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गोरखपुर: ब्लैक फंगस बरपा रहा कहर, 170 से अधिक मरीजों में हो चुकी है पुष्टि
Mon, 19 Jul 2021 11:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 19 Jul 2021 11:10 AM IST
सार
कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमण से मुक्ति के बाद मरीज ब्लैक फंगस का शिकार हो रहे हैं। हर दिन तीन से चार मरीज पोस्ट कोविड वार्ड में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में ब्लैक फंगस का असर ऐसा है कि डॉक्टरों को ऑपरेशन तक करना पड़ रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ब्लैक फंगस के 29 मरीजों का ऑपरेशन हो चुका है। सात से अधिक मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा मौजूदा समय में गंभीर हाल में पांच मरीज पोस्ट कोविड वार्ड में भर्ती हैं। जबकि अब तक 170 से अधिक मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हो चुकी है।
जानकारी के मुताबिक कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसमें ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस जैसी बीमारियां शामिल हैं। बीआरडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पोस्ट कोविड वार्ड के नोडल व नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि अब तक जिन 29 मरीजों का ऑपरेशन किया गया है, उनमें 10 ऐसे हैं जिनकी आंखों तक में फंगस का असर पहुंच चुका था।
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टीम ने आंखों में इंजेक्शन लगाकर फंगस को काटकर अलग किया। दो मरीज ऐसे हैं, जिनके मस्तिष्क तक फंगस पहुंच गया था। कई मरीजों में रक्त की धमनियों तक में फंगस का असर रहा। डॉ. जायसवाल ने बताया कि राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी मरीज की आंख नहीं निकालनी पड़ी है।
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जानकारी के मुताबिक कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसमें ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस जैसी बीमारियां शामिल हैं। बीआरडी में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पोस्ट कोविड वार्ड के नोडल व नेत्र रोग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि अब तक जिन 29 मरीजों का ऑपरेशन किया गया है, उनमें 10 ऐसे हैं जिनकी आंखों तक में फंगस का असर पहुंच चुका था।
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टीम ने आंखों में इंजेक्शन लगाकर फंगस को काटकर अलग किया। दो मरीज ऐसे हैं, जिनके मस्तिष्क तक फंगस पहुंच गया था। कई मरीजों में रक्त की धमनियों तक में फंगस का असर रहा। डॉ. जायसवाल ने बताया कि राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी मरीज की आंख नहीं निकालनी पड़ी है।
10 मरीजों के जबड़ों तक पहुंचा फंगस
डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस 10 मरीजों के जबड़ों तक पहुंच गया था। इनके जबड़ों से फंगस को काटकर अलग किया गया। ऐसे मरीजों को सलाह दी गई है कि तीन माह तक रुटीन जांच कराते रहें। अगर जांच में लापरवाही हुई तो फंगस का असर शरीर में बढ़ भी सकता है।
जांच के लिए हर दिन आ रहे पांच से सात मरीज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस के मरीजों की जांच लगातार की जा रही है। हर दिन मरीज मिल रहे हैं। अब तक 200 से अधिक मरीजों की कल्चर एंड सेंसटिविटी की जांच हो चुकी है। हर दिन पांच से सात मरीजों की जांच की जा रही है।
सात से अधिक मरीजों की हो चुकी है मौत
जिले में ब्लैक फंगस से सात से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। सभी मौतें लखनऊ के केजीएमयू और निजी अस्पतालों में हुईं हैं। यह सभी शहर के निजी अस्पतालों से रेफर किए गए थे। इनके मस्तिष्क और आंखों में फंगस का असर ऐसा रहा है कि इनकी आंखें तक निकालनी पड़ीं। इसके बाद भी इन्हें बचाया नहीं जा सका।
जांच के लिए हर दिन आ रहे पांच से सात मरीज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि ब्लैक फंगस के मरीजों की जांच लगातार की जा रही है। हर दिन मरीज मिल रहे हैं। अब तक 200 से अधिक मरीजों की कल्चर एंड सेंसटिविटी की जांच हो चुकी है। हर दिन पांच से सात मरीजों की जांच की जा रही है।
सात से अधिक मरीजों की हो चुकी है मौत
जिले में ब्लैक फंगस से सात से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है। सभी मौतें लखनऊ के केजीएमयू और निजी अस्पतालों में हुईं हैं। यह सभी शहर के निजी अस्पतालों से रेफर किए गए थे। इनके मस्तिष्क और आंखों में फंगस का असर ऐसा रहा है कि इनकी आंखें तक निकालनी पड़ीं। इसके बाद भी इन्हें बचाया नहीं जा सका।