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Gorakhpur News: मोबाइल से दूरी, मैदान में सक्रियता... एबीवीपी की ''फोन पार्किंग'' मुहिम
Fri, 10 Jul 2026 02:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 10 Jul 2026 02:54 AM IST
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महंगी फीस के खिलाफ जल्द शुरू होगा आंदोलन
छात्रसंघ चुनाव समयबद्ध ढंग से कराया जाना जरूरी
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने देशभर में ''फोन पार्किंग'' अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं के स्क्रीन टाइम को एक्टिविटी टाइम में बदलना है, ताकि युवा मोबाइल पर समय गंवाने के बजाय समाज, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों में अधिक भागीदारी निभाएं।
यह कहना है एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह का। वह परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के मद्देनजर शहर में हैं। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में उन्होंने शिक्षण संस्थानों में महंगी फीस, छात्रसंघ चुनाव, संगठन की योजनाओं और उपलब्धियों पर खुलकर विचार रखे।
अभय प्रताप सिंह ने कहा कि एबीवीपी शिक्षा के व्यवसायीकरण और लगातार बढ़ रही फीस का पुरजोर विरोध करती है। बढ़ती फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसे लेकर परिषद जल्द ही आंदोलन शुरू करेगी और विभिन्न विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में छात्रों को जोड़कर व्यापक अभियान चलाएगी। नए कोर्स, परीक्षा, मूल्यांकन, बैक पेपर, अंक सुधार के लिए छात्रों से अधिक शुल्क लिए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में खास अभियान चलाया जाएगा।
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उन्होंने छात्रसंघ चुनाव न कराए जाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताया। उनका कहना था कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सबसे बड़ा मंच हैं। परिषद ने नियमित छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की मांग को लेकर यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और छात्र हितों की रक्षा के लिए छात्रसंघ चुनाव समयबद्ध ढंग से कराए जाने चाहिए। परिषद आने वाले समय में शिक्षा, छात्र अधिकार और युवाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर संघर्ष को और तेज करेगी।
उन्होंने कहा कि 2025 तक अभाविप से 77 लाख से अधिक कार्यकर्ता जुड़े हैं। कार्यकर्ताओं में गुणात्मक बदलाव लाने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता की किसी न किसी संगठनात्मक गतिविधि में सहभागिता अनिवार्य की गई है। परिषद चाहती है कि कार्यकर्ता केवल डिजिटल माध्यम तक सीमित न रहें बल्कि समाज के बीच जाकर नेतृत्व, सेवा और संगठनात्मक कौशल विकसित करें। कार्यकर्ताओं को सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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छात्रसंघ चुनाव समयबद्ध ढंग से कराया जाना जरूरी
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने देशभर में ''फोन पार्किंग'' अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं के स्क्रीन टाइम को एक्टिविटी टाइम में बदलना है, ताकि युवा मोबाइल पर समय गंवाने के बजाय समाज, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों में अधिक भागीदारी निभाएं।
यह कहना है एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह का। वह परिषद के स्थापना दिवस कार्यक्रम के मद्देनजर शहर में हैं। बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत में उन्होंने शिक्षण संस्थानों में महंगी फीस, छात्रसंघ चुनाव, संगठन की योजनाओं और उपलब्धियों पर खुलकर विचार रखे।
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अभय प्रताप सिंह ने कहा कि एबीवीपी शिक्षा के व्यवसायीकरण और लगातार बढ़ रही फीस का पुरजोर विरोध करती है। बढ़ती फीस के कारण आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसे लेकर परिषद जल्द ही आंदोलन शुरू करेगी और विभिन्न विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में छात्रों को जोड़कर व्यापक अभियान चलाएगी। नए कोर्स, परीक्षा, मूल्यांकन, बैक पेपर, अंक सुधार के लिए छात्रों से अधिक शुल्क लिए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में खास अभियान चलाया जाएगा।
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उन्होंने छात्रसंघ चुनाव न कराए जाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत बताया। उनका कहना था कि छात्रसंघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सबसे बड़ा मंच हैं। परिषद ने नियमित छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की मांग को लेकर यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने और छात्र हितों की रक्षा के लिए छात्रसंघ चुनाव समयबद्ध ढंग से कराए जाने चाहिए। परिषद आने वाले समय में शिक्षा, छात्र अधिकार और युवाओं से जुड़े सभी मुद्दों पर संघर्ष को और तेज करेगी।
उन्होंने कहा कि 2025 तक अभाविप से 77 लाख से अधिक कार्यकर्ता जुड़े हैं। कार्यकर्ताओं में गुणात्मक बदलाव लाने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता की किसी न किसी संगठनात्मक गतिविधि में सहभागिता अनिवार्य की गई है। परिषद चाहती है कि कार्यकर्ता केवल डिजिटल माध्यम तक सीमित न रहें बल्कि समाज के बीच जाकर नेतृत्व, सेवा और संगठनात्मक कौशल विकसित करें। कार्यकर्ताओं को सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।