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Gorakhpur News: सौर ऊर्जा उपकरण होंगे ज्यादा टिकाऊ, पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित

Sun, 21 Jun 2026 02:19 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jun 2026 02:19 AM IST
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Akash Anand, a physics research scholar at MMMUT, has developed a new technique; an application for a patent will be filed.
गोरखपुर। सौर ऊर्जा के उपकरण अब पहले से ज्यादा टिकाऊ तो होंगे ही पर्यावरण को भी उनसे कोई खतरा नहीं होगा। अब पैराबोलिक बैंडगैप ग्रेडिंग की नई पद्धति से उपकरण विकसित होंगे। यह तकनीक मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भौतिकी के शोधार्थी आकाश आनंद वर्मा ने शोध निर्देशक विकसित की है। अब इसे पेटेंट कराए जाने की तैयारी है।
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बाजार में जो सौर उपकरण उपलब्ध हैं, उनके निर्माण में लेड का इस्तेमाल होता है। लेड की उम्र भी 10-20 साल तक होती है। इसकी अवधि पूरी होने के बाद जब इसे नष्ट किया जाता है तो यह हानिकारक रसायन छोड़ता है। अब तक लेड से बनने वाले सौर उपकरण की दक्षता बढ़ाने को लेकर प्रयास किए जा रहे थे। पहली बार पैराबोलिक बैंडगैप ग्रेडिंग से सौर ऊर्जा उपकरण विकसित करने की तकनीक सामने लाई गई है।
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इस शोध से जुड़े विभिन्न तथ्य अलग-अलग नौ जर्नल में प्रकाशित हुए हैं।शोध का मुख्य उद्देश्य लेड-फ्री पेरोव्स्काइट सोलर सेल्स की क्षमता को बढ़ाना था। यह तकनीक पारंपरिक सौर सेल्स में उपयोग होने वाले विषैले लेड की जगह सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल विकल्प प्रदान करती है।
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शोधार्थी आकाश ने बताया कि शोध में पाया गया कि पैराबोलिक बैंडगैप ग्रेडिंग की नई तकनीक सूर्य के प्रकाश पावर कन्वर्जन एफिशिएंसी (ऊर्जा के एक रूप से दूसरे रुप रूपांतरण) को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है। इससे सौर सेल के भीतर बिजली का प्रवाह बेहतर होता है। यह तकनीक कम लागत वाले, उच्च क्षमता के सौर पैनलों के विकास में सहायक हो सकती है। शोध में कंप्यूटेशनल सिमुलेशंस के माध्यम से ऐसे डिजाइन पैरामीटर्स की पहचान की गई है।

अगली पीढ़ी के सौर सेल से बढ़ेगा बिजली उत्पादन
प्रो. डीके द्विवेदी ने बताया कि शोध के तहत पहले लीनियर ग्रेडिंग पर काम किया गया। बिना लेड के इसे पैराबोलिंग ग्रेडिंग में चेंज किया गया तो एफिशिएंसी और बढ़ रही थी। इस शोध से अगली पीढ़ी के सौर सेल अधिक बिजली का उत्पादन कर सकेंगे। यह भविष्य में स्मार्ट भवनों, सोलर विंडो और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में अहम साबित होंगे।



बोलीं कुलपतियह शोध वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए एमएमएमयूटी में किए जा रहे उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक कार्यों का उत्कृष्ट उदाहरण है। दक्ष एवं पर्यावरण अनुकूल सौर सेल तकनीक का विकास सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति
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