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Gorakhpur News: राप्ती और सरयू की जलीय सीमा पर पुलिस का पहरा, नाविकों का होगा सत्यापन
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गोरखपुर। जलीय सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गोरखपुर पुलिस ने नई पहल शुरू की है। राप्ती और सरयू नदियों के जरिए होने वाली तस्करी और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ ही आपात परिस्थितियों में मदद के लिए नदी घाटों से जुड़े नाविकों का सत्यापन कराया जाएगा। पुलिस नाविकों का पूरा विवरण जुटाकर अपना डाटा तैयार करेगी।
विशेष अभियान के तहत पुलिस की टीमें नदी घाटों पर पहुंचकर नाविकों का सत्यापन करेंगी। इसके लिए प्रत्येक नाविक से निर्धारित फार्म भरवाया जाएगा, जिसमें उसका नाम, स्थायी पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा। तैयार किए गए डाटा के आधार पर पुलिस को नावों के दुरुपयोग, संदिग्ध गतिविधियों और किसी भी आपराधिक मामले में संबंधित व्यक्ति तक पहुंचने में आसानी होगी।
सत्यापन के दौरान पुलिस ऐसे कुशल नाविकों और तैराकों की पहचान भी करेगी, जो डूबने जैसी घटनाओं में लोगों की जान बचाने में सक्षम हों। बाढ़ या किसी अन्य जल आपदा के समय इन नाविकों की मदद ली जाएगी। बेहतर काम करने वाले नाविकों को पुलिस के सहयोगी के रूप में जोड़ने की योजना है। उन्हें स्थानीय स्तर पर सम्मानित कर पुलिस और ग्रामीणों के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। जलीय सीमा की निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए गोरखपुर पुलिस ने आसपास के जिलों की पुलिस के साथ भी समन्वय स्थापित किया है। देवरिया के बरहज और सलेमपुर, मऊ के मधुबन और आजमगढ़ के बूढ़नपुर थाना क्षेत्र की पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त निगरानी की रणनीति बनाई गई है।
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एसपी दक्षिणी दिनेश पुरी का कहना है कि जल मार्गों पर निगरानी बढ़ने से तस्करों और अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय नाविकों की भागीदारी से नदी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
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विशेष अभियान के तहत पुलिस की टीमें नदी घाटों पर पहुंचकर नाविकों का सत्यापन करेंगी। इसके लिए प्रत्येक नाविक से निर्धारित फार्म भरवाया जाएगा, जिसमें उसका नाम, स्थायी पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाएगा। तैयार किए गए डाटा के आधार पर पुलिस को नावों के दुरुपयोग, संदिग्ध गतिविधियों और किसी भी आपराधिक मामले में संबंधित व्यक्ति तक पहुंचने में आसानी होगी।
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सत्यापन के दौरान पुलिस ऐसे कुशल नाविकों और तैराकों की पहचान भी करेगी, जो डूबने जैसी घटनाओं में लोगों की जान बचाने में सक्षम हों। बाढ़ या किसी अन्य जल आपदा के समय इन नाविकों की मदद ली जाएगी। बेहतर काम करने वाले नाविकों को पुलिस के सहयोगी के रूप में जोड़ने की योजना है। उन्हें स्थानीय स्तर पर सम्मानित कर पुलिस और ग्रामीणों के बीच समन्वय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। जलीय सीमा की निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए गोरखपुर पुलिस ने आसपास के जिलों की पुलिस के साथ भी समन्वय स्थापित किया है। देवरिया के बरहज और सलेमपुर, मऊ के मधुबन और आजमगढ़ के बूढ़नपुर थाना क्षेत्र की पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त निगरानी की रणनीति बनाई गई है।
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एसपी दक्षिणी दिनेश पुरी का कहना है कि जल मार्गों पर निगरानी बढ़ने से तस्करों और अपराधियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके साथ ही स्थानीय नाविकों की भागीदारी से नदी क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।