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एक्सप्लेनर: 31 आरोपी, कई राज्यों तक नेटवर्क; गोरखपुर असलहा तस्करी नेटवर्क में लॉरेंस गिरोह की जड़ें हैं गहरी
Wed, 14 Oct 2026 09:47 PM IST
अनुराग रंजन
अमर उजाला डिजिटल, गोरखपुर
अमर उजाला डिजिटल, गोरखपुर
Published by: अनुराग रंजन
Updated Wed, 14 Oct 2026 09:47 PM IST
सार
नेटवर्क की संभावित अंतरराज्यीय पहुंच को देखते हुए एसटीएफ बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के अलावा गोरखपुर, कुशीनगर तथा महराजगंज में भी संपर्कों और ठिकानों की पड़ताल कर रही है।
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असलहा तस्करी नेटवर्क के कुछ सदस्यों के तार लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े होने की आशंका है
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
पूर्वांचल में अवैध असलहों की खरीद-फरोख्त की जांच ने लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े एक ऐसे कथित नेटवर्क की ओर पुलिस का ध्यान खींचा है, जिसकी कड़ियां गोरखपुर और आसपास के जिलों से जुड़ी हैं। नेटवर्क से जुड़ककर गिरोह के गुर्गे मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान और नेपाल सीमा तक अपराधियों के संपर्क में हैं। गोरखपुर में पांच युवकों की गिरफ्तारी से शुरू हुई एसटीएफ की पड़ताल में स्थानीय स्तर पर पिस्टल खरीदने वालों, हथियार पहुंचाने वालों, सोशल मीडिया के जरिये संपर्क बनाने और हत्या की साजिश के आरोपों से जुड़े कई नाम सामने आए हैं। ताजा घटनाक्रम में एसटीएफ दो और संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। ऐसे में इस नेटवर्क से जुड़े कुल आरोपियों की संख्या अब 31 तक पहुंच चुकी है, जिनमें से 17 गिरफ्तार हो चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह जानना अहम है कि मध्य प्रदेश और हरियाणा से पूर्वांचल तक कैसे पहुंच रहे थे अवैध हथियार? इससे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम किस तरह जुड़ा हुआ है और पुलिस की जांच अबतक किन बिंदुओं पर टिकी है। जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आने की संभावना है। आइये जानते हैं...
एसटीएफ के मुताबिक, इस असलहा तस्करी नेटवर्क के कुछ सदस्यों के तार लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और गोल्डी बराड़ से जुड़े संपर्कों तक पहुंचने की आशंका है। जांच के दौरान इंस्टाग्राम पर हथियारों से संबंधित बातचीत के वीडियो, पुराने आपराधिक मुकदमों, कथित खरीदारों और हथियारों की आपूर्ति करने वालों के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क के जरिये पूर्वांचल में बड़ी संख्या में अवैध पिस्टल बेची गईं। हालांकि, इन संपर्कों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह जानना अहम है कि मध्य प्रदेश और हरियाणा से पूर्वांचल तक कैसे पहुंच रहे थे अवैध हथियार? इससे लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम किस तरह जुड़ा हुआ है और पुलिस की जांच अबतक किन बिंदुओं पर टिकी है। जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आने की संभावना है। आइये जानते हैं...
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एसटीएफ के मुताबिक, इस असलहा तस्करी नेटवर्क के कुछ सदस्यों के तार लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और गोल्डी बराड़ से जुड़े संपर्कों तक पहुंचने की आशंका है। जांच के दौरान इंस्टाग्राम पर हथियारों से संबंधित बातचीत के वीडियो, पुराने आपराधिक मुकदमों, कथित खरीदारों और हथियारों की आपूर्ति करने वालों के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क के जरिये पूर्वांचल में बड़ी संख्या में अवैध पिस्टल बेची गईं। हालांकि, इन संपर्कों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच का विषय है।
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इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि हथियार कहां से खरीदे जा रहे थे, उन्हें गोरखपुर तक कौन पहुंचाता था, स्थानीय खरीदार कौन थे और क्या इन हथियारों का इस्तेमाल गंभीर आपराधिक वारदातों में हुआ था? एसटीएफ और स्थानीय पुलिस इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं।
ऐसे खुला था मामला
