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गोरखपुर: जिला महिला अस्पताल एसएनसीयू में 2404 नवजात शिशुओं की बचाई गई जान

Thu, 13 Feb 2020 12:46 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Feb 2020 12:46 PM IST
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2404 newborn rescued in District Women Hospital gorakhpur SNCU
सांकेतिक तस्वीर।
जिला महिला अस्पताल में मई 2018 से संचालित सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) मई 2018 से लेकर अब तक 2404 नवजातों की जान बचा चुका है। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि इस यूनिट में 24 घंटे आक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता रहती है। यहां पर  प्री-मेच्योर, हाइपोथर्मिया, कम वजन समेत 24 बीमारियों के लक्षणों वाले नवजातों को भर्ती कर इलाज व देखभाल की जाती है। स्वस्थ होने के बाद ही नवजात डिस्चार्ज किए जाते हैं।
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18 बेड के एसएनसीयू में प्रति माह औसतन 139 नवजात बच्चे भर्ती किए जाते हैं। इन बच्चों को ऑक्सीजन देने के लिए प्रति माह औसतन 40-45 ऑक्सीजन सिलेंडर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। चिकित्सालय में न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एनआईसीयू) की सुविधा फिलहाल नहीं है।
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केस एक: जन्म के समय काफी कम वजन होने के कारण पाली ब्लॉक की वंदना यादव के नवजात शिशु को 3 फरवरी को एसएनसीयू में भर्ती किया गया। पूर्णतया स्वस्थ होने पर बुधवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। वंदना और उनके पति बच्चे की तीमारदारी व स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट हैं।
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केस दो: शहर के देवनाथपुर की रहने वालीं मानसी का बच्चा जिला महिला अस्पताल में ही पैदा हुआ है। बच्चा काफी कमजोर होने के कारण चिकित्सकों ने एसएनसीयू में भर्ती करने का सुझाव दिया। उनके बच्चे की यहां नियमित देखभाल हो रही है। स्टॉफ सहयोगी प्रवृत्ति का है।

इन्हें रखते हैं एसएनसीयू में

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि 34 सप्ताह से पहले पैदा, 1800 ग्राम से कम वजन, चार किलो वाले या 40 सप्ताह में पैदा बच्चों के लिए एसएनसीयू की सुविधा अनिवार्य है। इसके अलावा पेरीनेंटल एफीक्सिया, न्यूओनेटल जॉंडिस (पीलिया),
रेस्प्रेटरी डिस्ट्रेस (सांस लेने में बाधा), रेफ्यूजल टू फीड (दूध नहीं पीना),  सेंट्रल क्यूनोसिस, एप्निया या गैस्पिंग (सांस फूलना), न्यूओनेटल कंवल्सन (झटके आना), बेबी ऑफ डायबिटिक मदर, डायरिया समेत 24 स्थितियों में नवजात को यहां रख कर इलाज देते हैं।

एसएनसीयू को जानिए
जन्म लेने से 28 दिन तक बच्चे को नवजात माना जाता है। जन्म के तुरंत बाद अगर बच्चे में कोई भी स्वास्थ्य संबंधित परेशानी है तो उसे एसएनसीयू में भर्ती किया जाता है। नवजात तब तक चिकित्सक व स्टॉफ की देखभाल में रहता है, जब तक कि वह स्वस्थ न हो जाए।
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