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Gorakhpur News: शहर में लगभग 17 हजार अवैध निर्माण, ध्वस्त होंगे ये सभी - समझिए कैसे करते हैं कंपाउंडिंग का खेल
Wed, 03 Apr 2024 01:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 03 Apr 2024 01:03 PM IST
सार
शहर में बिना नक्शा पास कराए बने 17 हजार से अधिक भवनों को ध्वस्तीकरण से राहत नहीं मिलेगी।
ऐसा इसलिए कि हाईकोर्ट ने एक आदेश में कंपाउंडिंग अर्थात समन की प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। हालांकि, इनके ध्वस्तीकरण का आदेश जीडीए ने पहले ही जारी रख रखा है।
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जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्धन।
- फोटो : अमर उजाला(
विस्तार
शहर में बिना नक्शा पास कराए बने 17 हजार से अधिक भवनों को ध्वस्तीकरण से राहत नहीं मिलेगी। ऐसा इसलिए कि हाईकोर्ट ने एक आदेश में कंपाउंडिंग अर्थात समन की प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। जीडीए, शहर में नक्शा के विपरीत बने कॉमर्शियल और आवासीय भवनों को चिह्नित कर ध्वस्तीकरण का नोटिस पहले ही दे चुका है।
छह महीने में ऐसे 35 भवनों को ध्वस्त भी किया जा चुका है। अब बाकी भवन मालिकों को भी हाईकोर्ट के इस आदेश से झटका लगेगा।
दरअसल, जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने पदभार ग्रहण करने के बाद ऐसे भवनों को लेकर सख्ती शुरू कर दी थी। बिना नक्शा पास कराए भवन निर्माण कराने वालों पर प्राधिकरण के प्रवर्तन दल ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर उन्हें सील करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी थी।
इस दौरान अलग-अलग इकाइयों की ओर से शहर में कुल 23,595 भवनों को चिह्नित किया गया था, जिन्होंने कंपाउंडिंग नियमों को दरकिनार कर अपने भवन के निर्माण करवाए थे। इनमें से साढ़े पांच हजार भवन स्वामियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है।
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छह महीने में ऐसे 35 भवनों को ध्वस्त भी किया जा चुका है। अब बाकी भवन मालिकों को भी हाईकोर्ट के इस आदेश से झटका लगेगा।
दरअसल, जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने पदभार ग्रहण करने के बाद ऐसे भवनों को लेकर सख्ती शुरू कर दी थी। बिना नक्शा पास कराए भवन निर्माण कराने वालों पर प्राधिकरण के प्रवर्तन दल ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर उन्हें सील करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी थी।
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इस दौरान अलग-अलग इकाइयों की ओर से शहर में कुल 23,595 भवनों को चिह्नित किया गया था, जिन्होंने कंपाउंडिंग नियमों को दरकिनार कर अपने भवन के निर्माण करवाए थे। इनमें से साढ़े पांच हजार भवन स्वामियों को नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है।
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जीडीए ने पार्किंग स्पेस को लेकर पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी थी।( फाइल फोटो)
- फोटो : rajesh kumar
चूंकि, इसमें सभी को जारी नोटिस की समयावधि अलग-अलग है, ऐसे में अभी इन्हें लेकर फैसला नहीं हो सका है। करीब 17,500 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश जीडीए की तरफ से पहले ही जारी किया जा चुका है। इनके द्वारा अपने आवेदन देकर या अन्य वाद दाखिल किए गए थे, लेकिन इन्हें भी अस्वीकार कर दिया गया है।