16 सितंबर को गोरखपुर एसटीएफ की फील्ड यूनिट ने कैंट क्षेत्र में पैडलेगंज से मोहद्दीपुर जाने वाली सड़क पर विंध्यवासिनी पार्क के पास घेराबंदी कर पांच युवकों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से चार .32 बोर पिस्टल, चार मैगजीन, एक .32 बोर रिवाल्वर और कारतूस बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में श्रेयांश यादव उर्फ बबलू, अजीत यादव, अभिषेक गौड़ उर्फ भेली, अभिषेक प्रजापति उर्फ अभी और राहुल गुप्ता शामिल थे। ये आरोपी गोरखपुर, देवरिया और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े बताए गए। श्रेयांश यादव को पुलिस ने इस कथित नेटवर्क की एक प्रमुख कड़ी के रूप में चिह्नित किया।
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एसटीएफ के मुताबिक, प्रारंभिक पूछताछ में मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा और हरियाणा के सोनीपत से हथियार खरीदकर पूर्वांचल में पहुंचाने की जानकारी मिली। इसके बाद जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रही। पुलिस ने उन लोगों की पहचान करने की कोशिश शुरू की, जो हथियार उपलब्ध कराते थे, उन्हें स्थानीय स्तर पर बेचते थे या खरीदारों तक पहुंचाते थे। जांच आगे बढ़ने पर एसटीएफ ने इस मामले में 31 लोगों को आरोपी बनाने की जानकारी दी। इनमें स्थानीय स्तर पर सक्रिय बताए गए लोगों के अलावा दूसरे राज्यों से जुड़े संदिग्धों के नाम भी शामिल थे।
मध्य प्रदेश से पूर्वांचल तक हथियार पहुंचाने की है सप्लाई चेन
पुलिस की जांच में हथियारों की खरीद और बिक्री के बीच कई स्तर सामने आए हैं। एसटीएफ के अनुसार, श्रेयांश यादव मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सेंधवा से पिस्टल खरीदता था। इसके बाद गोरखपुर और आसपास के जिलों में स्थानीय संपर्कों के जरिये उनकी बिक्री किए जाने का आरोप है। पूछताछ में श्रेयांश ने अलग-अलग बोर और गुणवत्ता की पिस्टल 15 हजार से 40 हजार रुपये तक में खरीदने और आगे बेचने की बात बताई। पुलिस के अनुसार, इन हथियारों की बिक्री से प्रति पिस्टल 15 हजार से 20 हजार रुपये तक मुनाफा कमाने का दावा सामने आया है। इन बयानों और लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि के लिए जांच की जा रही है।
एसटीएफ की पड़ताल में अभिषेक गौड़ उर्फ भेली और राहुल गुप्ता के मध्य प्रदेश जाकर हथियार लाने से जुड़े बयान भी सामने आए। वहीं, अजीत यादव ने पूछताछ में श्रेयांश यादव और अंकित अग्रवाल से पिस्टल मिलने तथा उन्हें बताए गए लोगों तक पहुंचाने की बात कही। पुलिस के मुताबिक, इस कथित व्यवस्था में हर व्यक्ति सीधे हथियार खरीदने और बेचने का काम नहीं करता था। कुछ लोग बाहर से असलहे लाने, कुछ स्थानीय स्तर पर खरीदार तलाशने और कुछ तय व्यक्ति तक पिस्टल पहुंचाने में भूमिका निभाते थे। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि मध्य प्रदेश में हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों और पूर्वांचल में उनकी बिक्री करने वालों के बीच कितनी कड़ियां थीं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि अलग-अलग आरोपियों के संपर्क एक ही सप्लाई चेन से जुड़े थे या उनके अलग-अलग स्रोत थे।
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दो हजार रुपये कमीशन पर पिस्टल पहुंचाने का दावा
पूछताछ के दौरान सामने आए बयानों में हथियार पहुंचाने के बदले कमीशन मिलने की बात भी शामिल है। एसटीएफ के अनुसार, अजीत यादव ने बताया कि उसे श्रेयांश यादव और अंकित अग्रवाल से पिस्टल मिलती थी। इसके बाद वह उनके बताए लोगों तक हथियार पहुंचाता था। इसके बदले उसे प्रति पिस्टल कम से कम दो हजार रुपये मिलने की बात सामने आई। इसी तरह अभिषेक गौड़ उर्फ भेली ने मध्य प्रदेश जाकर हथियार लेने और बाद में बताए गए लोगों तक पिस्टल पहुंचाने की जानकारी दी। राहुल गुप्ता ने भी पूछताछ में अधिक आमदनी के लालच में इस गतिविधि से जुड़ने की बात कही। इन बयानों से जांच एजेंसी को नेटवर्क के भीतर कथित तौर पर काम के बंटवारे का संकेत मिला। हालांकि, पूछताछ में दिए गए बयानों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय पुलिस इनके समर्थन में दूसरे साक्ष्य जुटा रही है।
जांच का एक अहम पहलू यह है कि हथियारों की आपूर्ति करने वाले और उन्हें अंतिम खरीदार तक पहुंचाने वाले लोगों के बीच संपर्क कैसे स्थापित होता था। पुलिस मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक लेनदेन की पड़ताल कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि हथियारों की खरीद के लिए रकम कौन देता था और बिक्री से मिलने वाला पैसा किन लोगों तक पहुंचता था।
