फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Abhishek's controversial past remained hidden behind the khaki uniform!

Gorakhpur News: खाकी की आड़ में छिपा रहा अभिषेक का विवादित अतीत!

Sun, 02 Aug 2026 02:40 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2026 02:40 AM IST
विज्ञापन
Abhishek's controversial past remained hidden behind the khaki uniform!
- गंभीर आरोपों में घिरे बर्खास्त सिपाही पर पहले भी उठते रहे थे सवाल
विज्ञापन

- एक निलंबन और तीन गैरहाजिरी मामलों की जांच के बाद भी मिलती रही तैनाती
- पिपराइच से गोरखनाथ और डॉयल 112 तक विवादों में रहा नाम
गोरखपुर। बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्याकांड के आरोपी बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव का अपराध से पहले का सफर भी सवालों के घेरे में रहा है। खाकी पहनकर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाला अभिषेक खुद अपने सर्विस रिकॉर्ड को लेकर विवादों में घिरा रहा। विभागीय कार्रवाई, मौखिक शिकायतों और निलंबन के बावजूद उसकी तैनाती जारी रही।
गाजीपुर जिले के सादियाबाद थाना क्षेत्र के हंसराज चौरा निवासी अभिषेक यादव करीब आठ वर्षों तक गोरखपुर जिले में ही अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहा। पिपराइच, गोरखनाथ थाना और डॉयल 112 में उसकी तैनाती के दौरान व्यवहार और कार्यशैली को लेकर साथी पुलिसकर्मियों में नाराजगी की बात सामने आती रही। पुलिस रिकाॅर्ड के अनुसार, अभिषेक यादव के व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी कई बार मौखिक शिकायतें अधिकारियों तक पहुंची थीं। हालांकि कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। इसके बावजूद उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया कई बार चली।
विज्ञापन

--
एक बार निलंबन, जांचों का लंबा सिलसिला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अभिषेक यादव को दो फरवरी 2025 को निलंबित किया गया था। इस मामले की विभागीय जांच एसपी दक्षिणी दिनेश कुमार पुरी के स्तर पर लंबित बताई जा रही है। इसके अलावा गोरखनाथ थाने में दर्ज प्राथमिकी धारा 110/127 (2) की विवेचना के दौरान 75 (1), 336 (2), 336 (3), 319 (2), 318 (4), 338, 340 (2) बीएनएस की धाराएं बढ़ाई गई थीं और आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। इसकी विवेचना एसएसआई राजनाथ यादव कर रहे थे। ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के मामलों में भी विभाग ने उससे स्पष्टीकरण मांगा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
लंबित जांच के बीच फिर मिली तैनाती
निलंबन के बाद 15 सितंबर 2025 को अभिषेक यादव की बहाली हुई थी। इसके बाद उसे डॉयल 112 में तैनाती दी गई। मौजूदा मामले के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि विभागीय जांच लंबित रहने के बावजूद उसकी तैनाती किन परिस्थितियों में की गई। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
--
आठ साल तक एक ही जिले में कैसे टिका रहा अभिषेक
अभिषेक यादव की करीब आठ वर्षों तक गोरखपुर जिले में लगातार तैनाती भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस विभाग में सामान्य स्थानांतरण नीति के संदर्भ में यह भी देखा जा रहा है कि उसकी लंबे समय तक एक ही जिले में तैनाती किन प्रशासनिक कारणों से बनी रही।
--
अब अपराध के साथ खंगाला जा रहा सर्विस रिकॉर्ड
बच्ची हत्याकांड के बाद पुलिस अब आरोपी के अपराध से जुड़े पहलुओं के साथ-साथ उसके सर्विस रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर रही है। जांच का दायरा केवल घटना तक सीमित नहीं है बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि लगातार शिकायतों और विभागीय कार्रवाई के बावजूद उसे जिम्मेदारियां कैसे मिलती रहीं।


बच्ची हत्याकांड की विवेचना प्राथमिकता के आधार पर की जा रही है। इसके साथ ही आरोपी के सर्विस रिकॉर्ड, विभागीय कार्रवाई और तैनाती से जुड़े सभी तथ्यों की भी समीक्षा की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- निमिष पाटील, एसपी सिटी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed