला बन गई है जिसे यह प्रमाणपत्र मिला है। कॉलेज का माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग करता है लैब का संचालन।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की एचआईवी लैब अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरी है। कॉलेज की लैब को नेशनल एक्रिडेशन फॉर कैलिब्रेशन एवं टेस्टिंग लैबोरेट्री (एनएबीएल) सर्टिफिकेट मिला है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज की यह लैब पूर्वांचल की पहली ऐसी प्रयोगशाला बन गई है जिसे यह प्रमाणपत्र मिला है। लैब का संचालन कॉलेज का माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग करता है।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की एचडीआरएल (एचआईवी डायग्नोसिस एवं रिसर्च लैब) एक बार फिर से सुर्खियों में है। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी (नाको) की सहायता से इस लैब का संचालन वर्ष 2010 हो रहा है। यहां पर एचआईवी के साथ ही अन्य सिरोलॉजी जांच भी होती है। इसमें एचआईवी के साथ ही सिफिलिस, हेपेटाइटिस बी व सी की जांच होती है।
इस लैब में अब तक 83 हजार से अधिक नमूनों की जांच हो चुकी है। इसमें 6200 से अधिक नमूने एचआईवी संक्रमित मिले हैं। माइक्रोबॉयोलॉजी की टीम लैब की गुणवत्ता को लेकर प्रयास करती रही है। इसमें नाको ने मदद करते हुए उपकरण के साथ मैनपॉवर भी उपलब्ध कराया है। मानक पूरे होने के बाद विभाग ने नेशनल एनएबीएल के लिए आवेदन करने का फैसला किया।
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प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार से मंजूरी मिलने के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने इस वर्ष जनवरी में ऑनलाइन आवेदन किया था। मार्च में ऑनलाइन असेसमेंट हुआ। इस बीच खामियां मिली थीं, जिन्हें दो महीने में दूर कर लिया गया। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी किया गया है।
एनएबीएल तय करता है जांच की गुणवत्ता
माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के डॉ. अमरेश ने बताया कि एनएबीएल देश में गुणवत्तायुक्त लैब के प्रमाणन का सबसे बड़ा प्रमाणपत्र है। इस प्रक्रिया में टेस्टिंग के चरण तय हैं। हर चरण पर तय प्रोटोकॉल के हिसाब से जांच होती है। इसके होने से जांच में गलतियों की आशंका नहीं के बराबर होती है। खास बात यह है उसी दिन मरीज को गुणवत्ता वाली रिपोर्ट मिल जाती है। बताया कि यह उपलब्धि हासिल करने में यूपी एसएसीएस के सहायक निदेशक एमएस त्रिपाठी, तकनीकी अधिकारी डॉ. संजय कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अल्पना बुंदेला, जयेश पाण्डेय, ज्योति कुमार, शैलेश, भरत एवं सिद्धार्थ राय का विशेष सहयोग रहा है।
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मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की एचडीआरएल (एचआईवी डायग्नोसिस एवं रिसर्च लैब) एक बार फिर से सुर्खियों में है। नेशनल एड्स कंट्रोल सोसायटी (नाको) की सहायता से इस लैब का संचालन वर्ष 2010 हो रहा है। यहां पर एचआईवी के साथ ही अन्य सिरोलॉजी जांच भी होती है। इसमें एचआईवी के साथ ही सिफिलिस, हेपेटाइटिस बी व सी की जांच होती है।
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इस लैब में अब तक 83 हजार से अधिक नमूनों की जांच हो चुकी है। इसमें 6200 से अधिक नमूने एचआईवी संक्रमित मिले हैं। माइक्रोबॉयोलॉजी की टीम लैब की गुणवत्ता को लेकर प्रयास करती रही है। इसमें नाको ने मदद करते हुए उपकरण के साथ मैनपॉवर भी उपलब्ध कराया है। मानक पूरे होने के बाद विभाग ने नेशनल एनएबीएल के लिए आवेदन करने का फैसला किया।
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प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार से मंजूरी मिलने के बाद विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने इस वर्ष जनवरी में ऑनलाइन आवेदन किया था। मार्च में ऑनलाइन असेसमेंट हुआ। इस बीच खामियां मिली थीं, जिन्हें दो महीने में दूर कर लिया गया। इसके बाद प्रमाणपत्र जारी किया गया है।
एनएबीएल तय करता है जांच की गुणवत्ता
माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के डॉ. अमरेश ने बताया कि एनएबीएल देश में गुणवत्तायुक्त लैब के प्रमाणन का सबसे बड़ा प्रमाणपत्र है। इस प्रक्रिया में टेस्टिंग के चरण तय हैं। हर चरण पर तय प्रोटोकॉल के हिसाब से जांच होती है। इसके होने से जांच में गलतियों की आशंका नहीं के बराबर होती है। खास बात यह है उसी दिन मरीज को गुणवत्ता वाली रिपोर्ट मिल जाती है। बताया कि यह उपलब्धि हासिल करने में यूपी एसएसीएस के सहायक निदेशक एमएस त्रिपाठी, तकनीकी अधिकारी डॉ. संजय कुमार, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अल्पना बुंदेला, जयेश पाण्डेय, ज्योति कुमार, शैलेश, भरत एवं सिद्धार्थ राय का विशेष सहयोग रहा है।