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Gorakhpur News: सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के नाम एक और उपलब्धि, शोध परियोजना को मंजूरी
Sat, 24 Aug 2024 03:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 24 Aug 2024 03:53 AM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु को शोध के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी मिली है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कपिल गुप्ता की शोध परियोजना के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद, लखनऊ की तरफ से 13.36 लाख की मंजूरी दे दी गई है। वह अपराजिता पौधे में स्क्वेलीन सिंथेस और ऑक्सिडो स्क्वेलीन जीन के माध्यम से टरपीनाइडस प्रोडक्शन के लिए शोध करेंगे। इस परियोजना में विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग की डॉ. किरन गुप्ता भी सह-परियोजना अन्वेषक के रूप में कार्य करेंगी।
डॉ. कपिल गुप्ता ने बताया कि परियोजना में अपने फूलों कि सुंदरता और फूलों व जड़ों में कई औषधीय गुण के लिए जाने जाने वाले अपराजिता पौधे पर शोध होगा। इसका इस्तेमाल हम कई तरह के रोगों के उपचार में कर सकते हैं। अपराजिता की जड़ों में पाया जाने वाले टेरेक्सेरोल और अन्य टरपीनाइडस, सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स औषधीय गुण भी रखते हैं। इस शोध प्रस्ताव में अपराजिता के स्क्वेलीन सिंथेस तथा ऑक्सिडो स्क्वेलीन जीन को डीएनए वेक्टर के माध्यम से प्लांट टिश्यू कल्चर विधि से अपराजिता में ट्रांसफर किया जाएगा।
जड़ों को हेयरी रूट कल्चर से संवर्धित किया जाएगा, ताकि उपयोगी सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स का अधिकाधिक मात्रा में उत्पादन किया जा सके और औद्योगिक एवं चिकित्सीय उपायों के लिए इसका प्रयोग किया जा सके। इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. कविता शाह के अलावा सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष व शिक्षकों ने बधाई दी है।
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डॉ. कपिल गुप्ता ने बताया कि परियोजना में अपने फूलों कि सुंदरता और फूलों व जड़ों में कई औषधीय गुण के लिए जाने जाने वाले अपराजिता पौधे पर शोध होगा। इसका इस्तेमाल हम कई तरह के रोगों के उपचार में कर सकते हैं। अपराजिता की जड़ों में पाया जाने वाले टेरेक्सेरोल और अन्य टरपीनाइडस, सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स औषधीय गुण भी रखते हैं। इस शोध प्रस्ताव में अपराजिता के स्क्वेलीन सिंथेस तथा ऑक्सिडो स्क्वेलीन जीन को डीएनए वेक्टर के माध्यम से प्लांट टिश्यू कल्चर विधि से अपराजिता में ट्रांसफर किया जाएगा।
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जड़ों को हेयरी रूट कल्चर से संवर्धित किया जाएगा, ताकि उपयोगी सेकेंडरी मेटाबोलाइट्स का अधिकाधिक मात्रा में उत्पादन किया जा सके और औद्योगिक एवं चिकित्सीय उपायों के लिए इसका प्रयोग किया जा सके। इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. कविता शाह के अलावा सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष व शिक्षकों ने बधाई दी है।
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