सोशल मीडिया की भूमिका जांच के केंद्र में, इंस्टाग्राम के जरिये बना रहे थे संपर्क
इस मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। एसटीएफ को हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संपर्कों की पड़ताल के दौरान इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, वीडियो में श्रेयांश यादव, बिट्टू इंदौरी और एक अन्य युवक विदेशी पिस्टल को लेकर बातचीत करते दिखाई देते हैं। वीडियो में हथियार के बोर और राउंड से संबंधित बातचीत होने की बात कही गई है। एसटीएफ वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों, उनके संपर्कों और हथियार की खरीद-फरोख्त से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में ऑस्ट्रिया की ग्लॉक, जर्मनी की पी-30 और तुर्की की जिगाना जैसी पिस्टलों के इस्तेमाल की जानकारी मिली थी। एजेंसी इन हथियारों के स्रोत और पूर्व में दर्ज मामलों में बरामद असलहों के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि विदेशी निर्मित बताए जा रहे हथियारों की आपूर्ति किस रास्ते से हुई और क्या उनका संबंध उसी नेटवर्क से है, जिसकी कड़ियां मध्य प्रदेश और हरियाणा तक पहुंच रही हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी किसी एक स्रोत को सभी हथियारों का निश्चित उद्गम नहीं माना जा सकता।
दो हजार रुपये कमीशन पर पिस्टल पहुंचाने का दावा
पूछताछ के दौरान सामने आए बयानों में हथियार पहुंचाने के बदले कमीशन मिलने की बात भी शामिल है। एसटीएफ के अनुसार, अजीत यादव ने बताया कि उसे श्रेयांश यादव और अंकित अग्रवाल से पिस्टल मिलती थी। इसके बाद वह उनके बताए लोगों तक हथियार पहुंचाता था। इसके बदले उसे प्रति पिस्टल कम से कम दो हजार रुपये मिलने की बात सामने आई। इसी तरह अभिषेक गौड़ उर्फ भेली ने मध्य प्रदेश जाकर हथियार लेने और बाद में बताए गए लोगों तक पिस्टल पहुंचाने की जानकारी दी। राहुल गुप्ता ने भी पूछताछ में अधिक आमदनी के लालच में इस गतिविधि से जुड़ने की बात कही। इन बयानों से जांच एजेंसी को नेटवर्क के भीतर कथित तौर पर काम के बंटवारे का संकेत मिला। हालांकि, पूछताछ में दिए गए बयानों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय पुलिस इनके समर्थन में दूसरे साक्ष्य जुटा रही है।
जांच का एक अहम पहलू यह है कि हथियारों की आपूर्ति करने वाले और उन्हें अंतिम खरीदार तक पहुंचाने वाले लोगों के बीच संपर्क कैसे स्थापित होता था। पुलिस मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक लेनदेन की पड़ताल कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि हथियारों की खरीद के लिए रकम कौन देता था और बिक्री से मिलने वाला पैसा किन लोगों तक पहुंचता था।
सोशल मीडिया की भूमिका जांच के केंद्र में, इंस्टाग्राम के जरिये बना रहे थे संपर्क
इस मामले में सोशल मीडिया की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। एसटीएफ को हथियारों की खरीद-फरोख्त से जुड़े संपर्कों की पड़ताल के दौरान इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मिलने की जानकारी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, वीडियो में श्रेयांश यादव, बिट्टू इंदौरी और एक अन्य युवक विदेशी पिस्टल को लेकर बातचीत करते दिखाई देते हैं। वीडियो में हथियार के बोर और राउंड से संबंधित बातचीत होने की बात कही गई है। एसटीएफ वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों, उनके संपर्कों और हथियार की खरीद-फरोख्त से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में ऑस्ट्रिया की ग्लॉक, जर्मनी की पी-30 और तुर्की की जिगाना जैसी पिस्टलों के इस्तेमाल की जानकारी मिली थी। एजेंसी इन हथियारों के स्रोत और पूर्व में दर्ज मामलों में बरामद असलहों के बीच संबंध की पड़ताल कर रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि विदेशी निर्मित बताए जा रहे हथियारों की आपूर्ति किस रास्ते से हुई और क्या उनका संबंध उसी नेटवर्क से है, जिसकी कड़ियां मध्य प्रदेश और हरियाणा तक पहुंच रही हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर अभी किसी एक स्रोत को सभी हथियारों का निश्चित उद्गम नहीं माना जा सकता।
लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से संपर्कों की जांच जारी
सटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कुछ ऐसे नाम सामने आए, जिनके कथित संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क से जुड़े बताए गए हैं। इनमें बिहार के पश्चिमी चंपारण क्षेत्र से जुड़े शशांक पांडेय उर्फ पंडित का नाम प्रमुखता से सामने आया। जांच एजेंसी के मुताबिक, शशांक के जरिये कुछ आरोपियों के संपर्क कथित तौर पर इस नेटवर्क तक पहुंचे थे। शशांक के गोल्डी बराड़ से जुड़े संपर्कों और विदेशी असलहों की आपूर्ति में संभावित भूमिका की पड़ताल की जा रही है। रोहित गोदारा से जुड़े संभावित संपर्कों की भी जांच का उल्लेख सामने आया है।
एसटीएफ ने यह भी बताया कि शशांक पहले विभिन्न मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। उसके पुराने मामलों, वर्तमान गतिविधियों और अन्य आरोपियों के साथ संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह हथियारों की खरीद, आपूर्ति या स्थानीय स्तर पर बिक्री में किस भूमिका में था।
मुंबई के पुराने मामले से भी जोड़ी गई कड़ी
एसटीएफ की पड़ताल में श्रेयांश यादव की गतिविधियों को मुंबई में दर्ज पुराने मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2025 में मुंबई पुलिस ने उसे हत्या के प्रयास के एक मामले में चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था। उस मामले में आरोपियों को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की सुपारी मिलने की बात जांच में सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, उसी प्रकरण में एक आरोपी विकास ठाकुर की अनमोल बिश्नोई से बातचीत की जानकारी भी जांच के दायरे में आई थी। इसके बाद श्रेयांश की गतिविधियों और उसके संपर्कों पर नजर रखे जाने की बात सामने आई।
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एजेंसी सूत्रों के अनुसार, आरोपी सीधे फोन पर बातचीत कम करते थे और इंटरनेट के लिए मॉडम का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। इंस्टाग्राम आईडी के जरिये संपर्क और हथियारों से संबंधित बातचीत की पड़ताल की जा रही है। इन जानकारियों का मौजूदा मामले से संबंध स्थापित करने के लिए पुलिस पुराने मुकदमों के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बीच संपर्कों का मिलान कर रही है।
40-40 हजार स्थानीय युवकों ने खरीदे पिस्टल
जांच के दौरान पूर्वांचल में हथियार खरीदने वाले स्थानीय लोगों के नाम भी सामने आए। एसटीएफ के अनुसार, बांसगांव क्षेत्र के प्रमोद यादव, सोनारी शंकर के सूरज यादव और खोराबार क्षेत्र के राजू यादव ने कथित तौर पर एक-एक पिस्टल 40-40 हजार रुपये में खरीदी थी। इन लोगों तक हथियार पहुंचाने में आदर्श यादव की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, प्रमोद यादव स्थानीय स्तर पर पिस्टल की आपूर्ति करता था और इंटरनेट पर फर्जी आईडी बनाकर संपर्क तथा लेनदेन करता था। राजू यादव को उसका सहयोगी बताया गया है। जांच में पीएसी से निलंबित सिपाही सूरज यादव की भूमिका भी सामने आई है।
एसटीएफ का दावा है कि प्रमोद यादव और सूरज यादव ने पुरानी रंजिश में एक युवक की हत्या कराने के इरादे से इसी नेटवर्क से चार पिस्टल करीब डेढ़ लाख रुपये में मंगाई थीं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार किन लोगों के लिए खरीदे गए थे और कथित साजिश में दूसरे लोगों की क्या भूमिका थी। यहां जांच का एक दूसरा सिरा भी है। पुलिस के अनुसार, प्रमोद यादव की फेसबुक पोस्ट सामने आने के बाद करीब पांच वर्ष पुरानी रंजिश से जुड़े मामले की पड़ताल तेज हुई। वर्ष 2021 में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव की तैयारी के दौरान शुरू हुआ विवाद बाद में रंजिश में बदलने की बात सामने आई।
पीड़ित पक्ष ने पहले भी जानलेवा हमले के आरोप लगाए थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मामले में विवेचना, न्यायालय के निर्देश पर दोबारा जांच और आरोप पत्र दाखिल होने जैसे चरण सामने आए। बाद में हरनही चौराहे पर एक युवक की गाड़ी रोककर हमला करने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया। एसटीएफ अब इन घटनाओं, कथित हथियार खरीद और हत्या की साजिश के आरोपों के बीच संबंध की पुष्टि करने में जुटी है। इस संबंध में सामने आए दावों का सत्यापन पुराने मुकदमों और अन्य साक्ष्यों से किया जाना बाकी है।
खंगाली जा रहीं पुराने आर्म्स एक्ट मामलों की कड़ियां
