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Gorakhpur News: प्रदूषण की मार...विकास की खुशी से पहले बना रही बीमार

Tue, 17 Oct 2023 10:31 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 17 Oct 2023 10:31 AM IST
सार

गोरखपुर शहर में सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 162 दर्ज किया गया। क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार इसकी गति मध्यम है। लेकिन यह धीरे धीरे बढ़ रही है। 15 अक्तूबर को यह 140 और 14 अक्तूबर को 144 पर रहा है।

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Air quality crosses danger level as weather changes
गोरखपुर में उड़ती धूल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर शहर में विकास के लिए निर्माण कार्य होने से मुख्य सड़कों पर हर तरफ धूल उड़ रही है। इन कार्यों के पूरा होने पर विकास की खुशी तो मिलेगी, फिलहाल हालात सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं, जो लोगों की सेहत को बिगाड़ रहे हैं।

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दरअसल मौसम के बदलते ही शहर की आबोहवा और तेजी से बिगड़ रही है। यही वजह है कि हवा का गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) तेजी से बढ़कर खतरे के स्तर को पार कर गया है। एक्यूआई सूचकांक 100 पीएम होना चाहिए, लेकिन सोमवार को यह 162 पीएम रहा।
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प्रदूषित हवा हृदय, फेफड़े और अस्थमा के मरीजों के लिए बहुत ही घातक हो सकती है। यही नहीं, त्वचा और आंखों से जुड़ी दिक्कतें भी बढ़ रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चेतावनी जारी की है कि गोरखपुर में सप्ताह भर हवा की गुणवत्ता खराब रहेगी। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह है कि सेहत को लेकर खुद सजगता बरतें।
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पर्यावरण विशेषज्ञ प्रो. गोविंद पांडेय कहते हैं- वातावरण के तापमान में गिरावट आने से एयर पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है। यह वायुमंडल के ऊपरी सतह में नहीं जा पाता। इस दौरान वाहनों से निकलने वाला धुंआ, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल सहित अन्य तत्वों के कारण वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में वातावरण के तापमान में काफी गिरावट आई है। एक सप्ताह पूर्व अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्यिस और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस था। वर्तमान में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 21 तक पहुंच गया है। इसलिए इसका असर नजर आ रहा है। उधर, क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों ने निर्माण कार्य स्थलों पर पानी के नियमित छिड़काव के निर्देश दिए हैं।

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अभी और बढ़ सकता है एक्यूआई

गोरखपुर शहर में सोमवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स 162 दर्ज किया गया। क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार इसकी गति मध्यम है। लेकिन यह धीरे धीरे बढ़ रही है। 15 अक्तूबर को यह 140 और 14 अक्तूबर को 144 पर रहा है। जानकारों का कहना है कि आगे चलकर इसके बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। 17 अक्तूबर से लेकर 19 अक्तूबर तक वायु गुणवत्ता 151 से लेकर 160 के बीच में बनी रहेगी।

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वाहनों के गुजरने पर उड़ रही धूल

गोरखपुर शहर के भीतर जगह-जगह निर्माण कार्य चल रहे हैं। निर्माण कार्य स्थलों पर खूब धूल उड़ रही है। एक किमी चलने पर लोगों के वाहन से लेकर कपड़े तक धूल ही धूल नजर आ रही है। सोमवार की दोपहर 01.40 बजे नौसढ़ निवासी शिवांश यादव अपनी बेटी को सिविल लाइंस स्थित स्कूल से लेकर लौट रहे थे। वह किसी जरूरी काम से पैडलेगंज की ओर चले गए। वहां से टीपी नगर तक जाने में उनको धूल का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि रोजाना की यही हालत है। पैडलेगंज से नौसड़ तक आने जाने में लोग धूल से परेशान होते हैं। आजाद चौक पर यातायात संभाल रहे होमगार्ड जवान मास्क पहने नजर आए। होमगार्ड ने बताया कि दिनभर इतनी धूल उड़ती है कि सांस और आखों में जलन की दिक्कत महसूस हो रही है। कुछ ऐसी ही हालत जेल बाईपास रोड से बरगदवां तक फोरलेन तक की है। यहां पर बरगदवां की ओर से स्पोर्ट्स कॉलेज की ओर जा रहे राहगीर अनुराग और उनके दोस्त धूल उड़ने से परेशान हो गए। बाइक सवार युवकों ने कहा कि जब तब सड़क नहीं बन जाएगी, तब तक समस्या बनी रहेगी।

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एयर क्वालिटी इंडेक्स मानक
0-50 अच्छा
51-100 संतोषजनक
101-200 थोड़ा खराब
201-300 खराब
301-400 अत्यंत खराब
401-500 गंभीर


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धूल से होती है कई बीमारियां

छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. नसीम अरशद ने कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाली धूल से आंखों-त्वचा की एलर्जी, दमा, सर्दी-खांसी समेत कई तरह की दिक्कतें होती हैं। जहां लंबे समय तक निर्माण कार्य चलता है, उसके अगल-बगल जिनके घर हैं, उनमें भी धूल की वजह से बीमारियां अधिक होती हैं। ओपीडी में हर दिन ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिन्हें धूल की वजह से दिक्क्त होती है। धूल और धुएं की वजह से फेफड़े में भी इंफेक्शन होता है। सर्दियों में ऐसे मामले अधिक तकलीफ देते हैं। इसलिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे मुंह व आंख को ढककर ही धूल वाली जगहों से गुजरें।

क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अनिल शर्मा ने कहा कि सड़क निर्माण कार्य करा रही कार्यदायी संस्थाओं को निर्माण स्थल पर पानी के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया है कि नगर निगम के टैंकर की मदद ले सकते हैं।

 
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