जीडीए सूत्रों ने बताया कि शहर में लोग, बाजार के सर्किल दाम से तीन से चार गुने दाम पर जमीन खरीद लेते हैं। यहां लोग अपने व्यावसायिक उपयोग के अनुसार पूरी जगह पर निर्माण भी करवा लेते हैं। सुरक्षा मानकों के साथ जीडीए के मानकों की अनदेखी कर खुद के आर्थिक लाभ के चक्कर में लोग ऐसा निर्माण कर शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाते हैं।
ऐसे होता है कंपाउंडिंग में खेल
जीडीए के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो किसी आवासीय या काॅमर्शियल बिल्डिंग की कंपाउंडिंग की जाती है तो उसमें अतिरिक्त फायदा लेकर अवैध बिल्डिंग में 25 प्रतिशत हिस्से की कंपाउंडिंग कर दी जाती है। भवन मालिक से 75 फीसदी हिस्सा तोड़ने का शपथपत्र लिया जाता है, जिसमें लिखा होता है- ‘टू बी डिस्मेंटल’।
इस खेल में प्राधिकरण के कर्मचारियों की मिलीभगत भी होती है। तभी अवैध बिल्डिंग की कंपाउंडिंग संभव होती है, जबकि नियमानुसार अवैध भवन के 75 फीसदी हिस्से को तोड़ना जरूरी है। इस हिस्से के टूटने की वीडियो और फोटोग्राफी कराने का भी प्रावधान है। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही कंपाउंडिंग होनी चाहिए।
जीडीए सूत्रों ने बताया कि शहर में लोग, बाजार के सर्किल दाम से तीन से चार गुने दाम पर जमीन खरीद लेते हैं। यहां लोग अपने व्यावसायिक उपयोग के अनुसार पूरी जगह पर निर्माण भी करवा लेते हैं। सुरक्षा मानकों के साथ जीडीए के मानकों की अनदेखी कर खुद के आर्थिक लाभ के चक्कर में लोग ऐसा निर्माण कर शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाते हैं।
ऐसे होता है कंपाउंडिंग में खेल
जीडीए के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो किसी आवासीय या काॅमर्शियल बिल्डिंग की कंपाउंडिंग की जाती है तो उसमें अतिरिक्त फायदा लेकर अवैध बिल्डिंग में 25 प्रतिशत हिस्से की कंपाउंडिंग कर दी जाती है। भवन मालिक से 75 फीसदी हिस्सा तोड़ने का शपथपत्र लिया जाता है, जिसमें लिखा होता है- ‘टू बी डिस्मेंटल’।
इस खेल में प्राधिकरण के कर्मचारियों की मिलीभगत भी होती है। तभी अवैध बिल्डिंग की कंपाउंडिंग संभव होती है, जबकि नियमानुसार अवैध भवन के 75 फीसदी हिस्से को तोड़ना जरूरी है। इस हिस्से के टूटने की वीडियो और फोटोग्राफी कराने का भी प्रावधान है। इसकी रिपोर्ट मिलने के बाद ही कंपाउंडिंग होनी चाहिए।
जीडीए ने बिना नक्शा पास कराए गलत दस्तावेजों के आधार पर संचालित पेट्रोल पंप सीज किया था
- फोटो : अमर उजाला
अब नहीं हो पाएगा कंपाउंडिंग का खेल
अपर मुख्य सचिव आवास ने जारी शासनादेश में कहा है कि हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश का कड़ाई से पालन किया जाएगा। स्वीकृत मानचित्रों के अनुरूप ही स्थल पर निर्माण कार्य सुनिश्चित होंगे। स्वीकृत मानचित्र के इतर निर्माण होने की स्थिति में ऐसे निर्माणों के विरुद्ध भवन निर्माण एवं विकास उपविधि, तय नियमों, शासनादेशों और नियमावली का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
साफ लिखा है कि अक्सर भवन स्वामियों द्वारा पास किए गए नक्शे के इतर निर्माण कर लिया जाता है। शासन ऐसे निर्माण को शुल्क लेकर समय-समय पर समन यानी कंपाउंडिंग के लिए नीति लेकर आते रहा है। इसके आधार पर अवैध निर्माणों को वैध कर दिया जाता था। इसे लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। इसके आधार पर रोक लगा दी गई है। अब अवैध भवनों की कंपाउंडिंग नहीं हो सकेगी।