एसटीएफ की जांच केवल हाल में गिरफ्तार आरोपियों और उनके बताए संपर्कों तक सीमित नहीं है। पुलिस उन पुराने मामलों की भी पड़ताल कर रही है, जिनमें बरामद पिस्टलों का स्रोत इसी नेटवर्क से जुड़ा होने की आशंका है। जांच एजेंसी के अनुसार, कैंपियरगंज के एक आर्म्स एक्ट मामले में महाराजगंज के फरेंदा क्षेत्र के सिद्धार्थ के पास से बरामद पिस्टल तथा संतकबीरनगर के खलीलाबाद से जुड़े एक मामले में बरामद दो पिस्टलों के स्रोत की जांच की जा रही है। इन मामलों में मेहदावल निवासी चंद्रप्रकाश सिंह, सहजनवां के बघौरा निवासी ऋतिक सिंह और कुशीनगर के रामकोला निवासी अनुराग सिंह के नाम सामने आए हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन हथियारों को किससे खरीदा गया था, वे किन रास्तों से संबंधित लोगों तक पहुंचे और क्या इनकी आपूर्ति में गिरफ्तार आरोपियों की कोई भूमिका थी। जांच के इस चरण में हथियारों की बरामदगी, पुराने मुकदमों के दस्तावेज, आरोपियों के बयान और संपर्कों का मिलान महत्वपूर्ण है। यदि अलग-अलग मामलों में बरामद असलहों के स्रोत एक ही पाए जाते हैं, तो इससे कथित सप्लाई चेन को समझने में पुलिस को मदद मिल सकती है।
कई आरोपी अब भी तलाश में
सितंबर में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ने के साथ स्थानीय पुलिस और एसटीएफ ने अन्य संदिग्धों की तलाश तेज की। इसी क्रम में करन सोनकर को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, उसके कब्जे से .32 बोर की ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद हुई थी। पूछताछ में उसने पिस्टल श्रेयांश यादव से 25 हजार रुपये में खरीदने की बात कही। मामले में नामजद प्रमोद यादव और राजू यादव ने सितंबर में न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। दोनों की भूमिका, कथित हथियार खरीद और नेटवर्क से जुड़े संपर्कों की जांच के लिए पुलिस ने जेल में बयान दर्ज करने तथा न्यायालय से रिमांड लेकर पूछताछ करने की तैयारी की जानकारी दी।
इसके बाद की कार्रवाई में एसटीएफ ने रितेश दत्त त्रिपाठी उर्फ बोलबम त्रिपाठी उर्फ अभिषेक पंडित उर्फ छोटू को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। एजेंसी के अनुसार, उसके पास से दो .32 बोर पिस्टल, दो मैगजीन और एक कारतूस बरामद हुआ। आरोप है कि वह मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से पिस्टल लाकर गोरखपुर और आसपास के जिलों में बेचता था। एसटीएफ के मुताबिक, रितेश ने पूछताछ में प्रति पिस्टल करीब 12 हजार रुपये में हथियार खरीदने और आगे बिक्री से मुनाफा कमाने की बात बताई। पुलिस ने इस कथित आपूर्ति व्यवस्था में राजू और ‘डॉक्टर’ नाम से पहचाने गए व्यक्ति की भूमिका की भी पड़ताल की।
बाद के घटनाक्रम में पुलिस ने अन्य आरोपियों और संदिग्धों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। एक चरण पर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में नाबालिग समेत 16 आरोपियों को जेल भेजे जाने और 17 नामजद आरोपियों की तलाश जारी रहने की बात सामने आई। इसके बाद भी गिरफ्तारियों और पूछताछ का सिलसिला आगे बढ़ा।
राजस्थान और नेपाल सीमा तक पहुंची तलाश
एसटीएफ के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्धों की लोकेशन राजस्थान और नेपाल सीमा के आसपास मिलने की जानकारी भी सामने आई। शशांक पांडेय की तलाश में राजस्थान पुलिस से संपर्क किए जाने और संभावित ठिकानों पर दबिश देने की बात कही गई। इसी तरह हरियाणा के सोनीपत निवासी सुमित कुमार दिलावर और कुशीनगर क्षेत्र से जुड़े आकाश सिंह, आसिफ तथा कृष्णा काका की लोकेशन नेपाल सीमा के आसपास मिलने की जानकारी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, इन लोगों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। कार्रवाई की भनक लगने के बाद कुछ संदिग्धों के सीमा पार चले जाने की सूचना की भी पड़ताल की गई।
नेटवर्क की संभावित अंतरराज्यीय पहुंच को देखते हुए एसटीएफ बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के अलावा गोरखपुर, कुशीनगर तथा महराजगंज में भी संपर्कों और ठिकानों की पड़ताल कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य केवल फरार आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि हथियारों के स्रोत से लेकर अंतिम खरीदार तक की पूरी कड़ी का पता लगाना है।
सटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कुछ ऐसे नाम सामने आए, जिनके कथित संपर्क लॉरेंस बिश्नोई गिरोह और गोल्डी बराड़ के नेटवर्क से जुड़े बताए गए हैं। इनमें बिहार के पश्चिमी चंपारण क्षेत्र से जुड़े शशांक पांडेय उर्फ पंडित का नाम प्रमुखता से सामने आया। जांच एजेंसी के मुताबिक, शशांक के जरिये कुछ आरोपियों के संपर्क कथित तौर पर इस नेटवर्क तक पहुंचे थे। शशांक के गोल्डी बराड़ से जुड़े संपर्कों और विदेशी असलहों की आपूर्ति में संभावित भूमिका की पड़ताल की जा रही है। रोहित गोदारा से जुड़े संभावित संपर्कों की भी जांच का उल्लेख सामने आया है।
एसटीएफ ने यह भी बताया कि शशांक पहले विभिन्न मामलों में गिरफ्तार हो चुका है। उसके पुराने मामलों, वर्तमान गतिविधियों और अन्य आरोपियों के साथ संपर्कों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह हथियारों की खरीद, आपूर्ति या स्थानीय स्तर पर बिक्री में किस भूमिका में था।
मुंबई के पुराने मामले से भी जोड़ी गई कड़ी
एसटीएफ की पड़ताल में श्रेयांश यादव की गतिविधियों को मुंबई में दर्ज पुराने मामले से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस के अनुसार, अप्रैल 2025 में मुंबई पुलिस ने उसे हत्या के प्रयास के एक मामले में चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था। उस मामले में आरोपियों को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की सुपारी मिलने की बात जांच में सामने आई थी। पुलिस के मुताबिक, उसी प्रकरण में एक आरोपी विकास ठाकुर की अनमोल बिश्नोई से बातचीत की जानकारी भी जांच के दायरे में आई थी। इसके बाद श्रेयांश की गतिविधियों और उसके संपर्कों पर नजर रखे जाने की बात सामने आई।
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एजेंसी सूत्रों के अनुसार, आरोपी सीधे फोन पर बातचीत कम करते थे और इंटरनेट के लिए मॉडम का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई। इंस्टाग्राम आईडी के जरिये संपर्क और हथियारों से संबंधित बातचीत की पड़ताल की जा रही है। इन जानकारियों का मौजूदा मामले से संबंध स्थापित करने के लिए पुलिस पुराने मुकदमों के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बीच संपर्कों का मिलान कर रही है।
40-40 हजार स्थानीय युवकों ने खरीदे पिस्टल
जांच के दौरान पूर्वांचल में हथियार खरीदने वाले स्थानीय लोगों के नाम भी सामने आए। एसटीएफ के अनुसार, बांसगांव क्षेत्र के प्रमोद यादव, सोनारी शंकर के सूरज यादव और खोराबार क्षेत्र के राजू यादव ने कथित तौर पर एक-एक पिस्टल 40-40 हजार रुपये में खरीदी थी। इन लोगों तक हथियार पहुंचाने में आदर्श यादव की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, प्रमोद यादव स्थानीय स्तर पर पिस्टल की आपूर्ति करता था और इंटरनेट पर फर्जी आईडी बनाकर संपर्क तथा लेनदेन करता था। राजू यादव को उसका सहयोगी बताया गया है। जांच में पीएसी से निलंबित सिपाही सूरज यादव की भूमिका भी सामने आई है।
एसटीएफ का दावा है कि प्रमोद यादव और सूरज यादव ने पुरानी रंजिश में एक युवक की हत्या कराने के इरादे से इसी नेटवर्क से चार पिस्टल करीब डेढ़ लाख रुपये में मंगाई थीं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि हथियार किन लोगों के लिए खरीदे गए थे और कथित साजिश में दूसरे लोगों की क्या भूमिका थी। यहां जांच का एक दूसरा सिरा भी है। पुलिस के अनुसार, प्रमोद यादव की फेसबुक पोस्ट सामने आने के बाद करीब पांच वर्ष पुरानी रंजिश से जुड़े मामले की पड़ताल तेज हुई। वर्ष 2021 में जिला पंचायत सदस्य के चुनाव की तैयारी के दौरान शुरू हुआ विवाद बाद में रंजिश में बदलने की बात सामने आई।
पीड़ित पक्ष ने पहले भी जानलेवा हमले के आरोप लगाए थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मामले में विवेचना, न्यायालय के निर्देश पर दोबारा जांच और आरोप पत्र दाखिल होने जैसे चरण सामने आए। बाद में हरनही चौराहे पर एक युवक की गाड़ी रोककर हमला करने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया। एसटीएफ अब इन घटनाओं, कथित हथियार खरीद और हत्या की साजिश के आरोपों के बीच संबंध की पुष्टि करने में जुटी है। इस संबंध में सामने आए दावों का सत्यापन पुराने मुकदमों और अन्य साक्ष्यों से किया जाना बाकी है।
खंगाली जा रहीं पुराने आर्म्स एक्ट मामलों की कड़ियां
एसटीएफ की जांच केवल हाल में गिरफ्तार आरोपियों और उनके बताए संपर्कों तक सीमित नहीं है। पुलिस उन पुराने मामलों की भी पड़ताल कर रही है, जिनमें बरामद पिस्टलों का स्रोत इसी नेटवर्क से जुड़ा होने की आशंका है। जांच एजेंसी के अनुसार, कैंपियरगंज के एक आर्म्स एक्ट मामले में महाराजगंज के फरेंदा क्षेत्र के सिद्धार्थ के पास से बरामद पिस्टल तथा संतकबीरनगर के खलीलाबाद से जुड़े एक मामले में बरामद दो पिस्टलों के स्रोत की जांच की जा रही है। इन मामलों में मेहदावल निवासी चंद्रप्रकाश सिंह, सहजनवां के बघौरा निवासी ऋतिक सिंह और कुशीनगर के रामकोला निवासी अनुराग सिंह के नाम सामने आए हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन हथियारों को किससे खरीदा गया था, वे किन रास्तों से संबंधित लोगों तक पहुंचे और क्या इनकी आपूर्ति में गिरफ्तार आरोपियों की कोई भूमिका थी। जांच के इस चरण में हथियारों की बरामदगी, पुराने मुकदमों के दस्तावेज, आरोपियों के बयान और संपर्कों का मिलान महत्वपूर्ण है। यदि अलग-अलग मामलों में बरामद असलहों के स्रोत एक ही पाए जाते हैं, तो इससे कथित सप्लाई चेन को समझने में पुलिस को मदद मिल सकती है।
कई आरोपी अब भी तलाश में
सितंबर में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ने के साथ स्थानीय पुलिस और एसटीएफ ने अन्य संदिग्धों की तलाश तेज की। इसी क्रम में करन सोनकर को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक, उसके कब्जे से .32 बोर की ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद हुई थी। पूछताछ में उसने पिस्टल श्रेयांश यादव से 25 हजार रुपये में खरीदने की बात कही। मामले में नामजद प्रमोद यादव और राजू यादव ने सितंबर में न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था। दोनों की भूमिका, कथित हथियार खरीद और नेटवर्क से जुड़े संपर्कों की जांच के लिए पुलिस ने जेल में बयान दर्ज करने तथा न्यायालय से रिमांड लेकर पूछताछ करने की तैयारी की जानकारी दी।
इसके बाद की कार्रवाई में एसटीएफ ने रितेश दत्त त्रिपाठी उर्फ बोलबम त्रिपाठी उर्फ अभिषेक पंडित उर्फ छोटू को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। एजेंसी के अनुसार, उसके पास से दो .32 बोर पिस्टल, दो मैगजीन और एक कारतूस बरामद हुआ। आरोप है कि वह मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से पिस्टल लाकर गोरखपुर और आसपास के जिलों में बेचता था। एसटीएफ के मुताबिक, रितेश ने पूछताछ में प्रति पिस्टल करीब 12 हजार रुपये में हथियार खरीदने और आगे बिक्री से मुनाफा कमाने की बात बताई। पुलिस ने इस कथित आपूर्ति व्यवस्था में राजू और ‘डॉक्टर’ नाम से पहचाने गए व्यक्ति की भूमिका की भी पड़ताल की।
बाद के घटनाक्रम में पुलिस ने अन्य आरोपियों और संदिग्धों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। एक चरण पर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में नाबालिग समेत 16 आरोपियों को जेल भेजे जाने और 17 नामजद आरोपियों की तलाश जारी रहने की बात सामने आई। इसके बाद भी गिरफ्तारियों और पूछताछ का सिलसिला आगे बढ़ा।
राजस्थान और नेपाल सीमा तक पहुंची तलाश
एसटीएफ के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े कुछ संदिग्धों की लोकेशन राजस्थान और नेपाल सीमा के आसपास मिलने की जानकारी भी सामने आई। शशांक पांडेय की तलाश में राजस्थान पुलिस से संपर्क किए जाने और संभावित ठिकानों पर दबिश देने की बात कही गई। इसी तरह हरियाणा के सोनीपत निवासी सुमित कुमार दिलावर और कुशीनगर क्षेत्र से जुड़े आकाश सिंह, आसिफ तथा कृष्णा काका की लोकेशन नेपाल सीमा के आसपास मिलने की जानकारी सामने आई। एजेंसी के अनुसार, इन लोगों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई। कार्रवाई की भनक लगने के बाद कुछ संदिग्धों के सीमा पार चले जाने की सूचना की भी पड़ताल की गई।
नेटवर्क की संभावित अंतरराज्यीय पहुंच को देखते हुए एसटीएफ बिहार, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के अलावा गोरखपुर, कुशीनगर तथा महराजगंज में भी संपर्कों और ठिकानों की पड़ताल कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य केवल फरार आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि हथियारों के स्रोत से लेकर अंतिम खरीदार तक की पूरी कड़ी का पता लगाना है।
मोबाइल और बैंक खातों से जुड़े साक्ष्य अहम
इस पूरे मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एसटीएफ गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों के बीच नियमित संपर्क था, हथियार खरीदने के लिए भुगतान किस माध्यम से किया जाता था और बिक्री से मिलने वाली रकम किसे मिलती थी।
पुलिस जांच से मिलेगा इन बड़े सवालों के जवाब?
