फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Atiq Ahmed used to give shelter to miscreants of Gorakhpur

Atiq Ashraf Murder: प्रयागराज से गोरखपुर में चलता था अतीक का सिक्का, यहां के बदमाशों को देता था शरण

Mon, 17 Apr 2023 11:50 AM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 17 Apr 2023 11:50 AM IST
सार

बात 26 जून 2002 की है। उद्योगपति जुगुल किशोर जालान का बदमाशों ने अपहरण किया था। इस घटना से सत्ता तक हिल गई थी। गोरखपुर से अपहरण के बाद पुलिस ने पीछा किया तो पता चला कि बदमाशों ने प्रयागराज में शरण ली है।

विज्ञापन
Atiq Ahmed used to give shelter to miscreants of Gorakhpur
माफिया अतीक अहमद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रयागराज से माफिया अतीक अहमद का सिक्का गोरखपुर में भी चलता था। बड़े बदमाश न सिर्फ उसके नाम का इस्तेमाल करते थे, बल्कि अतीक उनका शरणदाता भी रहा। गोरखपुर के बड़े उद्योगपति जुगुल किशोर जालान के अपहरणकर्ता भी प्रयागराज में अतीक के ठिकाने पर ही शरण लिए थे।

विज्ञापन


उसके संरक्षण की वजह से ही उद्योगपति को खोजने में पुलिस को 25 दिन लगे थे। बाद में इसमें शामिल तीन बदमाशों राधे यादव, अमित मोहन वर्मा और रामायण उपाध्याय को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
विज्ञापन


इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में सूरज ने उगली आग, दिन भर परेशान हो रहे लोग
विज्ञापन
विज्ञापन


इतना ही नहीं, देवरिया जेल से प्रयागराज पेशी पर जाते समय रास्ता बदलकर उसे ले जाया जा रहा था, तब सहजनवां में करीब सात मिनट के लिए वह रुका था। बताया जाता है कि उसके करीबी गाड़ियों के आगे आ गए थे, हालांकि पुलिस ने इसमें कोई लिखापढ़ी नहीं की थी।

बात 26 जून 2002 की है। उद्योगपति जुगुल किशोर जालान का बदमाशों ने अपहरण किया था। इस घटना से सत्ता तक हिल गई थी। गोरखपुर से अपहरण के बाद पुलिस ने पीछा किया तो पता चला कि बदमाशों ने प्रयागराज में शरण ली है।
 

बदमाशों को जैसे ही इसकी भनक लगी, वह उद्योगपति के साथ मौजूद राधे को इसकी सूचना पहुंचा दी और फिर बिहार के गंडक नदी में नाव पर लेकर छिप गया। इसके बाद पुलिस ने उद्योगपति को बरामद कर चौरीचौरा से राधे यादव को गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन पुलिस उसे पेशी पर लेकर आ रही थी।

कुसम्ही जंगल के पास वह भागने की कोशिश किया और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। इस मुठभेड़ के बाद पुलिस फरार अमित मोहन वर्मा और रामायण उपाध्याय की तलाश में जुटी थी कि इसी बीच दोनों बदमाशों ने सूरजकुंड कॉलोनी में नर्सिंग होम चलाने वाले डॉ. जेपी सिंह की रंगदारी न देने पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।

इसे भी पढ़ें: बिना मास्क के सरकारी और निजी संस्थानों में नहीं मिलेगी प्रवेश, गाइडलाइन जारी

इन्हें पकड़ने में पुलिस पूरी तरह से फेल थी। वहीं, बदमाश भागकर प्रयागराज में अपने आका अतीक अहमद के शरण में पहुंच गए थे। रिटायर्ड पुलिस अफसर शिवपूजन बताते हैं, पुलिस ने सटीक मुखबिरी पर प्रयागराज के एक होटल से खाना खाकर निकलते समय अमित मोहन वर्मा और रामायण उपाध्याय को उठा लिया था।

लेकिन, 6 मई 2004 की रात में नार्मल मैदान के पास भागने के दौरान दोनों बदमाश मुठभेड़ में ढेर कर दिए गए थे। तब पुलिस की जांच में यह सामने आया था कि अतीक ने ही दोनों को शरण दी थी। लेकिन, सत्ता का दबाव होने की वजह से फाइल दब गई थी।