अपर मुख्य सचिव आवास ने जारी शासनादेश में कहा है कि हाईकोर्ट की ओर से पारित आदेश का कड़ाई से पालन किया जाएगा। स्वीकृत मानचित्रों के अनुरूप ही स्थल पर निर्माण कार्य सुनिश्चित होंगे। स्वीकृत मानचित्र के इतर निर्माण होने की स्थिति में ऐसे निर्माणों के विरुद्ध भवन निर्माण एवं विकास उपविधि, तय नियमों, शासनादेशों और नियमावली का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।
साफ लिखा है कि अक्सर भवन स्वामियों द्वारा पास किए गए नक्शे के इतर निर्माण कर लिया जाता है। शासन ऐसे निर्माण को शुल्क लेकर समय-समय पर समन यानी कंपाउंडिंग के लिए नीति लेकर आते रहा है। इसके आधार पर अवैध निर्माणों को वैध कर दिया जाता था। इसे लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। इसके आधार पर रोक लगा दी गई है। अब अवैध भवनों की कंपाउंडिंग नहीं हो सकेगी।
चार अवैध प्लाटिंग में बने कार्यालयों पर चला जीडीए ने पिछले दिनों बुलडोजर चलाया था
शहर में बिना नक्शे के चल रहे अस्पताल, स्कूल
शहर में व्यावसायिक प्रयोग करते हुए बड़ी संख्या में अस्पताल, स्कूल और शॉपिंग कांप्लेक्स संचालित हो रहे हैं। कंपाउंडिंग के नियमों को अगर ये मानते तो अपने व्यावसायिक परिसर का निर्माण ही नहीं करवा पाते।
अगर कोई भवन मालिक आवासीय एरिया में आवासीय नक्शा मंजूर कराकर उसमें कामर्शियल गतिविधियां जैसे नर्सिंग होम, बरातघर, दुकान, ऑफिस आदि चला रहा है तो उसे कंपाउंडिंग करवाने के लिए परिसर के आगे की रोड की चौड़ाई 24 फुट होना जरूरी है। लेकिन, यहां बिना मानकों के धड़ल्ले से अवैध तरीके से भवन संचालित हो रहे हैं।
उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार न्यायालय के आदेशों का पालन करवाया जाएगा। जीडीए ने तो पहले से ही ऐसे भवनों की सूची तैयार कर उन्हें नोटिस भी भेज दिया था। नए नियमों के तहत अब कंपाउंडिंग नहीं हो सकेगी।
शासन स्तर से अलग-अलग बिंदुओं पर दिशा-निर्देश आएंगे। अगर कंपाउंडिंग के लिए आवेदन आए होंगे तो उनकी जांच करवाई जाएगी। जीडीए अवैध तरीकों के निर्माण पर सख्ती से कार्रवाई करेगा।
शहर में व्यावसायिक प्रयोग करते हुए बड़ी संख्या में अस्पताल, स्कूल और शॉपिंग कांप्लेक्स संचालित हो रहे हैं। कंपाउंडिंग के नियमों को अगर ये मानते तो अपने व्यावसायिक परिसर का निर्माण ही नहीं करवा पाते।
अगर कोई भवन मालिक आवासीय एरिया में आवासीय नक्शा मंजूर कराकर उसमें कामर्शियल गतिविधियां जैसे नर्सिंग होम, बरातघर, दुकान, ऑफिस आदि चला रहा है तो उसे कंपाउंडिंग करवाने के लिए परिसर के आगे की रोड की चौड़ाई 24 फुट होना जरूरी है। लेकिन, यहां बिना मानकों के धड़ल्ले से अवैध तरीके से भवन संचालित हो रहे हैं।
उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने बताया कि शासन की मंशा के अनुसार न्यायालय के आदेशों का पालन करवाया जाएगा। जीडीए ने तो पहले से ही ऐसे भवनों की सूची तैयार कर उन्हें नोटिस भी भेज दिया था। नए नियमों के तहत अब कंपाउंडिंग नहीं हो सकेगी।
शासन स्तर से अलग-अलग बिंदुओं पर दिशा-निर्देश आएंगे। अगर कंपाउंडिंग के लिए आवेदन आए होंगे तो उनकी जांच करवाई जाएगी। जीडीए अवैध तरीकों के निर्माण पर सख्ती से कार्रवाई करेगा।