इस पूरे घटनाक्रम में एसटीएफ के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। पहला, मध्य प्रदेश और हरियाणा में हथियार उपलब्ध कराने वाले वास्तविक स्रोत कौन हैं? दूसरा, पूर्वांचल में हथियार पहुंचाने और स्थानीय खरीदारों तक उनकी आपूर्ति करने में किसकी क्या भूमिका थी? तीसरा, क्या अलग-अलग जिलों में बरामद पिस्टलों का स्रोत एक ही नेटवर्क था? चौथा सवाल कथित आपराधिक वारदातों से जुड़ा है। पुलिस को उन मामलों की भी पड़ताल करनी है, जिनमें पूछताछ के दौरान तस्करी के जरिये बेची गई पिस्टलों के इस्तेमाल का दावा सामने आया। राजकुमार चौहान हत्याकांड में इस्तेमाल असलहे को इसी नेटवर्क से उपलब्ध कराए जाने की बात भी पुलिस ने कही है। इस संबंध की पुष्टि के लिए संबंधित मुकदमे के साक्ष्यों और हथियारों के रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।
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पांचवां सवाल लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और उनसे जुड़े बताए जा रहे संपर्कों की वास्तविक भूमिका से जुड़ा है। एसटीएफ इस दिशा में सामने आए नामों, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों की जांच कर रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन संपर्कों का कथित असलहा तस्करी नेटवर्क से किस स्तर तक संबंध था। इसके अलावा पुलिस को फरार आरोपियों की तलाश, हथियारों के संभावित खरीदारों की पहचान और पुराने मामलों में बरामद असलहों के स्रोत की पुष्टि भी करनी है।
इस पूरे मामले में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एसटीएफ गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किन लोगों के बीच नियमित संपर्क था, हथियार खरीदने के लिए भुगतान किस माध्यम से किया जाता था और बिक्री से मिलने वाली रकम किसे मिलती थी।
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पुलिस के मुताबिक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों पर संपर्क स्थापित किए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में फर्जी आईडी के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। जांच एजेंसी इन डिजिटल संपर्कों को आरोपियों के बयानों और पुराने मुकदमों के रिकॉर्ड से मिलाकर देख रही है। मोबाइल और बैंक खातों से मिलने वाली जानकारी से यह स्पष्ट करने की कोशिश है कि कि कथित नेटवर्क के अलग-अलग सदस्य एक-दूसरे को जानते थे या नहीं, उनके बीच हथियारों के लेनदेन से संबंधित बातचीत हुई थी या नहीं और धन के प्रवाह की कड़ी किन लोगों तक पहुंचती है।पुलिस जांच से मिलेगा इन बड़े सवालों के जवाब?
इस पूरे घटनाक्रम में एसटीएफ के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। पहला, मध्य प्रदेश और हरियाणा में हथियार उपलब्ध कराने वाले वास्तविक स्रोत कौन हैं? दूसरा, पूर्वांचल में हथियार पहुंचाने और स्थानीय खरीदारों तक उनकी आपूर्ति करने में किसकी क्या भूमिका थी? तीसरा, क्या अलग-अलग जिलों में बरामद पिस्टलों का स्रोत एक ही नेटवर्क था? चौथा सवाल कथित आपराधिक वारदातों से जुड़ा है। पुलिस को उन मामलों की भी पड़ताल करनी है, जिनमें पूछताछ के दौरान तस्करी के जरिये बेची गई पिस्टलों के इस्तेमाल का दावा सामने आया। राजकुमार चौहान हत्याकांड में इस्तेमाल असलहे को इसी नेटवर्क से उपलब्ध कराए जाने की बात भी पुलिस ने कही है। इस संबंध की पुष्टि के लिए संबंधित मुकदमे के साक्ष्यों और हथियारों के रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है।
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पांचवां सवाल लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और उनसे जुड़े बताए जा रहे संपर्कों की वास्तविक भूमिका से जुड़ा है। एसटीएफ इस दिशा में सामने आए नामों, डिजिटल साक्ष्यों और आरोपियों के बयानों की जांच कर रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन संपर्कों का कथित असलहा तस्करी नेटवर्क से किस स्तर तक संबंध था। इसके अलावा पुलिस को फरार आरोपियों की तलाश, हथियारों के संभावित खरीदारों की पहचान और पुराने मामलों में बरामद असलहों के स्रोत की पुष्टि भी करनी है।