प्रयागराज से ही पकड़े गए थे अमित मोहन और रामायण

दोनों बदमाशों के मुठभेड़ को लीड करने करने वाले रिटायर पुलिस अफसर (उस समय सीओ कोतवाली) शिवपूजन यादव बताते हैं, अमित मोहन वर्मा और रामयण उपाध्याय को पुलिस टीम ने प्रयागराज के एक होटल से पकड़ा था। दोनों बदमाशों ने वहीं पर शरण ली थी और फिर पुलिस टीम लेकर आई थी। बाद में बदमाशों ने भागने की कोशिश की थी और नार्मल मैदान के पास मुठभेड़ में मारे गए थे।

गुर्गे लेते थे गोरखपुर के होटल में शरण
2017 में जब अतीक को देवरिया जेल में लाया गया था, तब पेशी से पहले गोरखपुर के होटलों में गुर्गे शरण लिया करते थे। लेकिन, बाद में सख्ती हुई और सरकार की ओर से तय किया गया कि अतीक को हर बार बदले रास्ते से पेशी पर लेकर जाया जाएगा। तब उसके गुर्गे देवरिया के होटलों को अपना ठिकाना बना लिए थे।

इसे भी पढ़ें: गोरखपुर के राप्ती नदी में नहाने गए दो दोस्त डूबे, गोताखोरों की मदद से तलाश में जुटी पुलिस

अतीक का करीबी गुड्डू मुस्लिम भी गोरखपुर में रहा सक्रिय
अतीक का करीबी गुड्डू मुस्लिम भी गोरखपुर में सक्रिय रहा है। जेल प्रशासन के मुताबिक, गुड्डू साल 2001 में गोरखपुर जेल के दो नंबर बैरक में बंद था। इस बैरक को कच्ची बैरक भी कहा जाता था। उस समय परवेज टांडा के साथ गुड्डू मुस्लिम और गोरखपुर के कई कुख्यात बदमाश भी यहां बंद थे।

गुड्डू गोरखपुर निवासी आतंकी दिलशाद मिर्जा बेग का गुर्गा था। गोरखपुर के कोतवाली इलाके में इसी आतंकी के रिश्तेदार सहदाब की मदद से किराये के मकान में रहता था।

इस गिरोह में मेनका टॉकिज (वर्तमान में एडी मॉल) बम ब्लास्ट का आरोपी परवेज टांडा भी शामिल था। परवेज की मौत के बाद गुड्डू ने गोरखपुर छोड़कर अतीक गिरोह का दामन थाम लिया था। सेवानिवृत्त सीओ शिवपूजन यादव बताते हैं कि दिलशाद बेग आईएसआई के संपर्क में आने के बाद गोरखपुर छोड़कर नेपाल में बस गया था। उसने वहां पर भी अपराध शुरू कर दिया था।

मेनका टॉकिज में परवेज ने कराया था ब्लास्ट, गुड्डू मुस्लिम का आया था नाम

गोरखपुर में 90 के दशक में विजय चौक स्थित मेनका टॉकिज में कुख्यात बदमाश परवेज टाडा ने बम ब्लास्ट कराया था। उस वक्त उसका आतंक चरम पर था और गुड्डू उसका सबसे करीबी था। बताया जाता है कि इस घटना में भी परवेज के लिए बम गुड्डू मुस्लिम ने ही मुहैया कराया था। यही नहीं, गुड्डू मुस्लिम ने परवेज के इशारे पर गोरखपुर और आसपास के इलाकों में कई घटनाओं को अंजाम दिया था।

इसे भी पढ़ें: नाक से न बंद हो खून, जोड़ों में हो तेज दर्द तो हीमोफीलिया के लक्षण

परवेज की मौत गुड्डू को अतीक के नजदीक लाई
गोरखपुर से फरार अपराधी परवेज टांडा ने नेपाल में जाली नोटों के कारोबार से खूब पैसा कमाया। वह नेपाल में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच 25 दिसंबर 2009 को नेपाल में परवेज की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद परवेज का गैंग खत्म हो गया।

वहीं, उसका करीबी गुड्डू मुस्लिम ने प्रयागराज की ओर अपना रुख कर लिया। प्रयागराज में वह अतीक के संपर्क में आया। गोरखपुर एसटीएफ ने भी एक बार गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार किया था। तब अतीक ने ही पैरवी कर उसे जेल से बाहर निकालने में मदद की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed