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Gorakhpur News: ब्लड बैंक कर्मचारी की मदद से फैला था खून माफिया का नेटवर्क, पुलिस को मिले सबूत

Mon, 16 Oct 2023 11:28 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 16 Oct 2023 11:28 AM IST
सार

एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि छह आरोपियों को जेल भिजवाया जा चुका है। कॉल डिटेल और सीडीआर की मदद से पुलिस छानबीन कर रही है। गिराेह में शामिल कुछ लोगों का नाम सामने आया है। उनके खिलाफ साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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Blood mafia network spread with help of blood bank employee
BRD - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में खून माफिया का नेटवर्क ब्लड बैंक से ही संचालित होने के संकेत मिल रहे हैं। एक कर्मचारी के खिलाफ पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। पता चला है कि कर्मचारी की मदद से ही डोनर बनकर आने वाले मजदूर का नाम-पता नोट नहीं किया जा जाता था और फिर खून को बेच दिया जाता था।

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गर्दन फंसने की आशंका में कर्मचारी मोबाइल बंद कर फरार हो गया है, लेकिन पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। खबर है कि उसने ही सीसीटीवी कैमरे के रिकॉर्ड को भी हटाया था, ताकि बच जाए, लेकिन पुलिस जांच व सीडीआर की मदद से उस तक पहुंच गई है।
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जानकारी के मुताबिक, 28 अगस्त को नगर निगम के पूर्व सफाई कर्मी वसील और उसके साथी केशरदेव को पुलिस ने गिरफ्तार कर मेडिकल कॉलेज में खून माफिया के नेटवर्क को खोला था। पुलिस की जांच में सामने आया कि मजदूर की मजबूरी का फायदा उठाकर उसके खून को आठ हजार रुपये में बेच दिया गया था। महराजगंज जिले के पनियरा थाना क्षेत्र के कमता बुजुर्ग निवासी गोरख चौहान (30) की तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर चार और आरोपियों को पकड़ा था।
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पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक के सीसीटीवी फुटेज को डिलीट कर दिया गया था। इसके बाद आखिरी बार पकड़े गए युवक ने बताया कि प्राइवेट ब्लड बैंक से भी उनकी सेटिंग थी। पुलिस को फुटेज तो नहीं मिला, लेकिन सीडीआर की मदद से जांच को तेज कर दिया गया।

सीडीआर में वर्तमान में ब्लड बैंक में एक कर्मचारी की भूमिका सामने आई है, जिसके बाद पुलिस पिछले कई दिनों से गतिविधियों की निगरानी कर रही थी। अब पुलिस के पास कर्मचारी के खिलाफ साक्ष्य भी आ गए हैं। पुलिस आरोपी कर्मचारी की जल्द गिरफ्तारी कर सकती है।

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पकड़े गए संविदाकर्मियों ने भी लैब टेक्नीशियन का नाम कबूला था

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के जो दो कर्मचारी संविदा पर सफाईकर्मी पकड़े गए थे, उन्होंने भी पूछताछ में पुलिस को बताया है कि ब्लड बैंक में तैनात लैब टेक्नीशियन से मरीज के तीमारदार खून के लिए संपर्क करते थे। उन्हीं कर्मचारियों के कहने पर तीमारदार उनसे संपर्क करता था।

इसके बाद संविदाकर्मी, सरगना से संपर्क करते थे, सरगना दलाल के माध्यम से बीआरडी में ब्लड बैंक तक डोनर को भेजता था। वहां दो संविदाकर्मी दलाल से मिलकर डोनर को ब्लड बैंक में ले जाकर बिना लिखा-पढ़ी के खून निकलवा कर दलाल को डोनर को सुपुर्द कर देते थे। रकम को दलाल के माध्यम से सरगना तक भेज देते थे।

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एंबुलेंस मरीज माफिया से भी जुड़े हैं तार
मेडिकल कॉलेज में मरीज एंबुलेंस माफिया और फिर खून माफिया का खेल उजागर हुआ। मामला अलग-अलग सामने आया है, लेकिन तार दोनों के एक दूसरे से कहीं न कहीं जुड़े हुए हैं। दोनों ही गिरोह के सदस्य एक दूसरे परिचित थे और इनके लिए काम करने वाले ठेले वाले भी एक ही है। वहीं ठेले वाले रुपयों के लालच में मरीज को बाहर बेचने के लिए एंबुलेंस वालों को खोजते थे तो खून माफिया के लिए डोनर को। यह वहां पर थोड़ी सी चर्चा के बाद सब कोई जान सकता है, लेकिन यह सब सिर्फ मेडिकल कॉलेज प्रशासन के उन जिम्मेदारों को नहीं नजर आता है, जिन्हें कार्रवाई करनी है। पुलिस की ओर से जुलाई से लेकर सितंबर तक 27 प्राइवेट एंबुलेंस को पकड़ कर सीज किया जा चुका है।

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एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि छह आरोपियों को जेल भिजवाया जा चुका है। कॉल डिटेल और सीडीआर की मदद से पुलिस छानबीन कर रही है। गिराेह में शामिल कुछ लोगों का नाम सामने आया है। उनके खिलाफ साक्ष्य संकलन किया जा रहा है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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