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Video: 85 साल की उम्र में नौजवानों को मात दे रहे शंभूनाथ, एथलीट में जीत चुके हैं गोल्ड मेडल
Thu, 27 Apr 2023 12:58 PM IST
vivek shukla
प्रीती कश्यप, गोरखपुर।
प्रीती कश्यप, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 27 Apr 2023 12:58 PM IST
सार
शंभूनाथ की उम्र 85 वर्षीय है, लेकिन उनमें जुनून और जुझारूपन नौजवानों वाला है। इस उम्र में वह प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर दौड़कर गोल्ड मेडल ला रहे हैं। शंभूनाथ ने इंडो बांग्लादेश एथलेटिक्स मास्टर्स मीट व नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ऊंची दौड़ में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
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एथलीट शंभूनाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
उम्र चाहें कितनी भी हो हिम्मत, चाहत और जज़्बे से हर एक मुकाम हासिल किया जा सकता है। जज्बा हो तो उम्र कितनी भी हो उससे फर्क नहीं पड़ता है। बस जरूरत कार्य को पूरे जुनून के साथ करने की है। ऐसे ही एक उदाहरण हैं शहर के अलीनगर निवासी शंभूनाथ गुप्ता।
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शंभूनाथ की उम्र 85 वर्षीय है, लेकिन उनमें जुनून और जुझारूपन नौजवानों वाला है। इस उम्र में वह प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर दौड़कर गोल्ड मेडल ला रहे हैं। शंभूनाथ ने इंडो बांग्लादेश एथलेटिक्स मास्टर्स मीट व नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ऊंची दौड़ में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
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इस वर्ष वह अक्टूबर में हैदराबाद में होने वाले इंटरनेशनल मास्टर्स चैंपियनशिप में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। शंभूनाथ एनई रेलवे के कर्मचारी रह चुके हैं और वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए थे। इन्हें शुरू से खेलकूद में रुचि रही है। विद्यार्थी जीवन में भी उन्होंने विद्यालय, जिला व प्रदेश स्तरीय पर कई मेडल जीते हैं।
95 वर्षीय एथलीट दादी भगवानी देवी से हैं प्रेरित
शंभूनाथ के मुताबिक प्रादेशिक व राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इन मैचों में वह स्वयं के खर्च से शामिल होते हैं। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि सरकार की ओर से उन्हें कोई सहायता प्राप्त नहीं होती है।
वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले एथलेटिक्स के मैचों में शामिल होना चाहते हैं पर आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वहां तक जाने में असमर्थ होते हैं। उन्होंने कहा कि जब वह 95 वर्षीय एथलीट दादी भगवानी देवी को दौड़ता देखते हैं तो उन्हें प्रेरणा मिलती है। दौड़ने के अलावा उन्हें फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन खेलने में भी रुचि है।
खेलकूद के शौक के अलावा वह कला के भी शौकीन हैं। थर्माकोल का प्रयोग कर वह बड़ी से बड़ी इमारतों को भी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेलकूद में युवा अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके हुनर को निखारने के लिए मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने की जरूरत है।
वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले एथलेटिक्स के मैचों में शामिल होना चाहते हैं पर आर्थिक स्थिति ठीक न होने से वहां तक जाने में असमर्थ होते हैं। उन्होंने कहा कि जब वह 95 वर्षीय एथलीट दादी भगवानी देवी को दौड़ता देखते हैं तो उन्हें प्रेरणा मिलती है। दौड़ने के अलावा उन्हें फुटबॉल, हॉकी, बैडमिंटन खेलने में भी रुचि है।
खेलकूद के शौक के अलावा वह कला के भी शौकीन हैं। थर्माकोल का प्रयोग कर वह बड़ी से बड़ी इमारतों को भी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खेलकूद में युवा अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके हुनर को निखारने के लिए मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने की जरूरत है।