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Gorakhpur News: रामगढ़ताल में गर्मी नहीं झेल पा रहीं अमेरिकन व्हाइट डक, अब तक 600 की मौत
Wed, 22 May 2024 04:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 22 May 2024 04:55 AM IST
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फोटो-
पर्यटनस्थल रामगढ़ताल को आकर्षक बनाने के लिए मंगाए गए थे विदेशी मेहमान
एक चूजे पर खर्च हुए थे 600 रुपये, बाकी को दोनों वक्त उतारा जा रहा ताल में
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। रामगढ़ताल को आकर्षक बनाने के लिए मंगाई गईं अमेरिकन व्हाइट डक गोरखपुर की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। 1000 डक में से करीब 600 की मौत हो चुकी है। शेष बची 400 डक को यहां के मौसम के अनुसार ढालने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए इन्हें हर दिन सुबह व शाम ताल में उतारा जा रहा है फिर कुछ देर बाद निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।
रामगढ़ताल अब पर्यटन स्थल है। इसकी खूबसूरती बढ़ाने और यहां आए पर्यटकों को नया एहसास दिलाने के लिए दक्षिण भारत से 1000 अमेरिकन व्हाइट डक मंगाई गई थीं। बताया जा रहा है कि समुद्र के किनारे रखकर पहले इन्हें भारतीय मौसम के अनुसार ढाला गया है। करीब 15 दिन पहले चूजों को शिप से कोलकाता और वहां से सड़क मार्ग से गोरखपुर लाया गया था।
बता दें कि रामगढ़ताल के वाॅटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के संचालन की जिम्मेदारी मुंबई की फर्म ई-सिटी बाइस्कोप इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को मिली है। इसी फर्म ने रामगढ़ताल को और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से करीब 1000 अमेरिकन व्हाइट डक के चूजों को मंगवाया था। फर्म से जुड़े लोगों की मानें तो एक डक पर करीब 600 रुपये खर्च आया। एक सप्ताह से पड़ रही भीषण गर्मी ये चूजे बर्दाश्त नहीं कर पाए। एक-एक कर करीब 600 डक की मौत हो गई। मतलब यह कि इनकी खरीद पर लगाए गए करीब 3 लाख 60 हजार रुपये बर्बाद हो गए। अब शेष बची करीब 400 डक की देखरेख की जा रही है। इन्हें सुबह कुछ घंटों के लिए उनको रामगढ़ताल में छोड़ते हैं और जैसे ही धूप तीखी होती है, उनको फिर अंदर रख दिया जाता है। यही काम शाम को भी होता है।
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संचालक फर्म से जुड़े आशीष शाही ने बताया कि चूजे अत्यधिक गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाए। अब शेष बचे चूजाें की देखरेख व उनके खानपान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब इनकी उम्र लगभग दो माह हो चुकी है।
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पर्यटनस्थल रामगढ़ताल को आकर्षक बनाने के लिए मंगाए गए थे विदेशी मेहमान
एक चूजे पर खर्च हुए थे 600 रुपये, बाकी को दोनों वक्त उतारा जा रहा ताल में
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। रामगढ़ताल को आकर्षक बनाने के लिए मंगाई गईं अमेरिकन व्हाइट डक गोरखपुर की गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं। 1000 डक में से करीब 600 की मौत हो चुकी है। शेष बची 400 डक को यहां के मौसम के अनुसार ढालने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए इन्हें हर दिन सुबह व शाम ताल में उतारा जा रहा है फिर कुछ देर बाद निकालकर सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।
रामगढ़ताल अब पर्यटन स्थल है। इसकी खूबसूरती बढ़ाने और यहां आए पर्यटकों को नया एहसास दिलाने के लिए दक्षिण भारत से 1000 अमेरिकन व्हाइट डक मंगाई गई थीं। बताया जा रहा है कि समुद्र के किनारे रखकर पहले इन्हें भारतीय मौसम के अनुसार ढाला गया है। करीब 15 दिन पहले चूजों को शिप से कोलकाता और वहां से सड़क मार्ग से गोरखपुर लाया गया था।
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बता दें कि रामगढ़ताल के वाॅटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के संचालन की जिम्मेदारी मुंबई की फर्म ई-सिटी बाइस्कोप इंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को मिली है। इसी फर्म ने रामगढ़ताल को और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से करीब 1000 अमेरिकन व्हाइट डक के चूजों को मंगवाया था। फर्म से जुड़े लोगों की मानें तो एक डक पर करीब 600 रुपये खर्च आया। एक सप्ताह से पड़ रही भीषण गर्मी ये चूजे बर्दाश्त नहीं कर पाए। एक-एक कर करीब 600 डक की मौत हो गई। मतलब यह कि इनकी खरीद पर लगाए गए करीब 3 लाख 60 हजार रुपये बर्बाद हो गए। अब शेष बची करीब 400 डक की देखरेख की जा रही है। इन्हें सुबह कुछ घंटों के लिए उनको रामगढ़ताल में छोड़ते हैं और जैसे ही धूप तीखी होती है, उनको फिर अंदर रख दिया जाता है। यही काम शाम को भी होता है।
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संचालक फर्म से जुड़े आशीष शाही ने बताया कि चूजे अत्यधिक गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पाए। अब शेष बचे चूजाें की देखरेख व उनके खानपान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अब इनकी उम्र लगभग दो माह हो चुकी है।